ईंधन की बढ़ी हुई कीमत और पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को लेकर बढ़ते आक्रोश के बीच उपभोक्ताओं से लेकर विपक्ष तक ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर जोर-शोर से उठाया है। अब इस पूरे अभियान को सड़कों पर लाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए ई-20 जनता पार्टी नाम के एक समूह ने मोर्चा संभाला है। इसके अलावा विपक्षी दल (आप-कांग्रेस) और कुछ और संगठनों की तरफ से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के संकेत दिए गए हैं।
नीट पेपर लीक को लेकर युवाओं के आंदोलन और इसकी सफलता के बाद अब एक और मुद्दा केंद्र सरकार के लिए सिरदर्द बन सकता है। यह मुद्दा है इथेनॉल युक्त पेट्रोल का, जिसे इस वक्त देश के हर पेट्रोल पंप से बेचा जा रहा है। बीते करीब तीन महीने से पूरे देश में ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। दरअसल, केंद्र सरकार की तरफ से 2025 से ही पूरे देश में ई20 पेट्रोल को मानक के तौर पर निर्धारित कर दिया था, जबकि आम लोगों की शिकायत है कि 2023 से पहले भारत में ई20 ईंधन के लिए उपयुक्त गाड़ियां न के बराबर मौजूद थीं।
पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन की सफलता के बाद ई20 पेट्रोल के खिलाफ भी आवाजें बुलंद हो रही हैं। इसी कड़ी में हाल ही में सीजेपी की ही तर्ज पर सोशल मीडिया पर एक और समूह की ओर से शुरू किया गया आंदोलन तेजी से जोर पकड़ रहा है। इस समूह ने अपना नाम ई20 जनता पार्टी (ईजेपी) दिया है और यह देश में ई20 पेट्रोल की अनिवार्यता खत्म करने और देश के परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कैसे पूरे देश में ई20 पेट्रोल मुद्दा बनता जा रहा है? किस-किस संगठन और समूह ने ई20 के खिलाफ आवाज उठाई है? इसमें सबसे ताजा तौर पर जुड़ी ई20 जनता पार्टी यानी ईजेपी क्या है? इन सबकी मांगें क्या हैं? पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट बीते वर्षों में कैसे मुद्दा बनता चला गया है? ई20 पेट्रोल को लेकर आंदोलन की बात क्यों हो रही है? विपक्ष इसके लिए किस तरह तैयारी कर रहा है? सरकार का इस पर क्या रुख है? आइये जानते हैं…
कैसे ई20 के खिलाफ देशभर में उठ रहीं आवाज?
सरकार की ई20 यानी इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की नीति के खिलाफ देशभर में विरोध के स्वर तेजी से बढ़े हैं। यह विरोध सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर अब सड़कों और अलग-अलग संगठनों के समर्थन तक पहुंच रहा है।
उपभोक्ताओं ने उठाई अधिकारों और पारदर्शिता की मांग
ई20 के मुद्दे पर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की तरफ से शिकायतें आई हैं। कई वाहन विशेषज्ञों और कार-बाइक मालिकों का कहना है कि वे इथेनॉल मिश्रण के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि उपभोक्ताओं को ई20 के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिलना चाहिए। वे पेट्रोल पंपों पर पारदर्शी लेबलिंग, माइलेज और इंजन पर ई20 के असर को लेकर स्वतंत्र अध्ययन, सरकारी डेटा के प्रकाशन और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
तहसीन पूनावाला ने उठाया मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने सोशल मीडिया पर ई20 के खिलाफ चल रहे डिजिटल अभियान को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने ई20 के खिलाफ आवाज उठाने वालों के लिए टीम भारत का गठन किया है और एक्स पर पोस्ट करते हुए लोगों से गाड़ी मार्च गांधी मार्च (#GaadiMarchGandhiMarch) अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने लगातार यह तर्क दिया है कि उपभोक्ताओं को इथेनॉल-मिश्रित ई20 ईंधन और 100% शुद्ध पेट्रोल में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने की पूरी आजादी होनी चाहिए। उन्होंने ई20 ईंधन नीति का कड़ा विरोध करते हुए, एक वीडियो में उन्होंने यहां तक आरोप लगाया है कि इस नीति की वजह से गडकरी के बेटे और अधिक अमीर हो गए हैं।
परिवहन संघों का जमीनी समर्थन
ई20 के खिलाफ मौजूदा समय में जो अभियान चल रहा है, उसे अब परिवहन संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। दिल्ली टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोटर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने ई20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को संसद तक एक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। इन संगठनों का आरोप है कि ई20 ईंधन से विशेष रूप से पुराने वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) कम हो रही है, इंजन का प्रदर्शन गिर रहा है और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है।
मुंबई की विजय रैली में गूंजे ई20 के खिलाफ नारे
हाल ही में मुंबई के शिवाजी पार्क के बाहर शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे की ओर से सीजेपी की सफलता का जश्न मनाने के लिए एक विजय रैली आयोजित की गई थी, जिसमें हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया। इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ई20 वाहनों और लोगों की जेब दोनों को मार रहा है और नितिन गडकरी के इस्तीफे के नारे लगाए गए।