Youth Congress Suspension: कांग्रेस की युवा इकाई इंडियन यूथ कांग्रेस ने दिल्ली में राहुल गांधी की रैली में शामिल नहीं होने वाले अपने 200 से ज्यादा सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली से अनुपस्थित रहने पर सात राज्यों के कम से कम 185 सदस्यों को अब तक निलंबित किया जा चुका है। उनसे गैरहाजिरी को लेकर जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों के मुताबिक, अनुशासनात्मक समीक्षा पूरी होने के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है और निलंबित सदस्यों की संख्या 500 तक पहुंचने की संभावना है।

हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी इंडी गठबंधन की रैली में शामिल न होने के कारण इंडियन यूथ कांग्रेस ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अपने 200 से ज्यादा सदस्यों को निलंबित कर दिया है।
निलंबन पत्रों से पता चलता है कि अब तक सात राज्यों में कम से कम 185 सदस्यों को निलंबित किया गया है और उनसे उनकी अनुपस्थिति के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार, अनुशासनात्मक समीक्षा के बाद यह संख्या बढ़कर 500 तक पहुंच सकती है।

इस फैसले के बाद युवा कांग्रेस के भीतर असंतोष की स्थिति बन गई है। कुछ निलंबित नेताओं ने सवाल उठाया है कि पार्टी के लिए वर्षों तक काम करने और आंदोलनों में हिस्सा लेने के बावजूद सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने पर उनके खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई क्यों की गई। युवा कांग्रेस के महासचिव रहे रोहित राजोरिया ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है।
सात राज्यों में 185 से ज्यादा सदस्यों पर कार्रवाई

Youth Congress Suspension के तहत अब तक सात राज्यों में संगठन के सदस्यों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। निलंबन पत्रों के मुताबिक, सबसे अधिक कार्रवाई मध्य प्रदेश में हुई है। इसके बाद गुजरात और पश्चिम बंगाल का स्थान है।
हालांकि, यूथ कांग्रेस के कुछ निलंबित सदस्यों ने इस बात पर हैरानी जताई है कि पार्टी ने उन्हें सिर्फ एक घटना के आधार पर कैसे आंक लिया, जबकि उन्होंने पार्टी की सेवा में अपने जीवन के कई साल दिए हैं।
यूथ कांग्रेस के महासचिव रोहित राजोरिया को बिना अपनी बात रखने का मौका दिए उनके पद से हटा दिया गया। इस पर उन्होंने कहा, “हमने पार्टी के लिए एफआईआर का सामना किया और जेल भी गए। क्या हमें सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने की वजह से हटाया जा रहा है?”
राज्यों के अनुसार निलंबित सदस्यों की संख्या इस प्रकार बताई गई है:
- मध्य प्रदेश: 60 सदस्य
- गुजरात: 49 सदस्य
- पश्चिम बंगाल: 26 सदस्य
- तेलंगाना: 14 सदस्य
- मध्य उत्तर प्रदेश: 13 सदस्य
- हिमाचल प्रदेश: 13 सदस्य
- हरियाणा: 10 सदस्य
इन आंकड़ों के मुताबिक कुल 185 सदस्यों पर कार्रवाई हुई है। वहीं, संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अनुशासनात्मक समीक्षा के बाद यह संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल 500 तक सदस्यों के निलंबन की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इस संख्या को अंतिम सूची नहीं माना जा सकता।
रोहित राजोरिया ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
राजोरिया ने बताया कि कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा मनमाने ढंग से काम कर रही है, जबकि उन्होंने पार्टी के लिए 15 साल तक काम किया है। इस दौरान, पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने की वजह से उनके खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज हुईं और उन्हें तीन-चार बार जेल भी जाना पड़ा।
उन्होंने एक कार्ड दिखाया, जिसमें लोगों से उनके दिवंगत चाचा की तेरवीं में शामिल होने का आग्रह किया गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इस शोक के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था और यह भी बता दिया था कि वे 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की रैली के लिए दिल्ली नहीं आ पाएंगे।
सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल न होने पर तुरंत हटा दिए जाने के बाद राजोरिया ने सवाल उठाया है कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी सत्ता में लौटने की उम्मीद कैसे कर सकती है।
युवा कांग्रेस के महासचिव रहे रोहित राजोरिया ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने संगठन के लिए करीब 15 साल तक काम किया है। उनके मुताबिक, पार्टी के विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज हुईं और उन्हें तीन से चार बार जेल भी जाना पड़ा।
राजोरिया का कहना है कि पार्टी के लिए इतने वर्षों तक सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका दिए बिना पद से हटा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने के आधार पर किसी कार्यकर्ता की पूरी राजनीतिक भूमिका को नजरअंदाज किया जा सकता है।
उनके बयान के बाद यह मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संगठन के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तरीके को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
HighLights
- युवा कांग्रेस ने राहुल गांधी की रैली से अनुपस्थिति पर कार्रवाई की।
- लगभग 200 सदस्य निलंबित, यह संख्या 500 तक पहुंचने की उम्मीद।
- रोहित राजोरिया ने पारिवारिक शोक के कारण अनुपस्थिति का हवाला दिया।
चाचा की तेरवीं के कारण दिल्ली नहीं जा सके राजोरिया
रोहित राजोरिया ने अपनी अनुपस्थिति की वजह पारिवारिक शोक बताई है। उन्होंने एक निमंत्रण कार्ड दिखाते हुए बताया कि उनके दिवंगत चाचा की तेरवीं का कार्यक्रम था। इसी कारण वह 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी की रैली में शामिल नहीं हो सके।
राजोरिया के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पहले ही अपनी पारिवारिक परिस्थिति की जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन को किसी सदस्य के खिलाफ निर्णय लेने से पहले उसकी परिस्थितियों और लंबे समय के योगदान को भी देखना चाहिए।
उनका आरोप है कि युवा कांग्रेस में कार्रवाई का तरीका मनमाना है। हालांकि, इस मामले में संगठन की ओर से राजोरिया के आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
एक रैली से गैरहाजिरी पर संगठन में बढ़ी नाराजगी
दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली में विपक्षी इंडी गठबंधन के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी की मौजूदगी को देखते हुए युवा कांग्रेस के सदस्यों की उपस्थिति भी संगठन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
रैली के बाद अनुपस्थित सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई ने संगठन के अंदर बहस छेड़ दी है। एक तरफ अनुशासन बनाए रखने के लिए पार्टी नेतृत्व की सख्ती की बात सामने आ रही है, तो दूसरी तरफ निलंबित सदस्यों का कहना है कि उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों और संगठन के लिए किए गए कामों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
यूथ कांग्रेस ने सबसे बड़ी कार्रवाई मध्य प्रदेश में की है, जहां 60 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके बाद गुजरात में 49 और पश्चिम बंगाल में 26 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा, तेलंगाना में 14, मध्य उत्तर प्रदेश में 13, कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश में 13 और हरियाणा में 10 सदस्यों को निलंबित किया गया है।
अब आगे क्या करेगी युवा कांग्रेस?
फिलहाल सात राज्यों में 185 सदस्यों के निलंबन की जानकारी सामने आई है। संगठन की अनुशासनात्मक समीक्षा के बाद और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में निलंबन की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
Youth Congress Suspension का यह मामला कांग्रेस के सामने संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी करता है। अब देखना होगा कि युवा कांग्रेस नेतृत्व निलंबित सदस्यों के जवाब पर क्या फैसला लेता है और क्या इस कार्रवाई को लेकर संगठन के भीतर उठ रहे सवालों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया जाता है।