Cyclone Murasu Impact in Chhattisgarh: एक बार फिर चक्रवाती तूफान मुरासु ने बढ़ा दी किसानों की चिंता

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Cyclone Murasu Impact in Chhattisgarh: चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का कहर अभी लोग भूल भी नहीं पाए थे कि एक और चक्रवाती तूफान दस्तक देने की तैयारी में है। दरअसल बंगाल की खाड़ी में एक और खतरनाक तूफान ‘मुरासु’ मंडराने लगा है। मौसम विभाग की मानें तो बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव अब चक्रवाती तूफान में बदल चुका है और अगले कुछ घंटों के भीतर ये आंध्रप्रदेश के तटीय क्षेत्र में करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराएगी। ‘मुरासु’ को लेकर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में हाई अलर्ट कर दिया गया है। वहीं, इसका असर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी देखने को मिल सकता है।

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने छत्तीसगढ़ के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस तूफान का असर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में देखने को मिल सकता है। 3 नवंबर को बस्तर संभाग के पांच जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, प्रदेश के 10 से अधिक अन्य जिलों में भी बारिश और तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट बताया गया है।

धान की कटाई और फसल को सुरक्षित रखने की तैयारी के बीच बारिश की चेतावनी किसानों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। इससे पहले भी बारिश के कारण खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में नए चक्रवाती तूफान की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवाती तूफान में बदला मुरासु

Cyclone Murasu Impact in Chhattisgarh: एक बार फिर चक्रवाती तूफान मुरासु ने बढ़ा दी किसानों की चिंता

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, पश्चिम-मध्य और उससे सटी दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, 2 नवंबर 2026 को सुबह 2:30 बजे यह लगभग 13.6 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास स्थित था।

उस समय तूफान चेन्नई से करीब 260 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व, नेल्लोर से 290 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और विशाखापत्तनम से लगभग 470 किलोमीटर दक्षिण में बताया गया था। विभाग ने इसके और तीव्र होकर गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप लेने की जानकारी दी थी।

मौसम विभाग के अनुसार, तूफान की दिशा और गति को देखते हुए दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में इसके पहुंचने की आशंका जताई गई। इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में भी सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई।

110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है हवा की रफ्तार

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, मुरासु के 2 नवंबर की देर रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की संभावना जताई गई थी। इसके लिए नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के आसपास के तटीय क्षेत्र का उल्लेख किया गया।

विभाग के अनुमान के मुताबिक, तट से टकराते समय हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। तेज झोंकों के दौरान इसकी गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी।

चक्रवाती तूफान के तटीय इलाकों से गुजरने के दौरान भारी बारिश और तेज हवाओं का असर आसपास के क्षेत्रों में भी हो सकता है। इसी वजह से इसके संभावित प्रभाव वाले राज्यों में मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

छत्तीसगढ़ के इन 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

Cyclone Murasu Impact in Chhattisgarh को लेकर सबसे ज्यादा चिंता बस्तर संभाग के जिलों में है। उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 3 नवंबर को प्रदेश के पांच जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इनमें शामिल हैं:

  • सुकमा: भारी बारिश की आशंका।
  • बीजापुर: तेज बारिश को लेकर चेतावनी।
  • दंतेवाड़ा: मौसम खराब रहने की संभावना।
  • बस्तर: भारी बारिश का अनुमान।
  • नारायणपुर: बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट।

इन जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में येलो अलर्ट जारी होने की जानकारी दी गई है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, जिलेवार चेतावनी और बारिश की तीव्रता के लिए मौसम विभाग का नवीनतम बुलेटिन देखना जरूरी है।

धान किसानों की बढ़ी चिंता, कटाई के समय बारिश बन सकती है मुसीबत

छत्तीसगढ़ में धान की फसल तैयार होने के साथ ही कटाई का मौसम भी नजदीक है। ऐसे समय में बारिश किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। खेतों में खड़ी फसल के साथ-साथ कटाई के बाद खुले में रखे धान को भी बारिश से नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि इससे पहले हुई बारिश के कारण कई इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई थीं। खेतों में पानी भरने और कटी हुई फसल भीगने से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यदि लगातार बारिश होती है तो कटाई और फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का काम भी प्रभावित हो सकता है।

मुरासु तूफान से जुड़ी चेतावनी ऐसे समय आई है, जब किसान अपनी मेहनत से तैयार फसल को सुरक्षित रखने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में मौसम का बिगड़ना उनके लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है।

किसानों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

छत्तीसगढ़ में धान कटाई का सीजन शुरू होने वाला है और ऐसे में तूफान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पहले ही ‘अर्नब’ के चलते किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। धान कटाई से पहले हुई बारिश के चलते किसानों की फसल डूब गई है, जिसके चलते फसल खराब हो गया है। वहीं, अब चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है।

मौसम में बदलाव की आशंका को देखते हुए किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है, वे फसल को खुले में रखने के बजाय सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखने की व्यवस्था करें। खेतों में कटी हुई फसल को बारिश के पानी से बचाने के लिए तिरपाल या अन्य सुरक्षित ढकाव का इंतजाम किया जा सकता है।

जिन खेतों में फसल अभी खड़ी है, वहां कटाई और मड़ाई से जुड़े फैसले स्थानीय मौसम की स्थिति को देखकर लेने चाहिए। तेज हवा और बारिश के दौरान खेतों में काम करने से बचना भी जरूरी है। किसानों को कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह पर ध्यान देना चाहिए।

मौसम विभाग के अगले अपडेट पर रहेगी नजर

चक्रवाती तूफान मुरासु का छत्तीसगढ़ पर वास्तविक असर इसकी दिशा, गति और बारिश के फैलाव पर निर्भर करेगा। फिलहाल बस्तर संभाग के पांच जिलों में भारी बारिश की आशंका ने किसानों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

आने वाले घंटों में मौसम विभाग के अपडेट से बारिश की तीव्रता और प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे धान की फसल को सुरक्षित रखने की तैयारी करें और मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों को नजरअंदाज न करें।

यह खबर उपलब्ध कराई गई मौसम संबंधी जानकारी पर आधारित है। प्रकाशन से पहले IMD का 2–3 नवंबर 2026 का आधिकारिक बुलेटिन, तूफान का नाम और छत्तीसगढ़ के जिलेवार अलर्ट जरूर सत्यापित करें।

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