छत्तीसगढ़ की पंडरिया विधानसभा सीट से BJP विधायक भावना बोहरा इन दिनों 151 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा का नेतृत्व कर रही हैं। यह यात्रा मध्य प्रदेश के अमरकंटक से शुरू होकर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर तक जाएगी।
इस धार्मिक पदयात्रा में करीब 700 श्रद्धालु शामिल हैं। इनमें 16 बैगा आदिवासी भी हैं, जिनके बारे में विधायक ने बताया कि उन्होंने पहले दूसरे धर्म को अपनाया था और बाद में उनकी ‘घर वापसी’ हुई।
अमरकंटक से भोरमदेव तक पैदल यात्रा
कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अमरकंटक से नर्मदा नदी का जल लेकर पैदल भोरमदेव मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। करीब 151 किलोमीटर का यह रास्ता कई जगहों पर जंगल, ऊबड़-खाबड़ मार्ग और पानी वाले हिस्सों से होकर गुजरता है।
विधायक भावना बोहरा के मुताबिक, यात्रा के पहले दिन कांवड़ियों ने लगभग 20 से 23 किलोमीटर की दूरी तय की। कठिन रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि यात्रा को लेकर सभी कांवड़ियों का संकल्प मजबूत है और उन्हें भरोसा है कि भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से यात्रा पूरी होगी।
यात्रा में 16 बैगा आदिवासी भी शामिल
भावना बोहरा कांवड़ यात्रा में शामिल 16 बैगा आदिवासी भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। विधायक के अनुसार, ये वे लोग हैं जिनकी ‘घर वापसी’ हुई है।
ये श्रद्धालु नर्मदा नदी का जल अपनी कांवड़ में लेकर भोरमदेव मंदिर में भगवान शिव को अर्पित करेंगे।
हालांकि ‘घर वापसी’ और धर्म परिवर्तन से जुड़े दावे विधायक की ओर से बताए गए हैं; इस संबंध में अलग से स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
महिलाओं और छात्राओं की भी बड़ी भागीदारी
इस कांवड़ यात्रा में महिलाओं और युवा छात्राओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी है। विधायक के अनुसार, स्कूल-कॉलेज की छात्राओं के साथ कई गृहिणियां भी यात्रा में शामिल हुई हैं।
कठिन रास्तों के बावजूद महिलाएं कांवड़ लेकर पदयात्रा कर रही हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है और रास्ते में ‘बोल बम’ के जयकारे लगाए जा रहे हैं।
लगातार दूसरे साल निकाली जा रही यात्रा
अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक यह कांवड़ यात्रा लगातार दूसरे वर्ष आयोजित की जा रही है। यात्रा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को नर्मदा जल के साथ भोरमदेव मंदिर तक पहुंचाना है।
रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत की भी व्यवस्था की जा रही है। जंगल और दुर्गम रास्तों से गुजर रही इस 151 किलोमीटर की यात्रा में अलग-अलग वर्गों के लोगों की भागीदारी देखने को मिल रही है।
- 151 किमी: अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक की दूरी।
- 700 श्रद्धालु: यात्रा में करीब 700 कांवड़िए शामिल।
- 16 बैगा आदिवासी: विधायक के अनुसार, ‘घर वापसी’ के बाद यात्रा में शामिल हुए।
- महिलाओं की भागीदारी: गृहिणियों और छात्राओं की बड़ी संख्या मौजूद।
- दूसरा साल: लगातार दूसरे वर्ष इस कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।