राजनांदगांव के ग्राम आलीवारा मुसरा और बरगा में हाल ही बने रेलवे ओवरब्रिज की सड़क पहली बारिश में धंस गई। 50 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल का जून में ही उद्घाटन हुआ था, जिसमें अब लंबी दरारें पड़ गई हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के ग्राम आलीवारा मुसरा और ग्राम बरगा में हाल ही में बनी रेलवे ओवर ब्रिज की सड़के पहली ही बारिश में उखड गई हैं।
इनमें लंबी-लंबी दरारें पडं गई हैं। लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत से बने ब्रिज का बीते जून में ही उद्घाटन किया गया था। लेकिन दो दिनों की बारिश में ही अलीवारा, मुसरा और बरगा रेलवे ओवरब्रिज की सड़क फटने लगी हैं।
बरगा रेलवे ब्रिज पर तो लगभग 100 मीटर के क्षेत्र में एप्रोच रोड दो हिस्सों में बट गईं। यहां लगभग दो फीट गहरी और 5-6 इंच चौड़ी दरारें सड़क के बीचो-बीच बन गई, जिससे सड़क दो हिस्सों में बट गई।
रेलवे ओवर ब्रिज की सड़क धसने की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई. इसके बाद मौके पर रेलवे इंजीनियर और निर्माण कंपनी के संचालक भी पहुंच गए।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल
पुल की सड़क पर डामर धंसने और लंबी दरारें पड़ने के बाद इसकी लीपापोती के लिए सड़क पर दरारें को कंक्रीट से भरा जाने लगास जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। पहली बारिश में पुल की सड़क धंसकर फटने को लेकर स्थानीय लोगों में इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठाए।
ग्राम बरगा निवासी चतुर राम यादव ने कहा कि इस पुल की जांच कराई जाए और संबंधित इंजीनियर, ठेकेदार और इन्हें बचाने वाले नेताओं पर भी कार्रवाई की जाए। पुल की सड़क पर पड़ी दरारों की असल स्थिति जानने के लिए यहां पर ड्राई डिजाइन तैयार करने वाले इंजीनियर और दूसरे अधिकारी भी निरीक्षण करेंगे। लेकिन इससे पहले ही डामर की सड़क पर दरारें में कंक्रीट भरने का काम किया जाता रहा।
पुल की सड़क धसने के मामले को लेकर बरगा पहुंचे निर्माण कंपनी के डायरेक्टर राजेंद्र सिंह घाई का कहना है कि बारिश की वजह से मिट्टी सेटल होने की चलते ऐसा हुआ होगा। बीच में पानी रिसाव होने की वजह से गढ्ढा दिख रहा है. उन्होंने कहा कि सही जानकारी ब्रिज डिजाइन करने वाले तकनीकी इंजीनियर ही दे सकते हैं।
पुल की सड़क धंसने की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे रेलवे के असिस्टेंट डिवीजन इंजीनियर मिथिलेश कुमार ने कहा कि दोनों ओर से पानी फाउंडेशन के भीतरजाने से दरार आ गई है। उनके मुताबिक, माइनर सेटलमेंट की वजह से ऐसा दिखाई दे रहा है। इसे दोबारा बनाकर ठीक करवा दिया जाएगा।
कार्यवाई के निर्देश
इधर पहली ही बारिश में रेलवे के तीन पुल की सड़क धसने की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन में भी हड़कंप पहुंच गया है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने रेलवे ओवरब्रिज के गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य की शिकायत मिलने पर दक्षिण मध्य रेलवे को पत्र लिखकर कार्यवाई के निर्देश दिए हैं।