Bastar Farmer Protest: बाढ़ से फसल बर्बादी पर गर्माया मुद्दा, किसानों की कर्जमाफी की मांग

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Bastar Farmer Protest: छत्तीसगढ़ के बस्तर में बाढ़ से हुई फसल बर्बादी और मकानों को पहुंचे नुकसान का मुद्दा अब आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और कृषि कर्ज माफ करने की मांग को लेकर जगदलपुर में लगातार तीन दिनों तक प्रदर्शन हुए। चार नवंबर को जिला कांग्रेस कमेटी ने नेशनल हाईवे-30 पर चक्काजाम किया, पांच नवंबर को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला और छह नवंबर को भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बाढ़ के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। कई परिवारों के मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके बावजूद प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल पाई है। किसानों ने नुकसान का सही आकलन कर उचित मुआवजा देने, 65,100 रुपये प्रति एकड़ की सहायता और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सहित कृषि कर्ज माफ करने की मांग उठाई है।

बाढ़ से फसल बर्बाद, किसानों पर कर्ज का बोझ

Bastar Farmer Protest: बाढ़ से फसल बर्बादी पर गर्माया मुद्दा, किसानों की कर्जमाफी की मांग

बस्तर में बाढ़ के बाद ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी पर बड़ा असर पड़ा है। खेतों में पानी भरने और फसलें खराब होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। जिन परिवारों के मकान बाढ़ की चपेट में आए, उनके सामने रहने और दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने की चुनौती भी है।

किसानों की परेशानी इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि फसल खराब होने के बावजूद उन पर बैंक और सहकारी समितियों से लिया गया पुराना कर्ज चुकाने का दबाव बना हुआ है। किसानों का कहना है कि जब इस सीजन की फसल ही नहीं बची, तो वे कर्ज की किस्तें और खेती से जुड़े खर्च कैसे पूरा करेंगे।

इसी मुद्दे को लेकर Bastar Farmer Protest लगातार तेज हो रहा है। प्रभावित किसान चाहते हैं कि सरकार केवल सामान्य सहायता देने तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक नुकसान का आकलन कर उसके अनुरूप राहत उपलब्ध कराए।

चार नवंबर को कांग्रेस ने NH-30 पर किया चक्काजाम

बाढ़ पीड़ितों की मांगों को लेकर चार नवंबर को बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी ने जगदलपुर में प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे-30 पर चक्काजाम कर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। आमागुड़ा चौक पर प्रदर्शन के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित किसानों और परिवारों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC का कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की ओर से दी जा रही सहायता राशि को नुकसान की तुलना में नाकाफी बताया।

कांग्रेस का कहना था कि बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। साथ ही फसल और मकानों को हुए नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर मुआवजा दिया जाना चाहिए।

पांच नवंबर को जनता कांग्रेस ने निकाला मार्च

चार नवंबर के प्रदर्शन के अगले दिन पांच नवंबर को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भी बाढ़ पीड़ितों के समर्थन में आंदोलन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने जगदलपुर की चौपाटी से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला।

इस दौरान बस्तर के लिए एक हजार करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज घोषित करने की मांग की गई। संगठन ने भाजपा विधायक कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपा। साथ ही सरकार को मांगों पर कार्रवाई करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया।

जनता कांग्रेस का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित किसानों और परिवारों को बड़े स्तर पर आर्थिक सहायता की जरूरत है। केवल सीमित राहत से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए विशेष पैकेज के साथ फसल नुकसान, मकानों की क्षति और किसानों के कर्ज से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय लेना जरूरी है।

छह नवंबर को ट्रैक्टर रैली के साथ किसानों ने घेरा कलेक्ट्रेट

लगातार दो दिनों तक राजनीतिक संगठनों के प्रदर्शन के बाद छह नवंबर को किसान खुद बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेतृत्व में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली और जगदलपुर कलेक्ट्रेट का घेराव किया।

इस प्रदर्शन में किसानों ने प्रति एकड़ 65,100 रुपये मुआवजा देने की मांग प्रमुखता से उठाई। उनका कहना है कि बाढ़ से फसल को हुए नुकसान की भरपाई वास्तविक स्थिति और उचित मूल्य के आधार पर होनी चाहिए। किसानों ने सभी सहकारी बैंकों के कृषि कर्ज माफ करने की मांग भी रखी।

किसानों का तर्क है कि फसल बर्बाद होने के बाद उनकी आमदनी प्रभावित हुई है, जबकि खेती के लिए लिया गया कर्ज अभी भी उनके ऊपर है। ऐसे में मुआवजे के साथ कर्जमाफी का फैसला भी जरूरी है। ट्रैक्टर रैली के जरिए किसानों ने प्रशासन और सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने की कोशिश की।

तीन दिनों में लगातार प्रदर्शन, सरकार पर बढ़ा दबाव

बस्तर में चार से छह नवंबर के बीच हुए तीन अलग-अलग प्रदर्शनों से साफ है कि बाढ़ से हुए नुकसान का मुद्दा अब राजनीतिक और किसान संगठनों के आंदोलन का केंद्र बन गया है। कांग्रेस ने चक्काजाम कर विरोध जताया, जनता कांग्रेस ने विशेष राहत पैकेज की मांग रखी और किसानों ने ट्रैक्टर रैली के जरिए मुआवजे तथा कर्जमाफी की आवाज उठाई।

इन सभी प्रदर्शनों में कुछ मांगें समान रहीं। इनमें फसल नुकसान का सही सर्वे, प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा और कृषि कर्ज से राहत शामिल हैं। किसान संगठनों का कहना है कि नुकसान का आकलन वास्तविक स्थिति के आधार पर होना चाहिए, ताकि कोई भी प्रभावित किसान सहायता से वंचित न रह जाए।

प्रशासन के सामने राहत और मुआवजे की चुनौती

बाढ़ की घटना को एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रभावित परिवारों की समस्याएं सामने आ रही हैं। किसानों के सामने अगली खेती की तैयारी, पुराने कर्ज और परिवार की जरूरतें पूरी करने की चुनौती है। ऐसे में मुआवजे में देरी और राहत को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

अब निगाहें राज्य सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। किसानों को 65,100 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिलेगा या नहीं, KCC और सहकारी बैंकों के कृषि कर्ज पर क्या फैसला होगा और जनता कांग्रेस की एक हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग पर सरकार क्या रुख अपनाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Bastar Farmer Protest के जरिए किसान और राजनीतिक संगठन अपनी मांगें लगातार उठा रहे हैं। यदि प्रभावित किसानों को जल्द राहत नहीं मिलती है, तो बस्तर में यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक हो सकता है।

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