सुकमा। छिंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रसूति वार्ड पहली ही बारिश में गंभीर अव्यवस्थाओं का सामना कर रहा है. एनएच-30 पर स्थित अस्पताल की छत से लगातार पानी टपकने से प्रसूताओं और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं. दीवारों में नमी बढ़ने से करंट फैलने की आशंका भी बनी हुई है. पिछले तीन दिनों से बिजली बंद रहने के कारण बड़ा हादसा टल गया.
जानकारी के अनुसार, बारिश के दौरान वार्ड की छत से कई स्थानों पर पानी रिसने लगा। हालात ऐसे हो गए कि वार्ड का फर्श और मरीजों के बेड तक भी भीग गए। परिजनों का कहना है कि पानी टपकने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गीले बिस्तरों को समय पर नहीं बदले जाने के आरोप भी लगाए गए हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।

सबसे बड़ी चिंता बिजली से जुड़े संभावित हादसे को लेकर है। अस्पताल की दीवारों में लगातार नमी बढ़ने से करंट फैलने की आशंका बनी हुई है। हालांकि पिछले तीन दिनों से अस्पताल की बिजली आपूर्ति बंद रहने के कारण किसी बड़े हादसे से बचाव हो गया। यदि बिजली चालू रहती तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।
बताया गया कि मई में आए आंधी-तूफान में छत क्षतिग्रस्त हुई थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई. बारिश के दौरान वार्ड का फर्श और मरीजों के बेड तक भीगने की शिकायत सामने आई है. परिजनों ने बिस्तर नियमित नहीं बदले जाने का भी आरोप लगाया है. युवा कांग्रेस ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत जारी है. बीएमओ ने जल्द समस्या दूर करने का भरोसा दिया है. बारिश के बीच मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. मानसून ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तैयारियों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी हैबताया जा रहा है कि मई महीने में आए तेज आंधी-तूफान के दौरान अस्पताल की छत क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। मानसून शुरू होते ही इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में इस तरह की लापरवाही चिंताजनक है और इसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।