VB-G RAM G Scheme: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार योजना के क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाईपॉवर राज्य परिषद गठित करने का प्रस्ताव है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम, 2026 का मसौदा जारी किया है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्य परिषद योजना के कामकाज की नियमित समीक्षा करेगी। साथ ही निगरानी व्यवस्था, शिकायतों के निवारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर योजना के प्रभाव का मूल्यांकन करने की दिशा में भी काम करेगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह नियमों का ड्राफ्ट है। इसलिए परिषद की प्रस्तावित संरचना और जिम्मेदारियों को अंतिम रूप से लागू व्यवस्था मानने से पहले सरकार की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियमों को देखना जरूरी होगा।
मुख्यमंत्री होंगे अध्यक्ष, पंचायत मंत्री को मिलेगी उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, राज्य स्तर पर गठित होने वाली परिषद की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री को परिषद का उपाध्यक्ष बनाने का प्रावधान है।
परिषद में संबंधित विभागों के मंत्रियों के साथ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष, मुख्य सचिव और वीबी-जी राम जी योजना के आयुक्त को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था का उद्देश्य योजना से जुड़े विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद राज्य स्तर पर योजना की प्रगति की समीक्षा कर सकेगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों को सुधार के सुझाव दे सकेगी।
योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगी परिषद

VB-G RAM G Scheme के तहत प्रस्तावित परिषद की प्रमुख जिम्मेदारी ग्रामीण रोजगार से जुड़े कार्यों के क्रियान्वयन पर नजर रखना होगी। इसके लिए योजना की प्रगति, कामकाज और निगरानी व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
यदि योजना के संचालन में कोई कमी सामने आती है, तो परिषद सुधार के लिए राज्य सरकार को सिफारिशें दे सकेगी। इसके साथ ही योजना से संबंधित शिकायतों के निवारण की व्यवस्था की समीक्षा करना भी इसकी जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
इससे योजना के क्रियान्वयन में सामने आने वाली समस्याओं की पहचान करने और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी सुधार सुझाने में मदद मिल सकती है।
शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र को बेहतर बनाने पर जोर
प्रस्तावित नियमों में शिकायत निवारण और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा को भी महत्व दिया गया है। परिषद समय-समय पर यह देख सकेगी कि शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया किस तरह काम कर रही है और उसमें किन सुधारों की जरूरत है।
परिषद इस संबंध में सरकार को सुझाव देगी, ताकि योजना के कामकाज की निगरानी और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इसके अलावा केंद्रीय परिषद के साथ समन्वय स्थापित करना भी प्रस्तावित राज्य परिषद की जिम्मेदारी होगी। इससे केंद्र और राज्य स्तर पर योजना के क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों पर तालमेल बनाने में सहायता मिल सकती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े जुटाने का प्रावधान
नई व्यवस्था में केवल रोजगार योजना के कार्यों की समीक्षा ही नहीं, बल्कि उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने पर भी जोर दिया गया है।
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, परिषद को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े आंकड़े एकत्र करने या एकत्र करवाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। विभिन्न योजनाओं का मूल्यांकन कर उनके परिणामों को समझने की व्यवस्था भी इसमें शामिल है।
इन आंकड़ों के आधार पर यह जानने में मदद मिल सकती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं का क्रियान्वयन किस तरह हो रहा है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। हालांकि, इस मूल्यांकन के वास्तविक तरीके और प्रक्रिया अंतिम नियमों तथा उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
विधानसभा में पेश होने वाली वार्षिक रिपोर्ट भी तैयार करेगी परिषद

प्रस्तावित परिषद की एक अहम जिम्मेदारी राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए जाने वाले वार्षिक प्रतिवेदन की तैयारी करना भी होगी।
वार्षिक रिपोर्ट के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन और उससे संबंधित गतिविधियों का विवरण विधानसभा के सामने रखा जा सकेगा। इससे योजना की प्रगति और प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा के लिए एक औपचारिक दस्तावेज उपलब्ध होगा।
परिषद की भूमिका केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि केंद्रीय परिषद के साथ समन्वय और रिपोर्ट तैयार करने जैसे काम भी प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा होंगे।
साल में कम से कम एक बैठक का प्रस्ताव
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, राज्य परिषद की बैठक साल में कम से कम एक बार आयोजित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इससे अधिक बैठकें भी बुलाई जा सकेंगी।
बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। यदि मुख्यमंत्री उपस्थित नहीं होते हैं, तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
बैठक के लिए परिषद के कुल सदस्यों में से कम से कम एक-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति जरूरी रखने का प्रस्ताव है। इससे परिषद की बैठक और विचार-विमर्श के लिए न्यूनतम उपस्थिति का प्रावधान निर्धारित किया जाएगा।
गैर-सरकारी सदस्यों को भी मिलेगा प्रतिनिधित्व
प्रस्तावित नियमों में परिषद में पंचायत राज संस्थाओं, श्रमिक संगठनों और समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े प्रतिनिधियों को शामिल करने की व्यवस्था भी रखी गई है।
ड्राफ्ट के मुताबिक, अधिकतम 15 गैर-सरकारी सदस्य नामित किए जा सकेंगे। इनमें कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होंगी। इसके अलावा कम से कम एक-तिहाई सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों से होंगे।
इस प्रावधान का उद्देश्य परिषद में अलग-अलग सामाजिक समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इससे योजना के क्रियान्वयन और ग्रामीण जरूरतों से संबंधित मुद्दों पर विभिन्न पक्षों के विचार सामने आ सकेंगे।
क्या होगा नई परिषद का मुख्य उद्देश्य?
VB-G RAM G Scheme के लिए प्रस्तावित हाईपॉवर राज्य परिषद का मुख्य उद्देश्य योजना की निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन के लिए राज्य स्तर पर एक समन्वित व्यवस्था तैयार करना है।
इसके तहत योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा, शिकायत निवारण तंत्र में सुधार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था से संबंधित आंकड़ों का संग्रह, केंद्रीय परिषद से समन्वय और विधानसभा में पेश की जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट की तैयारी जैसे काम शामिल होंगे।
फिलहाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से नियमों का मसौदा जारी किया गया है। आगे इस प्रस्ताव पर होने वाली प्रक्रिया और अंतिम नियमों की अधिसूचना से स्पष्ट होगा कि परिषद की संरचना और जिम्मेदारियों को किस रूप में लागू किया जाएगा।