Supreme Court FSSAI Labeling मामले में सोमवार को सुनवाई के दौरान पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज चेतावनी लेबल लागू करने की समयसीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से सवाल किए। अदालत ने खास तौर पर उस प्रस्ताव पर सवाल उठाया, जिसमें नियम लागू होने के बाद खाद्य कारोबार संचालकों को 365 दिनों की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि देने की बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
यह मामला 3S एंड आवर हेल्थ सोसाइटी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग लागू करने की मांग की गई है।
क्या है Front-of-Package Labelling?

Front-of-Package Labelling (FoPL) पैकेट के सामने दिखाई जाने वाली पोषण संबंधी चेतावनी या जानकारी होती है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को किसी खाद्य उत्पाद में मौजूद चिंता वाले पोषक तत्वों के बारे में आसानी से समझ आने वाली जानकारी देना है, ताकि वे खरीदारी के समय अधिक सूचित निर्णय ले सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा है कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की स्पष्ट लेबलिंग उपभोक्ताओं को जानकारी देने और खाद्य उत्पादों में सुधार की दिशा में मदद कर सकती है।
लाल षट्कोण वाला चेतावनी लेबल क्या है?

FSSAI की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर लाल रंग का षट्कोण (Red Hexagon) लगाया जा सकता है, जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक चिंता वाले पोषक तत्व पाए जाते हैं।
प्रस्ताव में HIGH FAT, HIGH SUGAR और HIGH SALT जैसी चेतावनियों का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। FSSAI ने इन सीमाओं के लिए 2024 में जारी ICMR-NIN की Dietary Guidelines for Indians को आधार बनाने का प्रस्ताव रखा है।
इस लेबल का उद्देश्य पैकेट के सामने ही उपभोक्ता को यह संकेत देना है कि संबंधित उत्पाद में कुछ पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 365 दिन की अवधि पर क्यों सवाल उठाया?
सुनवाई के दौरान पीठ ने FSSAI की प्रस्तावित समयसीमा पर सवाल उठाया। अदालत का सवाल था कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा है तो नियम लागू करने के लिए एक साल की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि की जरूरत क्यों है।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि FSSAI को प्रक्रिया पूरी करने और नियमों को लागू करने में इतना समय क्यों चाहिए। सोमवार की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
FSSAI ने क्या प्रस्ताव दिया है?
FSSAI ने अदालत को बताया कि नए मसौदा नियम तैयार करने और उन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में समय लगेगा। प्रस्तावित प्रक्रिया में मसौदा संशोधन नियमों को हितधारकों की आपत्तियों और सुझावों के लिए प्रकाशित करने तथा घरेलू स्तर पर और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मंच के माध्यम से परामर्श करने की बात कही गई है।
इसके बाद नियमों को अंतिम रूप देने का प्रस्ताव है। FSSAI ने नियमों की अधिसूचना के बाद खाद्य कारोबार संचालकों के लिए 365 दिन की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि का भी प्रस्ताव रखा है।
पहले की व्यवस्था से क्या अलग है?
इस मामले में FSSAI की ओर से पहले Indian Nutrition Rating (INR) आधारित स्टार-रेटिंग प्रणाली का प्रस्ताव रखा गया था। 2022 में प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी को सरल तरीके से उपलब्ध कराना था। बाद की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के सामने FSSAI ने लाल षट्कोण आधारित चेतावनी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा।
10 सितंबर 2026 के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से FoPL की अनिवार्य प्रकृति, लाल षट्कोण के आकार, रंग, पोषक तत्वों की प्रस्तुति और संभावित स्वैच्छिक अनुपालन अवधि समेत कई पहलुओं पर जवाब मांगा था। इसके बाद मामले की सुनवाई 28 सितंबर के लिए तय की गई थी।
कोर्ट ने पहले भी जताई थी तेजी की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर के आदेश में कहा था कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर FoPL लागू करने की दिशा में तत्काल और महत्वपूर्ण प्रगति की जरूरत है। अदालत ने HFSS यानी हाई फैट, शुगर या साल्ट वाले खाद्य पदार्थों और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं का भी उल्लेख किया था।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि स्पष्ट FoPL व्यवस्था उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के प्रस्तावित टाइमलाइन और फ्रंट-ऑफ-पैकेज चेतावनी लेबल से जुड़े मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि लाल षट्कोण वाला लेबल कब से सभी संबंधित पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य रूप से दिखाई देगा।
Supreme Court FSSAI Labeling मामले में अब अदालत के आदेश से यह स्पष्ट होगा कि FoPL लागू करने की समयसीमा क्या होगी और FSSAI की प्रस्तावित 365 दिन की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि को लेकर क्या दिशा-निर्देश दिए जाते हैं।