Ukraine School Attack: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच एक बार फिर आम नागरिकों की जान जाने की दर्दनाक खबर सामने आई है। यूक्रेन के जापोरिजिया क्षेत्र के कोमिशुवाखा गांव में राहत सामग्री बांटने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे एक स्कूल पर रूसी हवाई हमला हुआ। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के मुताबिक, इस हमले में अब तक 40 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं, 30 से अधिक लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। घटनास्थल पर पिछले तीन दिनों से राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
यह स्कूल केवल शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र नहीं था, बल्कि स्थानीय लोगों को मानवीय सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा था। हमले के समय वहां बड़ी संख्या में लोग सहायता लेने पहुंचे थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुट गए।

मिली जानकारी के अनुसार, रूस ने उस एक स्कूल को निशाना बनाया, जहां लोगों को राहत सामग्री बांटी जा रही थी। बताया जा रहा है कि इस हमले में अब तक 40 लोगों की मौत हो गई है और कई अभी भी मलबे में दबे है। यूक्रेन में हुए इस हवाई हमले की इजरायल ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है।
राहत सामग्री बांट रहे स्कूल को बनाया गया निशाना
यह घटना नवंबर 2026 को यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी जापोरिजिया क्षेत्र के कोमिशुवाखा गांव में हुई। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, यहां एक स्कूल में स्थानीय नागरिकों को मानवीय सहायता वितरित की जा रही थी। इसी दौरान रूसी हवाई हमला हुआ।

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि रूसी सेना ने इस हमले में नौ हवाई बमों का इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक, शुरुआत में उन लोगों को निशाना बनाया गया जो राहत सामग्री लेने के लिए स्कूल पहुंचे थे। इसके बाद घटनास्थल पर पहुंचे बचावकर्मियों और पुलिस अधिकारियों पर भी हमले किए गए।
हमले के कारण स्कूल परिसर और आसपास के हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते बड़े स्तर पर तलाशी और बचाव अभियान शुरू किया गया।
HIGHLIGHTS
- यूक्रेन के कोमिशुवाखा में रूसी हवाई हमले से 40 लोगों की मौत
- राहत सामग्री बांटने वाले स्कूल को बनाया गया निशाना
- मलबे में 30 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका, बचाव अभियान जारी
मृतकों की संख्या बढ़कर 40 हुई, 30 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका

हमले के बाद शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या कम बताई गई थी। लेकिन राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ आंकड़ा बढ़ता गया। 4 नवंबर को राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जानकारी दी कि इस हमले में अब तक 40 लोगों की मौत की खबर है।
उन्होंने बताया कि मलबे के नीचे अभी भी 30 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका है। कुछ मृतकों के शवों की पहचान भी अभी तक नहीं हो पाई है। ऐसे में बचाव दल के सामने मलबे में फंसे लोगों को तलाशने के साथ मृतकों की पहचान करने की चुनौती भी है।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, अभियान बेहद मुश्किल परिस्थितियों में चलाया जा रहा है। घटनास्थल पर लगातार नए हमलों का खतरा बना हुआ है, जिसके कारण राहतकर्मियों को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है।
जेलेंस्की ने जताया दुख, अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए इस हमले के बारे में जानकारी दी। ये हमले सोमवार की सुबह किए गए थे। हमले के बाद 18 लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी, जोकि बढ़कर 40 हो गई है। अभी भी राहत और बचाव कार्य जारी है। इस हमले को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दुख जताया है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर घटना की जानकारी दी और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान लगातार जारी है और सभी जरूरी सेवाओं को इसमें लगाया गया है।
जेलेंस्की ने इस हमले को बेहद गंभीर बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने यूक्रेन को तत्काल वायु रक्षा सहायता उपलब्ध कराने की अपील की। उनका कहना है कि रूस के लगातार हमलों के खतरे के बीच बचाव अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इजरायल ने भी हमले की निंदा की
इजरायल सरकार ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा, यूक्रेन के कोमिशुवाखा से आई भयानक खबर से हमें गहरा दुख हुआ है, जहां रूसी हमले में 40 लोग मारे गए हैं। जिन नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें एक स्कूल भी शामिल था, जिसका इस्तेमाल मानवीय सहायता बांटने के केंद्र के रूप में किया जा रहा था। कई लोग अभी भी लापता हैं। हम इस हमले की निंदा करते हैं और मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। हम घायलों के जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करते हैं।
इस घटना पर इजरायल की ओर से भी दुख और संवेदना जताए जाने की बात सामने आई है। साझा बयान के अनुसार, इजरायल ने नागरिक ठिकानों और मानवीय सहायता केंद्र के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे स्कूल को निशाना बनाए जाने की निंदा की और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
हमले में घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई। युद्ध के बीच राहत और मानवीय सहायता केंद्रों की सुरक्षा को लेकर यह घटना एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।
रूस ने हमले को लेकर क्या कहा?
अपनी पोस्ट में जेलेंस्की ने बताया था कि रूस ने जापोरिजिया क्षेत्र के कोमिशुवाखा बस्ती में एक स्कूल पर रूसी हमले वाली जगह पर पिछले तीन दिनों से राहत और बचाव अभियान चल रहा है। रूसियों ने 9 हवाई बमों का इस्तेमाल किया। उन्होंने सबसे पहले उन लोगों को निशाना बनाया जो मानवीय सहायता लेने आए थे, और फिर उन बचाव कर्मियों और पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया जो मौके पर पहुंचे थे।
उन्होंने बताया कि, सभी जरूरी सेवाएं इस काम में जुटी हैं। यह एक बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण अभियान है, जिसे रूस द्वारा लगातार नए हमले किए जाने के खतरे के बीच अंजाम दिया जा रहा है। अब तक 40 लोगों के मारे जाने की खबर है। दुर्भाग्य से, कुछ शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। मारे गए लोगों के परिवारों और उनके करीबियों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मलबे के नीचे अभी भी 30 से ज्यादा लोग दबे हो सकते हैं।
इस हमले को लेकर रूस और यूक्रेन के दावों में अंतर है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी कार्रवाई का निशाना कोमिशुवाखा और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद यूक्रेनी सैन्य इकाइयां थीं। रूस ने हमले में यूक्रेनी सैनिकों के मारे जाने का दावा भी किया है।
वहीं, यूक्रेन का कहना है कि हमला उस स्थान पर हुआ जहां आम नागरिक मानवीय सहायता लेने के लिए जुटे थे। दोनों देशों ने नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है।
तीसरे दिन भी जारी रहा राहत और बचाव अभियान
कोमिशुवाखा में हमले के बाद तीसरे दिन भी बचाव अभियान जारी रहा। पुलिस, आपातकालीन सेवाओं और अन्य राहत एजेंसियों के कर्मचारी मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कुछ शवों की पहचान नहीं होने के कारण मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी चल रही है।
इस हमले में 40 लोगों की मौत की जानकारी यूक्रेनी राष्ट्रपति की ओर से दी गई है, जबकि 30 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही हताहतों की अंतिम संख्या और घटना से जुड़ी पूरी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।