Chhattisgarh Railway Projects: CM विष्णुदेव साय बोले- ‘डबल इंजन सरकार से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार’,

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Chhattisgarh Railway Projects: छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार और रेलवे अधोसंरचना के आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से रेलवे नेटवर्क मजबूत हो रहा है, जिससे औद्योगिक विकास, माल ढुलाई, यात्रियों की सुविधाओं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण की दिशा में काम हो रहा है। उनका कहना है कि बेहतर रेल संपर्क से प्रदेश के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

रेलवे बजट में करीब 24 गुना बढ़ोतरी का दावा

Chhattisgarh Railway Projects: CM विष्णुदेव साय बोले- 'डबल इंजन सरकार से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार',

राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ में रेलवे परियोजनाओं के वास्ते 7,470 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसकी तुलना वर्ष 2009-14 के दौरान राज्य को मिलने वाले औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना आवंटन से की गई है।

सरकार के अनुसार, वार्षिक औसत आवंटन में करीब 24 गुना वृद्धि हुई है। इस निवेश का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करना, औद्योगिक और खनिज उत्पादों की ढुलाई को बेहतर बनाना तथा उन इलाकों तक रेल संपर्क पहुंचाना है, जहां अब तक कनेक्टिविटी सीमित रही है।

छत्तीसगढ़ कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में रेल नेटवर्क का विस्तार माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने और उद्योगों को बड़े बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।

खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर से मिलेगी राहत

छत्तीसगढ़ की प्रमुख रेल परियोजनाओं में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर शामिल है। प्रस्तावित यह मार्ग करीब 278 किलोमीटर लंबा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी। इसकी शुरुआती अनुमानित लागत 8,741 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में संशोधित कर 7,854 करोड़ रुपये बताया गया।

इस कॉरिडोर का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग जैसे व्यस्त रेल खंडों पर दबाव कम करना और माल तथा यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता विकसित करना है।

परियोजना से बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों को माल की आवाजाही में मदद मिल सकती है।

रेल मार्ग मजबूत होने से उद्योगों की परिवहन लागत कम करने और सड़क मार्ग पर निर्भरता घटाने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ इसके निर्माण, संचालन और माल ढुलाई की क्षमता विकसित होने के बाद स्पष्ट होगा।

बस्तर की रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर

Chhattisgarh Railway Projects में बस्तर क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार की जानकारी के मुताबिक, रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन करीब 140 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित परियोजना है और इसके लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होने की बात कही गई है।

इसके अलावा किरंदुल-कोत्तागुडेम रेल लाइन और गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) रेल परियोजना से जुड़े सर्वेक्षणों का भी उल्लेख किया गया है। इन प्रस्तावों के पूरा होने पर बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में रेल संपर्क बढ़ाने की संभावना है।

दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक करीब 77 किलोमीटर के खंड में रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इससे क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाकों को रेल नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला है।

परियोजना के अगले चरण में रावघाट तक संपर्क विकसित करने की योजना है। इससे लौह अयस्क की खदानों और भिलाई इस्पात संयंत्र के बीच परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं, कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल और यात्री ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।

कटघोरा से डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित नई रेल लाइन

प्रदेश में रेल संपर्क बढ़ाने के लिए कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की भी योजना है। प्रस्तावित मार्ग की लंबाई करीब 295 किलोमीटर बताई गई है। यह कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक जाने के लिए प्रस्तावित है।

इस परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना बताई गई है। इसके लिए विशेष प्रयोजन कंपनी यानी स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) गठित करने का प्रस्ताव भी है।

इस रेल लाइन का उद्देश्य उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ना है, जहां अभी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। परियोजना आगे बढ़ने पर यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, स्थानीय व्यापार और पर्यटन को लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके निर्माण और संचालन की समयसीमा से संबंधित अंतिम जानकारी अलग से देखना जरूरी होगा।

उत्तर छत्तीसगढ़ में भी रेल परियोजनाओं की तैयारी

उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए भी कई रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इनमें सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर रेल लाइन करीब 244 किलोमीटर, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा कॉरिडोर करीब 301 किलोमीटर और अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन करीब 200 किलोमीटर लंबी बताई गई है।

राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन प्रस्तावों पर निर्णय और सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया है। इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती इलाकों में रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।

बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार, पर्यटन और खनिज परिवहन को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, निर्माण और संचालन से जुड़े कार्यों के जरिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं की मंजूरी और निर्माण की स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणाओं से की जानी चाहिए।

अमृत भारत स्टेशन योजना से 32 स्टेशनों का आधुनिकीकरण

नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है।

इस योजना का उद्देश्य स्टेशन परिसरों को अधिक सुविधाजनक बनाना और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसमें बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छ परिसर, दिव्यांगजन के अनुकूल सुविधाएं और अन्य यात्री सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार ने चांपा, बालोद और सरोना रेलवे स्टेशनों के उन्नयन को भी प्रदेश में रेल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। इन स्टेशनों का वर्चुअल लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया।

उद्योग, किसानों और युवाओं को कैसे मिलेगा लाभ?

रेल नेटवर्क का विस्तार केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक और खनिज उत्पादक राज्य में बेहतर रेल संपर्क से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ सकती है। इससे उद्योगों को कच्चा माल पहुंचाने और तैयार उत्पादों को दूसरे राज्यों के बाजारों तक भेजने में सुविधा मिल सकती है।

किसानों के लिए भी बेहतर परिवहन नेटवर्क कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सहायक हो सकता है। वहीं, पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क सुधरने से यात्रियों की आवाजाही और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

रेल परियोजनाओं के निर्माण और संचालन से रोजगार तथा छोटे व्यवसायों के लिए अवसर भी बन सकते हैं। हालांकि, इन लाभों का वास्तविक स्तर परियोजनाओं के पूरा होने, रेल सेवाएं शुरू होने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कनेक्टिविटी विकसित होने पर निर्भर करेगा।

CM विष्णुदेव साय बोले- रेल विकास से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उनके मुताबिक, नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और आधुनिक स्टेशनों के विकास से प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने डबल इंजन सरकार के तहत हो रहे रेल विकास को विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि बेहतर अधोसंरचना का लाभ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों और नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।

फिलहाल प्रदेश में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी होने की जानकारी राज्य सरकार ने दी है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं की प्रगति, नई रेल लाइनों की मंजूरी और स्टेशनों के आधुनिकीकरण से जुड़े कार्य छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा तय करेंगे।

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