Bijapur Anti Naxal Operation: एंटी-नक्सल ऑपरेशन कोबरा और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में हथियारों का जखीरा जब्त

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Bijapur Anti Naxal Operation: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। जिला पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 196वीं वाहिनी और 204 कोबरा बटालियन के संयुक्त अभियान में माओवादियों के कथित डंप से 711 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) शेल बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई उसूर थाना क्षेत्र के ताड़ापाला और केजी हिल्स के आसपास के जंगलों में की गई। बरामदगी को माओवादियों की हथियार और विस्फोटक आपूर्ति व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया था। तलाशी के दौरान जंगल में छिपाकर रखे गए बीजीएल शेल का बड़ा जखीरा मिला। बरामद सामग्री को सुरक्षा मानकों के अनुसार कब्जे में लिया गया है। वहीं, कर्रेगुट्टा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में संभावित विस्फोटकों के खतरे को देखते हुए आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

ताड़ापाला और केजी हिल्स के जंगलों में चला संयुक्त अभियान

Bijapur Anti Naxal Operation: एंटी-नक्सल ऑपरेशन कोबरा और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में हथियारों का जखीरा जब्त

Bijapur Anti Naxal Operation के तहत जिला पुलिस, CRPF की 196वीं बटालियन और 204 कोबरा बटालियन की टीमों ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उसूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत अग्रिम पिकेट (FOB) ताड़ापाला और केजी हिल्स के समीप घने जंगलों में की गई।

बताया गया है कि सुरक्षा बलों को माओवादियों द्वारा हथियार और विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखे जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद संयुक्त टीम ने निर्धारित इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान जवानों को जंगल में छिपाकर रखे गए डंप का पता चला, जहां से कुल 711 बीजीएल शेल बरामद किए गए।

सुरक्षा बलों ने सभी शेल को निर्धारित सुरक्षा और विस्फोटक हैंडलिंग प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपने कब्जे में लिया। इस कार्रवाई में किसी जवान के हताहत होने की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

क्या होते हैं BGL शेल?

बीजीएल यानी बैरल ग्रेनेड लॉन्चर शेल, ग्रेनेड लॉन्चर से दागे जाने वाले गोला-बारूद का एक प्रकार है। इनका इस्तेमाल विस्फोटक हमलों में किया जा सकता है। ऐसे शेल सुरक्षा बलों और आसपास मौजूद लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

जंगलों में इस तरह के गोला-बारूद को छिपाकर रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है। 711 शेल की बरामदगी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किसी बड़े हमले की तैयारी में किया जा सकता था। हालांकि, बरामद शेल किस विशेष उद्देश्य से रखे गए थे, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

माओवादियों की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को झटका

सुरक्षा एजेंसियों के लिए हथियारों और विस्फोटक सामग्री के डंप का पता लगाना नक्सल विरोधी अभियान का अहम हिस्सा है। माओवादी संगठन जंगलों और दुर्गम इलाकों में हथियार, गोला-बारूद और अन्य जरूरी सामग्री छिपाकर रखते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके।

बीजापुर में 711 बीजीएल शेल की बरामदगी से माओवादियों की हथियार आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है। सुरक्षा बलों के बीच समन्वय और खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई को इस लिहाज से अहम माना जा रहा है।

बस्तर संभाग के बीजापुर सहित कई इलाके लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की लगातार तलाशी और कार्रवाई का उद्देश्य माओवादी नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों और संभावित हमलों की तैयारियों को कमजोर करना है।

कर्रेगुट्टा क्षेत्र में नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी

हथियारों और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय ग्रामीणों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस की अपील के मुताबिक, लोगों को फिलहाल कर्रेगुट्टा और आसपास की पहाड़ियों तथा जंगलों में जाने से बचना चाहिए।

आशंका है कि इन इलाकों में कुछ स्थानों पर माओवादियों द्वारा पहले से छिपाए गए आईईडी, बारूदी सुरंग या अन्य विस्फोटक सामग्री मौजूद हो सकती है। ऐसे में जंगलों या सुनसान रास्तों पर किसी संदिग्ध वस्तु को देखना भी जानलेवा साबित हो सकता है।

प्रशासन की ओर से इन इलाकों में विशेष डी-माइनिंग अभियान चलाने की तैयारी की गई है। इस प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षित टीमें संभावित बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करेंगी। क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने तक नागरिकों को सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

संदिग्ध वस्तु दिखे तो खुद छूने की गलती न करें

सुरक्षा एजेंसियों की एडवाइजरी के मद्देनजर ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जंगल, पहाड़ी रास्ते या खेतों के आसपास कोई संदिग्ध डिब्बा, तार, धातु की वस्तु या अन्य अनजान सामग्री दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे छूने से बचना चाहिए। इसकी सूचना तुरंत पुलिस या सुरक्षा बलों को देनी चाहिए।

बीजापुर में चलाया गया यह संयुक्त अभियान नक्सल विरोधी कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 711 बीजीएल शेल की बरामदगी से सुरक्षा बलों ने माओवादियों के एक बड़े डंप का पता लगाया है। अब इलाके में संभावित अन्य विस्फोटकों की तलाश और डी-माइनिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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