Chhattisgarh Formation: छत्तीसगढ़ का आज स्थापना दिवस है। मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था। केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने अपने वादे को निभाते हुए छत्तीसगढ़ का गठन किया था। पूरे प्रदेश में अटल बिहारी वाजपेयी को छत्तीसगढ़ का निर्माता भी कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में बीजेपी का सबसे बड़ा नारा ही है ‘हमने बनाया हैं हम ही संवारेंगे।’ आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के गठन की रोचक कहानी।

छत्तीसगढ़ के गठन की कहानी सिर्फ एक नए राज्य के अस्तित्व में आने की कहानी नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय पहचान और अलग राज्य की मांग से भी जुड़ी है। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ भारत के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। इस राज्य के गठन में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका को आज भी याद किया जाता है। इसकी वजह है रायपुर की वह चुनावी रैली, जहां उन्होंने एक खास वादा किया था—आप मुझे 11 सांसद दीजिए, मैं आपको छत्तीसगढ़ दूंगा।
अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने इस वादे को प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरा किया। संसद में राज्य गठन से जुड़ी विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी और आखिरकार छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा मिला। यही कारण है कि अटल बिहारी वाजपेयी को छत्तीसगढ़ के निर्माण से जुड़ी प्रमुख शख्सियतों में गिना जाता है। आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के गठन की पूरी कहानी और इससे जुड़े महत्वपूर्ण पड़ाव।
अटल बिहारी वाजपेयी ने रायपुर में किया था 11 सांसदों का वादा

छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने की मांग नई नहीं थी। लंबे समय से इस क्षेत्र के लोग अलग प्रशासनिक पहचान और विकास की जरूरत को लेकर आवाज उठाते रहे थे। इसी मांग के बीच 1998-99 के लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव प्रचार के लिए रायपुर पहुंचे थे।
रायपुर में आयोजित जनसभा में उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता से कहा था, “आप मुझे 11 सांसद दो, मैं छत्तीसगढ़ दूंगा।” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा पैदा कर दी। यह वादा उस समय छत्तीसगढ़ राज्य की मांग कर रहे लोगों के लिए उम्मीद का संदेश बन गया।
उस दौर में मध्य प्रदेश का यह हिस्सा अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान, भौगोलिक परिस्थितियों और विकास से जुड़ी चुनौतियों के कारण अलग राज्य की मांग कर रहा था। वाजपेयी की घोषणा के बाद राज्य गठन का मुद्दा चुनावी राजनीति में और प्रमुखता से सामने आया।
NDA सरकार बनने के बाद आगे बढ़ी राज्य गठन की प्रक्रिया
लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने की मांग पर केंद्र सरकार के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ी।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण से संबंधित विधेयक संसद में पेश किया गया। लोकसभा ने 31 जुलाई 2000 को और राज्यसभा ने 9 अगस्त 2000 को मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी दी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हुई।
मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत छत्तीसगढ़ के गठन का रास्ता साफ हुआ। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, 1 नवंबर 2000 को नया राज्य अस्तित्व में आया। इस तरह छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य बना।
1 नवंबर 2000 को बना छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य
इन लोकसभा चुनावों में NDA की जीत हुई थी। अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने थे। सरकार बनने के करीब एक साल बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना वादा पूरा किया था। 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में और 9 अगस्त को राज्य सभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर मुहर लगी थी। इसके बाद 4 सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया था। छत्तीसगढ़ उस समय देश का 26वां नया राज्य बना था।
छत्तीसगढ़ का गठन मध्य प्रदेश के पुनर्गठन के तहत हुआ था। रायपुर को नए राज्य की राजधानी बनाया गया। राज्य बनने के साथ ही यहां अलग प्रशासनिक व्यवस्था, विधानसभा और शासन की संस्थाओं के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई।
राज्य गठन को छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। अलग राज्य बनने के बाद स्थानीय जरूरतों, संसाधनों और विकास से जुड़े मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से नीतियां बनाने का अवसर मिला। राज्य की अपनी सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को भी नई प्रशासनिक पहचान मिली।
आज हर साल 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रदेशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, सरकारी आयोजन और विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी को क्यों कहा जाता है छत्तीसगढ़ का निर्माता?
अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में ही 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ। छत्तीसगढ़ पहले मध्य प्रदेश का हिस्सा था। मध्य प्रदेश से अलग होकर इस राज्य का गठन हुआ था। आज भी छत्तीसगढ़ में अटल बिहारी वाजपेयी को राज्य का निर्माता भी कहा जाता है। हालांकि छत्तीसगढ़ की मांग राज्य में बहुत पहले से हो रही थी। लेकिन केंद्र में NDA की सरकार आने के बाद इस मांग पर विचार किया गया और नए राज्य का गठन किया गया।
छत्तीसगढ़ राज्य की मांग अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले से उठ रही थी। अलग राज्य के आंदोलन और मांग में कई सामाजिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका रही। इसलिए छत्तीसगढ़ का गठन किसी एक व्यक्ति या एक घटना का परिणाम नहीं था।
हालांकि, वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्य गठन की विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और उनके कार्यकाल में ही 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। इसी ऐतिहासिक भूमिका के कारण उन्हें प्रदेश में छत्तीसगढ़ के निर्माता के रूप में सम्मान दिया जाता है।
भारतीय जनता पार्टी भी राज्य गठन को अपनी राजनीतिक विरासत का अहम हिस्सा मानती है। पार्टी का नारा ‘हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे’ इसी संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, राज्य गठन की व्यापक पृष्ठभूमि में लंबे समय से चल रही क्षेत्रीय मांग और विभिन्न राजनीतिक प्रयासों को भी याद किया जाता है।
अजीत जोगी बने छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ के गठन के बाद राज्य में पहली बारी कांग्रेस की सरकार बनी थी। हालांकि तब चुनाव नहीं हुए थे। राज्य के पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस के सीनियर लीडर अजीत जोगी बने थे। राज्य के गठन के बाद पहला चुनाव 2003 में हुआ था। उस समय बीजेपी की सत्ता आई थी। उसके बाद रमन सिंह 2018 तक राज्य के सीएम रहे। 2018 में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी और फिर 2023 के चुनाव में बीजेपी ने फिर से वापसी की।
1 नवंबर 2000 को राज्य गठन के बाद कांग्रेस नेता अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। उस समय नए राज्य में विधानसभा चुनाव नहीं हुए थे। शुरुआती सरकार का गठन तत्कालीन राजनीतिक और विधानसभा की व्यवस्था के आधार पर किया गया था।
छत्तीसगढ़ में पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 2003 में हुआ। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री बने। इसके बाद भाजपा ने लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की और डॉ. रमन सिंह 2003 से 2018 तक मुख्यमंत्री रहे।
वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फिर सत्ता में वापसी की और विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री बने।
छत्तीसगढ़ के इतिहास में 1 नवंबर का खास महत्व
छत्तीसगढ़ का स्थापना दिवस प्रदेश की पहचान, इतिहास और विकास यात्रा को याद करने का अवसर है। 1 नवंबर 2000 को अलग राज्य बनने के बाद प्रदेश ने प्रशासन, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी अलग यात्रा शुरू की।
अटल बिहारी वाजपेयी का 11 सांसदों वाला बयान आज भी छत्तीसगढ़ के गठन से जुड़ी चर्चाओं में याद किया जाता है। रायपुर की उस जनसभा में किया गया वादा और उसके बाद संसद से पूरी हुई प्रक्रिया इस राज्य के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
छत्तीसगढ़ की स्थापना के पीछे लंबे समय का जनआंदोलन, क्षेत्रीय आकांक्षाएं और राजनीतिक फैसले जुड़े रहे। यही वजह है कि राज्य स्थापना दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि प्रदेश की अलग पहचान और उसके गठन के संघर्ष को याद करने का दिन भी है।