NEET UG खत्म होगा? तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव, सरकार ने गिनाईं NEET की कमियां

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NEET UG खत्म करने की मांग फिर तेज

NEET UG को लेकर तमिलनाडु सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार विधानसभा में ऐसा प्रस्ताव लाने जा रही है, जिसमें केंद्र से राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल दाखिले के लिए लागू NEET व्यवस्था को खत्म करने की मांग की जाएगी।

तमिलनाडु सरकार लंबे समय से NEET के स्थान पर 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले की वकालत करती रही है। सरकार का तर्क है कि परीक्षा में सामने आने वाली कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और दोबारा परीक्षा जैसी परिस्थितियों से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ता है।

विधानसभा में NEET के खिलाफ प्रस्ताव की तैयारी

तमिलनाडु विधानसभा में NEET व्यवस्था को समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के.जी. अरुणराज की ओर से पेश किए जाने की तैयारी है।

प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर अंडरग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए लागू एक समान NEET व्यवस्था को समाप्त करने और इससे जुड़े केंद्रीय कानूनों में आवश्यक बदलाव करने का आग्रह किया जाएगा।

इसमें नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019, नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन एक्ट, 2020 और नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी एक्ट, 2020 समेत संबंधित कानूनों में संशोधन की मांग शामिल है।

पहले भी NEET से छूट की मांग कर चुका है तमिलनाडु

तमिलनाडु विधानसभा पहले भी NEET से राज्य को छूट दिलाने के लिए विधेयक पारित कर चुकी है। राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से तमिलनाडु एडमिशन टू अंडरग्रेजुएट मेडिकल डिग्री कोर्सेज बिल, 2021 को मंजूरी दी थी।

इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए NEET से छूट हासिल करना था। हालांकि, इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल सकी।

अब राज्य सरकार एक बार फिर केंद्र से राष्ट्रीय स्तर पर NEET व्यवस्था को समाप्त करने के लिए संबंधित कानूनों में बदलाव की मांग करने की तैयारी कर रही है।

तमिलनाडु सरकार ने NEET के खिलाफ क्या तर्क दिए?

NEET को खत्म करने के पक्ष में तमिलनाडु सरकार ने परीक्षा प्रणाली से जुड़ी कई चिंताओं का उल्लेख किया है। प्रस्ताव में कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के साथ-साथ परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराए जाने जैसी परिस्थितियों का भी जिक्र किया गया है।

सरकार का कहना है कि ऐसी घटनाओं का असर लाखों मेडिकल उम्मीदवारों पर पड़ता है और इससे परीक्षा प्रणाली के प्रति भरोसा प्रभावित हो सकता है।

NEET के खिलाफ सरकार के प्रमुख तर्क

  • परीक्षा में बार-बार पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आना।
  • परीक्षा रद्द होने या दोबारा आयोजित होने से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ना।
  • सामाजिक न्याय और समान अवसर से जुड़ी चिंताएं।
  • ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों पर संभावित अतिरिक्त दबाव।
  • क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के सामने आने वाली चुनौतियां।
  • महंगे कोचिंग संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता।
  • NEET की तैयारी के कारण स्कूल के पाठ्यक्रम से छात्रों का ध्यान हटने की चिंता।

क्या 12वीं के अंकों से होगा मेडिकल में एडमिशन?

तमिलनाडु सरकार NEET के विकल्प के तौर पर 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश की व्यवस्था की मांग करती रही है।

राज्य की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था में MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों की राज्य कोटे की सीटों को 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की बात कही गई है।

इसका उद्देश्य राज्य के विद्यार्थियों को मेडिकल दाखिले में स्कूल स्तर पर किए गए प्रदर्शन के आधार पर अवसर देना है।

NEET खत्म होने पर डॉक्टर कैसे बनेंगे? एक्सपर्ट की अलग राय

हालांकि NEET को पूरी तरह खत्म करके पुराने राज्य स्तर के मार्क्स-बेस्ड एडमिशन सिस्टम पर लौटने को लेकर विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है।

लाडली फाउंडेशन के संस्थापक देवेंद्र कुमार के अनुसार, केवल NEET को समाप्त करके 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिला देना समाधान नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि पुराने सिस्टम में स्थानीय प्रभाव, राजनीतिक दबाव और अन्य प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं।

उनके मुताबिक, देश जैसे बड़े और विविधतापूर्ण सिस्टम में मेडिकल शिक्षा में दाखिले के लिए पारदर्शी और समान मानकों वाली व्यवस्था जरूरी है। उनका मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का उद्देश्य छात्रों को समान मूल्यांकन का अवसर देना है।

NEET UG को लेकर तमिलनाडु का पुराना विरोध

तमिलनाडु में NEET का विरोध नया नहीं है। राज्य सरकार लंबे समय से यह तर्क देती रही है कि राष्ट्रीय स्तर की एकल प्रवेश परीक्षा का असर राज्य के ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर और क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करने वाले छात्रों पर पड़ सकता है।

राज्य सरकार की मांग है कि मेडिकल शिक्षा में दाखिले के लिए राज्यों को अधिक अधिकार दिए जाएं और राज्य कोटे की सीटों पर 12वीं के अंकों को आधार बनाया जाए।

NEET 2026 में कितने उम्मीदवार शामिल हुए?

प्रस्ताव से जुड़े विवरण के अनुसार, 3 मई 2026 को NEET-UG 2026 का आयोजन देशभर में 5,432 परीक्षा केंद्रों पर कराया गया था। तमिलनाडु में परीक्षा 31 शहरों में आयोजित हुई।

देशभर में करीब 22.05 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें तमिलनाडु से लगभग 1.4 लाख अभ्यर्थी बताए गए हैं।

यही वजह है कि NEET से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव का असर देशभर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों और मेडिकल एडमिशन सिस्टम पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार के सामने रखा जाएगा। हालांकि, केवल विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने से NEET व्यवस्था तुरंत समाप्त नहीं होगी। राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल प्रवेश व्यवस्था में बदलाव के लिए संबंधित केंद्रीय कानूनों और मौजूदा नियमों में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

फिलहाल तमिलनाडु सरकार की ओर से NEET को खत्म करने की मांग एक बार फिर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस के केंद्र में आ गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।

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