Monsoon Rain 2026: बारिश से सुधरी स्थिति, फिर भी एल-नीनो से सूखे का खतरा क्यों?

Spread the love

नई दिल्ली: मानसून के शुरुआती दौर में कम बारिश से चिंतित भारत के लिए अगस्त की शुरुआत राहत लेकर आई है। देश के कई हिस्सों में हुई जोरदार बारिश से बारिश की कमी कम हुई है और खरीफ फसलों की बुवाई में भी सुधार देखने को मिला है। राजधानी दिल्ली में तो अगस्त के पहले आठ दिनों में ही महीने की औसत बारिश का आंकड़ा पार हो गया।

हालांकि, अच्छी बारिश के बावजूद मौसम विशेषज्ञों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एल-नीनो के उभरते प्रभाव और कुछ क्षेत्रों में अब भी बनी बारिश की कमी के कारण आने वाले महीनों में सूखे जैसी स्थिति का जोखिम बना हुआ है।

दिल्ली में अगस्त के पहले हफ्ते में रिकॉर्ड बारिश

अगस्त की शुरुआत में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, महीने के शुरुआती आठ दिनों में ही दिल्ली में अगस्त की सामान्य मासिक बारिश का आंकड़ा पार हो गया।

2011 के बाद यह अगस्त का सबसे अधिक बारिश वाला पहला सप्ताह बताया गया है।

भारी बारिश ने जहां मानसून की कमी को कम करने में मदद की, वहीं कई इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और सड़कों के बंद होने जैसी समस्याएं भी सामने आईं। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश को देखते हुए रेड अलर्ट तक जारी किया गया था।

देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों में भी तेज बारिश हुई, जिसका असर कुल मानसूनी आंकड़ों और कृषि गतिविधियों पर देखने को मिला।

बारिश से खरीफ बुवाई में हुआ सुधार

मानसून की बारिश बढ़ने का सीधा फायदा खरीफ फसलों की बुवाई को मिला है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 7 अगस्त तक खरीफ बुवाई में कमी घटकर 17.96 लाख हेक्टेयर रह गई। 24 जुलाई को यह अंतर करीब 38.82 लाख हेक्टेयर था।

दलहन की स्थिति में भी सुधार हुआ है। इसकी बुवाई में कमी 24 जुलाई के करीब 6.90 लाख हेक्टेयर से घटकर 7 अगस्त तक लगभग 1.95 लाख हेक्टेयर रह गई।

हालांकि सभी फसलों के लिए तस्वीर समान नहीं है।

धान और तिलहन की बुवाई अभी भी पीछे

अच्छी बारिश के बावजूद धान और तिलहन की बुवाई में अभी भी कमी बनी हुई है।

7 अगस्त तक धान की बुवाई पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 15.90 लाख हेक्टेयर पीछे थी। वहीं तिलहन की बुवाई में कमी बढ़कर करीब 5.19 लाख हेक्टेयर हो गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में पर्याप्त बारिश होती है तो इन फसलों की स्थिति में भी सुधार संभव है।

बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ाएगा बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव वाले मौसम तंत्र के कारण मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां आगे भी बढ़ सकती हैं।

अगर इन क्षेत्रों में लगातार अच्छी बारिश होती है तो मानसून की मौजूदा कमी और कम हो सकती है। इसका फायदा कृषि क्षेत्र को भी मिलने की उम्मीद है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अब भी बारिश की कमी

देश के कई हिस्सों में बारिश की स्थिति सुधरने के बावजूद पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत चिंता का विषय बने हुए हैं।

इन क्षेत्रों में बारिश सामान्य से करीब 25.5 प्रतिशत कम बताई गई है। यह देश के प्रमुख क्षेत्रों में सबसे बड़ी बारिश की कमी है। दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

इस कमी का असर विशेष रूप से धान की खेती पर पड़ सकता है, क्योंकि फसल के शुरुआती विकास चरण में पर्याप्त पानी की जरूरत होती है।

एल-नीनो ने क्यों बढ़ाई चिंता?

मानसून में फिलहाल सुधार के बावजूद लंबे समय के जलवायु अनुमानों ने चिंता बढ़ाई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुमानों के मुताबिक अगस्त से अक्टूबर के दौरान एल-नीनो की स्थिति भारत सहित दक्षिण एशिया के मौसम को प्रभावित कर सकती है।

एल-नीनो की स्थिति बनने पर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और सूखे का जोखिम बढ़ सकता है। इसके साथ तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की आशंका रहती है, जिसका असर कृषि और जल संसाधनों पर पड़ सकता है।

हालांकि किसी एक मौसम घटना के आधार पर पूरे मानसून या पूरे देश में सूखे की स्थिति की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। क्षेत्रीय परिस्थितियां और आगे होने वाली बारिश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

पॉजिटिव IOD भी बन रहा है

मौसम की तस्वीर को प्रभावित करने वाला एक और महत्वपूर्ण कारक इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) है। रिपोर्ट के अनुसार, पॉजिटिव IOD की स्थिति भी विकसित हो रही है।

इस स्थिति में हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से का पानी पूर्वी हिस्से की तुलना में अधिक गर्म होता है। एल-नीनो और IOD की संयुक्त स्थिति दक्षिण एशिया के मौसम को जटिल बना सकती है और कुछ क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।

एंटोनियो गुटेरेस ने भी जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एल-नीनो के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एल-नीनो का असर पहले से गर्म हो रही धरती पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।

उनके मुताबिक दुनिया पहले ही भीषण गर्मी, जंगलों की आग और समुद्र के बढ़ते तापमान जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में एल-नीनो की स्थिति वैश्विक मौसम और तापमान पर अतिरिक्त असर डाल सकती है।

अभी राहत, लेकिन आगे नजर जरूरी

फिलहाल अगस्त की अच्छी बारिश ने भारत के मानसून और खरीफ खेती को कुछ राहत दी है। बारिश की कमी कम होने और बुवाई में सुधार से कृषि क्षेत्र के लिए उम्मीद बढ़ी है।

लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी, धान की पिछड़ी बुवाई और एल-नीनो का संभावित प्रभाव आने वाले महीनों में चिंता का कारण बने रह सकते हैं। ऐसे में अगले कुछ सप्ताह की बारिश और मौसम प्रणालियों की गतिविधि भारत के मानसून की आगे की दिशा तय करने में अहम होगी।

जरुर पढ़ें

InkLink News Agency is a fast-growing digital news agency and aggregator delivering accurate, timely, and reliable updates across India. We provide dedicated coverage for India, Chhattisgarh, and Madhya Pradesh, along with in-depth reporting across key categories including Business, Technology, Politics, Crime, Literature, and more.

Stay informed. Stay connected. Stay ahead with InkLink News Agency.