भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट मुकाबले के पहले दिन मौसम, पिच और तेज गेंदबाजों ने बल्लेबाजों की जमकर परीक्षा ली। ऐसे मुश्किल हालात में देवदत्त पडिक्कल ने धैर्य और एकाग्रता का शानदार परिचय देते हुए महत्वपूर्ण शतक लगाया। उन्होंने दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद 192 गेंदें खेलीं और अपनी पारी से भारतीय टीम को मजबूती दी।
श्रीलंका ने टॉस जीतने के बाद गेंदबाजी में अच्छी शुरुआत की और लंच तक भारत के दो विकेट हासिल कर लिए थे। हालांकि, इसके बाद पडिक्कल और शुभमन गिल ने मिलकर पारी को संभाला।
श्रीलंकाई गेंदबाजों ने शुरुआत में बनाया दबाव
लाहिरू कुमारा और असिथा फर्नांडो ने शुरुआती दौर में गेंद को अच्छी लेंथ पर रखते हुए भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया। शुरुआत में दोनों गेंदबाज स्विंग हासिल करने के लिए फुल लेंथ पर गेंदबाजी कर रहे थे, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी रणनीति बदली और 6 से 10 मीटर की लेंथ पर गेंदबाजी शुरू की।
इस रणनीति का फायदा श्रीलंका को मिला। टीम ने अच्छी लेंथ पर 40 गेंदें डालीं और भारत के दो विकेट सिर्फ दो रन के अंतराल में हासिल किए।
हालांकि, कोलंबो की पिच पर तेज गेंदबाजों के लिए लगातार मेहनत करना आसान नहीं था। गर्म और उमस भरे मौसम ने खिलाड़ियों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

पडिक्कल को शुरुआत में मिला जीवनदान
देवदत्त पडिक्कल शुरुआत में काफी दबाव में नजर आए। वह अपना खाता खोले बिना ही एक शॉट पर मुश्किल में पड़ गए थे। इसके बाद एक रन के स्कोर पर उन्हें स्लिप में भी जीवनदान मिला।
इसके बावजूद उन्होंने अपनी एकाग्रता नहीं खोई और धीरे-धीरे पारी को आगे बढ़ाया। लंच के बाद शुभमन गिल के साथ उनकी साझेदारी ने भारत को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
फर्नांडो और पडिक्कल के बीच दिखी छोटी सी जंग
दोपहर के सत्र में असिथा फर्नांडो ने पडिक्कल को लगातार शॉर्ट गेंदों से परेशान करने की कोशिश की। एक ओवर में उन्होंने लगातार बाउंसर डाले और पडिक्कल ने ज्यादातर गेंदों को नीचे झुककर छोड़ दिया।
अगले ओवर में भी फर्नांडो ने शॉर्ट गेंदों का सिलसिला जारी रखा। पडिक्कल ने पांच गेंदों को छोड़ दिया, जबकि एक पर अपर कट लगाने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
पूरे दिन पडिक्कल ने 18 बाउंसर का सामना किया और उनसे सिर्फ 9 रन लिए। इससे उनकी बल्लेबाजी में दिखा संयम साफ नजर आया।
गिल के साथ 120 रन की अहम साझेदारी
पडिक्कल और शुभमन गिल ने मिलकर भारत की पारी को संभाला। दोनों ने श्रीलंकाई स्पिनरों के खिलाफ तेजी से रन बनाए, जिससे कप्तान धनंजय डी सिल्वा को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
श्रीलंका ने रन रोकने के लिए कुछ समय तक बेहद रक्षात्मक लाइन अपनाई। बल्लेबाजों ने भी धैर्य बनाए रखा और खराब गेंदों का इंतजार किया।
दोनों के बीच हुई 120 रन की साझेदारी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही। हालांकि, सत्र के अंत में फर्नांडो को दोबारा गेंदबाजी पर लाया गया और उन्होंने शुभमन गिल का विकेट हासिल कर साझेदारी तोड़ दी।
गर्मी से परेशान दिखे पडिक्कल
कोलंबो की गर्मी ने खिलाड़ियों की परीक्षा ली। मैच के दौरान कई बार खिलाड़ियों को पानी और ठंडे तौलिये की जरूरत पड़ी।
आखिरी सत्र में पडिक्कल भी काफी थके हुए दिखाई दिए। सपोर्ट स्टाफ ने उन्हें ठंडा तौलिया दिया और लगातार तरल पदार्थ उपलब्ध कराए।
इसके बावजूद उन्होंने अपना धैर्य बनाए रखा और ब्रेक के बाद शानदार अंदाज में अपना दूसरा टेस्ट शतक पूरा किया। शतक के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों की ओर से भी उन्हें बधाई दी गई।
193वीं गेंद पर खत्म हुई पडिक्कल की पारी
पडिक्कल ने मुश्किल परिस्थितियों में कुल 192 गेंदों तक बल्लेबाजी की। वह लगातार भारत की पारी को आगे बढ़ाते रहे और श्रीलंका के गेंदबाजों को चुनौती देते रहे।
हालांकि, 193वीं गेंद पर गेंद उम्मीद से ज्यादा तेजी और टर्न के साथ आई और उनके स्टंप उखाड़ दिए। इस तरह एक लंबी और संयमपूर्ण पारी का अंत हुआ।
नंबर-3 की समस्या पर मिला बड़ा जवाब
पडिक्कल की इस पारी ने भारतीय टीम के नंबर-3 बल्लेबाज को लेकर चर्चा को एक नई दिशा दी है। टीम प्रबंधन की ओर से अभी यह नहीं कहा गया है कि इस स्थान के लिए अंतिम फैसला हो चुका है। साई सुदर्शन भी चोट के कारण इस दौरे का हिस्सा नहीं बन सके हैं और विकल्प के तौर पर उनकी दावेदारी बनी हुई है।
लेकिन श्रीलंका के खिलाफ पडिक्कल की पारी से शुभमन गिल और भारतीय टीम को एक अहम भरोसा जरूर मिला है—मुश्किल परिस्थितियों में नंबर-3 पर ऐसा बल्लेबाज मौजूद है, जो लंबे समय तक क्रीज पर टिककर पारी को संभाल सकता है।