एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि गर्म समुद्र और एटमॉस्फियर की वजह से बादल फटने जैसी बारिश हो रही है

हिमाचल प्रदेश के शिमला के राजहाना में लगातार भारी बारिश की वजह से हुए बड़े लैंडस्लाइड के बाद एक चार पहिया गाड़ी मलबे में दबी हुई है
अल नीनो (El Nino) के कारण मानसून में होने वाली बारिश कम होने की आशंका है, लेकिन जलवायु परिवर्तन देश भर में भारी बारिश की घटनाओं को तेजी से बढ़ा रहा है. विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है. उनका कहना है कि सामान्य से कम मानसून होने का मतलब यह नहीं है कि बादल फटने जैसी विनाशकारी बारिश नहीं होगी.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की वार्षिक मानसून रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक भारी बारिश (एक दिन में 20.4 सेंटीमीटर से अधिक) की घटनाओं में पिछले कुछ सालों में भारी उछाल आया है. यह संख्या साल 2008 में 64 थी, जो बढ़कर 2024 में 181 हो गई. जबकि 2025 में ऐसी 160 घटनाएं दर्ज की गईं, जो बारिश के इस चरम रूप में लगातार हो रही बढ़ोतरी को दर्शाती हैं.

जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के इस बदलते पैटर्न को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बढ़ते तापमान से बढ़ावा मिल रहा है, जो वायुमंडल में अधिक गर्मी और नमी पहुंचा रहे हैं. चूंकि तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के साथ गर्म वायुमंडल लगभग 7 प्रतिशत अधिक नमी सोख सकता है, इसलिए अनुकूल मौसम प्रणालियां अब कम समय में कहीं अधिक तीव्र बारिश पैदा करने में सक्षम हैं.
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एसोसिएट प्रोफेसर उपासना घोष ने कहा कि भारत में बारिश के बदलते पैटर्न के पीछे जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा कारण है, जो अल नीनो की वजह से और भी गंभीर होता जा रहा है.
उन्होंने आगे कहा, “भारतीय शहर भारी बारिश का सामना कर रहे हैं, लेकिन वे इस तरह की बारिश से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. हमारा शहरी नियोजन सिस्टम जलवायु से जुड़े कारकों को ध्यान में नहीं रख रहा है, जिससे शहर लगातार कमजोर और असुरक्षित हो रहे हैं. विशेष रूप से तेजी से बढ़ते महानगरों के लिए क्लाइमेट रेजिलिएंस को अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए.”

उन्होंने यह भी कहा कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों का तेजी से गर्म होना, सामान्य से कम मानसून के दौरान भी भारी बारिश की आशंका को बढ़ा रहा है. इसलिए अब बाढ़ के पूर्वानुमान, बुनियादी ढांचे की प्लानिंग और आपदा तैयारी के तरीकों में बड़े बदलाव की जरूरत है.
पर्यावरणविद् मनु सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन ने अल नीनो के भारतीय मानसून पर पड़ने वाले असर के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है. मनु सिंह ने कहा, “अल नीनो के साल में भी, जब बारिश के दिनों की संख्या कम हो सकती है, बारिश की अलग-अलग घटनाएं असाधारण रूप से गंभीर और अनिश्चित हो सकती हैं. हम लगातार देख रहे हैं कि बारिश के दिन कम हो रहे हैं, लेकिन जब बारिश होती है, तो वह अक्सर विनाशकारी रूप ले लेती है.”