Chhattisgarh Rajyotsav 2026: राज्योत्सव में चलता-फिरता रोबोट आकर्षण का केंद्र बना है। मशीन लर्निंग और ऑफलाइन तकनीक से लैस यह रोबोट होटल, रेस्टोरेंट और घरों में उपयोगी हो सकता है। राज्योत्सव में इस बार एक चलता-फिरता रोबोट भी आकर्षण का केंद्र रहा। आमतौर पर तकनीक से जुड़े प्रदर्शन में मशीनें एक जगह रखी दिखाई देती हैं, लेकिन यह रोबोट लोगों के बीच पहुंचकर उनसे संवाद और गतिविधियां कर सकता है।
इसे प्रदर्शित करने के पीछे टीम का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के युवाओं को रोबोटिक्स की संभावनाओं से परिचित कराना और उन्हें इस क्षेत्र में कुछ नया करने के लिए प्रेरित करना है।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विकास योजनाओं के साथ तकनीक का एक खास नमूना भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। राज्योत्सव परिसर में प्रदर्शित चलता-फिरता रोबोट आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खास बात यह है कि यह रोबोट लोगों के बीच जाकर गतिविधियां कर सकता है और इसे संचालित करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती। मशीन लर्निंग, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के तालमेल से काम करने वाला यह रोबोट भविष्य में होटल, रेस्टोरेंट और घरों में उपयोगी साबित हो सकता है।
इस रोबोट को देखने के लिए लोग उत्सुकता दिखा रहे हैं। टीम का उद्देश्य केवल तकनीक का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं से परिचित कराना भी है। टीम के सदस्य ओम सिन्हा ने इसकी तैयारी, संचालन और संभावित उपयोग के बारे में जानकारी दी।
राज्योत्सव में लोगों के बीच पहुंचा चलता-फिरता रोबोट

Chhattisgarh Rajyotsav 2026 में प्रदर्शित यह रोबोट इसलिए भी खास है क्योंकि यह किसी स्टॉल पर रखी मशीन की तरह एक जगह स्थिर नहीं रहता। इसे अलग-अलग गतिविधियों और मूवमेंट के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके जरिए लोगों को दिखाया जा रहा है कि रोबोटिक्स तकनीक का इस्तेमाल केवल फैक्ट्रियों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जीवन में भी इसकी उपयोगिता हो सकती है।
टीम के सदस्य ओम सिन्हा के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में तकनीक से जुड़े कई तरह के काम हो रहे हैं, लेकिन लोगों के बीच जाकर उनसे जुड़ने वाला चलता-फिरता रोबोट कम देखने को मिलता है। इसी सोच के साथ इसे राज्योत्सव में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया।
इसका उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि रोबोटिक्स के क्षेत्र में सीखने और नए प्रयोग करने की काफी संभावनाएं हैं। तकनीक में रुचि रखने वाले युवा इस तरह के प्रदर्शन से प्रेरणा लेकर अपने स्तर पर भी नए प्रोजेक्ट तैयार करने के बारे में सोच सकते हैं।
27 अक्टूबर से शुरू हुई तैयारी, 31 अक्टूबर की रात तक चली ट्रेनिंग

ओम सिन्हा ने बताया कि रोबोट के प्रदर्शन की तैयारी अचानक शुरू की गई थी। इसकी तैयारी 27 अक्टूबर को शुरू हुई। इसके बाद टीम के सदस्यों ने रोबोट के संचालन और गतिविधियों को लेकर प्रशिक्षण लिया।
31 अक्टूबर की रात तक इसकी अंतिम ट्रेनिंग पूरी की गई और 1 नवंबर को इसे राज्योत्सव में प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया। टीम में ओम सिन्हा के साथ देव सिन्हा और अन्य सहयोगी भी शामिल रहे।
कम समय में प्रदर्शन के लिए रोबोट को तैयार करने के दौरान उसके मूवमेंट और गतिविधियों को समझना तथा उन्हें सही तरीके से संचालित करना महत्वपूर्ण रहा। टीम ने इसी पर ध्यान देते हुए इसकी ट्रेनिंग पूरी की।
बिना इंटरनेट के कैसे काम करता है यह रोबोट?

