इस साल जून में जब अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक संघर्ष विराम समझौता हुआ था तो उसे ‘इस्लामाबाद MoU’ का नाम दिया गया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने खुद को इस शांति समझौते के मुख्य सूत्रधार के रूप में पेश किया था।
डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत बड़ा झटका देते हुए अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध में मध्यस्थता करवाने वाले देशों की लिस्ट से पाकिस्तान को बाहर कर दिया है। ये पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि शहबाज शरीफ और असीम मुनीर इसे अपनी जीत की तरह पेश कर रहे थे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा ‘हम सऊदी अरब, UAE और कतर के समर्थन से ईरान के अनुरोध पर बातचीत कर रहे हैं।’
राष्ट्रपति ट्रंप ने वाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान पर होने वाले बड़े हमले को फिलहाल रोक दिया है और दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला है। उन्होंने जिन तीन देशों को मध्यस्थ बताया है उनमें सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के नाम हैं। यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा कूटनीतिक झटका है। पाकिस्तान को लेकर ट्रंप प्रशासन में मतभेद बन रहे थे और कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने चीनी हथियारों की डिलीवरी ईरान को की है।
आपको बता दें कि इस साल जून में जब अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक संघर्ष विराम समझौता हुआ था तो उसे ‘इस्लामाबाद MoU’ का नाम दिया गया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने खुद को इस शांति समझौते के मुख्य सूत्रधार के रूप में पेश किया था। लेकिन ट्रंप ने अब अपने ‘फेवरेट जनरल’ को बहुत बड़ा झटका दिया है। ट्रंप की तरफ से सिर्फ सऊदी अरब, यूएई और कतर का नाम लेने का मतलब है कि ट्रंप प्रशासन की नजर में अब पाकिस्तान की तुलना में इन अमीर अरब देशों का प्रभाव ईरान और क्षेत्र की राजनीति पर बहुत ज्यादा मजबूत है।
अमेरिकी जनरल ने पाकिस्तान को फटकारा
वहीं पूर्व अमेरिकी जनरल का कहना है कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा ‘पाकिस्तान और कतर की निष्पक्षता पर सवाल हैं। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों और दूसरे देशों को अच्छी तरह पता है कि वे ईरान का पक्ष लेते हैं। ईरान के लिए उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर अनुचित प्रभाव डाला है।’