रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के कथित पलटवार के बाद भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने एक-दूसरे पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। भाजपा ने इसे वैचारिक माओवाद के खिलाफ चेतावनी बताया है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि युवाओं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वालों को बदनाम किया जा रहा है।
BJP ने बताया वैचारिक माओवाद के खिलाफ लड़ाई
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने जंगलों में हथियारों के जरिए चल रहे माओवाद को लगभग समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति की है। अब अराजकता और माओवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले कथित वैचारिक तंत्र पर भी ध्यान दिया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि देश की एकता और मजबूती बनाए रखने के लिए ‘दिमागी नक्सली’ प्रवृत्ति से सावधान रहने की जरूरत है।
वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर प्रधानमंत्री के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि माओवाद के कमजोर होने के साथ उसके समर्थकों की बेचैनी भी सामने आ रही है।
कांग्रेस ने युवाओं को बदनाम करने का लगाया आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के युवाओं के सामने परीक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े गंभीर सवाल हैं। उनके मुताबिक, जब युवा इन मुद्दों को लेकर आवाज उठाते हैं तो उन्हें माओवादी बताने की कोशिश की जाती है।
कांग्रेस का कहना है कि युवाओं की समस्याओं और उनके विरोध को किसी विचारधारा से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
भूपेश बघेल ने ‘दिमागी नक्सलवाद’ की अवधारणा पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी ‘दिमागी नक्सलवाद’ शब्द को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में पहले माओवाद के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष हुआ और इस लड़ाई में कांग्रेस नेताओं सहित कई लोगों की जान गई।
बघेल ने कहा कि पहले ‘अर्बन नक्सल’ शब्द चर्चा में आया और अब ‘दिमागी नक्सलवाद’ की बात की जा रही है। उन्होंने इस अवधारणा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि देशभर के लोग इस पर स्पष्टीकरण चाहते हैं।
बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव
प्रधानमंत्री के बयान के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा इसे वैचारिक माओवादी नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे युवाओं और लोकतांत्रिक विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश बता रही है।