इस रोबोट की एक प्रमुख विशेषता इसका ऑफलाइन संचालन है। टीम के अनुसार, इंटरनेट की उपलब्धता और सुरक्षा से जुड़ी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए इसमें बिना इंटरनेट काम करने की क्षमता पर जोर दिया गया है।
रोबोट का संचालन सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के तालमेल से होता है। इसमें अलग-अलग गतिविधियों के लिए जेस्चर और मूवमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है। मशीन लर्निंग की मदद से इसे निर्धारित गतिविधियों के अनुसार काम करने के लिए तैयार किया जा सकता है।
ऑफलाइन संचालन का अर्थ है कि इसके कुछ निर्धारित काम इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी किए जा सकते हैं। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि रोबोट की हर सुविधा पूरी तरह इंटरनेट से स्वतंत्र है। इसकी वास्तविक क्षमताएं इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और पहले से दिए गए निर्देशों पर निर्भर करती हैं।
होटल और रेस्टोरेंट में क्या हो सकता है इसका उपयोग?
टीम के सदस्य ओम सिन्हा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तकनीक से जुड़े कई काम हो रहे हैं, लेकिन लोगों के बीच जाकर उनसे जुड़ने वाला चलता-फिरता रोबोट कम दिखाई देता है। इसी सोच के साथ इसे प्रदर्शन के लिए चुना गया। इसकी तैयारी अचानक हुई। 27 अक्टूबर को तैयारी शुरू की गई और इसके बाद टीम ने ट्रेनिंग ली। 31 अक्टूबर की रात तक इसकी अंतिम ट्रेनिंग पूरी की गई और अगले दिन यानी 1 नवंबर को प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया। टीम में ओम सिन्हा के साथ देव सिन्हा और अन्य सहयोगी शामिल हैं।
टीम के मुताबिक, भविष्य में इस तरह के रोबोट होटल और रेस्टोरेंट में कई कामों में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, ग्राहकों तक सामान पहुंचाने या एक स्थान से दूसरे स्थान तक जरूरी वस्तुएं ले जाने जैसे कामों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
होटल और रेस्टोरेंट में रोबोट का उपयोग कर्मचारियों के काम को आसान बनाने और कुछ नियमित कार्यों को व्यवस्थित करने में मददगार हो सकता है। हालांकि, इसके लिए रोबोट की क्षमता, सुरक्षा और संबंधित स्थान के हिसाब से तकनीकी बदलाव जरूरी होंगे।
घरों में भी मददगार बन सकता है चलता-फिरता रोबोट
ओम सिन्हा ने बताया कि भविष्य में इस तरह के रोबोट का उपयोग घरों में भी किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, रसोई से खाने की प्लेट किसी दूसरे कमरे तक पहुंचाने जैसे छोटे काम रोबोट से कराए जा सकते हैं।
घरेलू उपयोग के लिए ऐसे रोबोट बुजुर्गों या व्यस्त परिवारों के कुछ रोजमर्रा के कामों में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए रोबोट को घर के वातावरण, रास्तों और आसपास मौजूद लोगों के अनुसार काम करने में सक्षम होना होगा। फिलहाल बताए गए उपयोग संभावित हैं, इन्हें इस विशेष रोबोट की सभी मौजूदा क्षमताओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विदेश से आयात किया गया है रोबोट, टीम ने नहीं बनाया
अलग-अलग गतिविधियों के लिए जेस्चर और मूवमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है। मशीन लर्निंग के जरिए इसे गतिविधियों के अनुसार काम करने के लिए तैयार किया जा सकता है। टीम के मुताबिक, इंटरनेट की सुविधा और सुरक्षा संबंधी सीमाओं के कारण फिलहाल इसमें ऑफलाइन काम करने की क्षमता पर जोर दिया गया है। इसका संचालन सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के तालमेल से होता है।
इस रोबोट को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी यह भी सामने आई है कि इसे छत्तीसगढ़ की टीम ने खुद विकसित नहीं किया है। ओम सिन्हा के अनुसार, यह रोबोट विदेश से आयात किया गया है। टीम ने इसे राज्योत्सव में प्रदर्शित करने और इसकी गतिविधियों का प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया है।
ओम सिन्हा ने बताया कि भविष्य में इस तरह के रोबोट होटल और रेस्टोरेंट के अलावा घरों में भी उपयोगी हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, घर में रसोई से खाने की प्लेट किसी दूसरे कमरे तक पहुंचाने जैसे काम रोबोट से कराए जा सकते हैं। हालांकि, इस रोबोट को टीम ने खुद तैयार नहीं किया है, यह विदेश से आयात किया गया है।
इसलिए इसे टीम द्वारा बनाया गया स्वदेशी रोबोट बताना सही नहीं होगा। हालांकि, इसके संचालन और प्रदर्शन के जरिए स्थानीय युवाओं को रोबोटिक्स की तकनीक से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए रोबोटिक्स में नए अवसर
Chhattisgarh Rajyotsav 2026 में इस रोबोट का प्रदर्शन यह दिखाता है कि राज्योत्सव जैसे बड़े आयोजन तकनीक और नवाचार को आम लोगों तक पहुंचाने का मंच भी बन सकते हैं। रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन आने वाले समय में कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं।
युवाओं के लिए इस क्षेत्र में सीखने, प्रशिक्षण लेने और नए प्रयोग करने की संभावनाएं हैं। हालांकि, इसके लिए तकनीकी शिक्षा, संसाधन और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी जरूरी होंगे।
राज्योत्सव में प्रदर्शित यह चलता-फिरता रोबोट लोगों के बीच उत्सुकता पैदा कर रहा है। बिना इंटरनेट के निर्धारित गतिविधियां करने की इसकी क्षमता और घरों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट तक संभावित उपयोग इसे चर्चा का विषय बना रहे हैं।