Chhattisgarh Ganja Smuggling: छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। महासमुंद जिले के सरायपाली इलाके में एक कंटेनर वाहन से 120.960 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है। तस्करी के लिए आरोपियों ने चावल के करीब 300 बोरों के बीच गांजे के चार बोरे छिपा रखे थे। पुलिस के मुताबिक, जब्त गांजे की बाजार कीमत 60 लाख 48 हजार रुपये है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गांजे के अलावा कंटेनर और मोबाइल फोन सहित एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गांजा ओडिशा की ओर से लाया जा रहा था और इसे रायपुर पहुंचाने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसकी अंतिम पुष्टि और तस्करी के पूरे रास्ते का पता पुलिस की जांच के बाद ही चलेगा। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (ANTF) और सरायपाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
Chhattisgarh Ganja Smuggling: चावल के करीब 300 बोरों के बीच छिपाया था गांजा

पुलिस के अनुसार, तस्करों ने कंटेनर में चावल के लगभग 300 बोरे रखे थे। इन्हीं बोरों के बीच चार बोरियों में गांजे के पैकेट छिपाए गए थे। बाहर से देखने पर वाहन में चावल का माल ले जाया जा रहा था, लेकिन जांच के दौरान पुलिस को छिपाकर रखे गए गांजे का पता चला।
कंटेनर से कुल 117 पैकेट गांजा बरामद हुआ। इनका कुल वजन 120.960 किलोग्राम बताया गया है। पुलिस ने जब्त गांजे की कीमत 60 लाख 48 हजार रुपये आंकी है। चावल के माल के बीच नशीला पदार्थ छिपाने का तरीका अपनाकर तस्कर जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर के दो आरोपी गिरफ्तार

इस कार्रवाई में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान अमनदीप और लल्लू यादव के रूप में हुई है। दोनों उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। इन मोबाइल फोन की जांच से तस्करी से जुड़े संपर्कों और बातचीत के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी गांजा कहां से लेकर आए थे और इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था।
एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त

पुलिस ने इस कार्रवाई में गांजे के साथ तस्करी में इस्तेमाल किए गए कंटेनर वाहन को भी जब्त किया है। वाहन की अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा दो मोबाइल फोन और अन्य जब्त सामग्री को भी कार्रवाई में शामिल किया गया है।
पुलिस के अनुसार, गांजे की कीमत और वाहन सहित जब्त संपत्ति का कुल मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक है। इस तरह कार्रवाई में केवल नशीले पदार्थ की बरामदगी ही नहीं हुई, बल्कि तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को भी जब्त किया गया है।
ANTF और सरायपाली पुलिस ने की संयुक्त कार्रवाई
यह कार्रवाई एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (ANTF) और सरायपाली पुलिस की संयुक्त टीम ने की। ओडिशा की ओर से छत्तीसगढ़ में गांजे की तस्करी की आशंका को देखते हुए पुलिस नशे के अवैध कारोबार से जुड़े वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही है।
कार्रवाई के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान गांजे की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति, इसे पहुंचाने वाले संपर्क और संभावित खरीदारों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
रायपुर तक पहुंचाया जाना था गांजा? नेटवर्क की जांच जारी
प्रारंभिक जानकारी में गांजे की खेप ओडिशा से रायपुर लाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस खेप का वास्तविक गंतव्य क्या था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, वाहन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तस्करी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही हैं। यह भी जांच का विषय है कि क्या दोनों आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहे हैं या उनके साथ कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा था।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां होती हैं या तस्करी के नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।
नशे की तस्करी रोकने के लिए पुलिस की कार्रवाई
Chhattisgarh Ganja Smuggling का यह मामला दिखाता है कि तस्कर सामान्य माल की आड़ में नशीले पदार्थों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। चावल के बोरों के बीच गांजा छिपाकर ले जाना इसी तरह की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
सरायपाली में हुई इस कार्रवाई में 120.960 किलो गांजे की बरामदगी और दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे अहम सवाल इस खेप के स्रोत और इसके संभावित खरीदारों का है। पुलिस की जांच से ही स्पष्ट होगा कि इस तस्करी के पीछे कितने लोग जुड़े हुए थे और गांजा किस नेटवर्क के जरिए छत्तीसगढ़ पहुंचाया जा रहा था।