CJP Foreign Funding Row: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पार्टी से जुड़े लोगों पर अमेरिका और पाकिस्तान से विदेशी फंडिंग मिलने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बाद सीजेपी ने पलटवार करते हुए सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बीजेपी से आरोपों के समर्थन में सबूत सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस बीच सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूछताछ की। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती की जांच कर रही समिति को एक महीने के भीतर अपनी पहली रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस तरह विदेशी फंडिंग के आरोपों और प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर सीजेपी एक साथ दो विवादों के केंद्र में है।
सीजेपी पर अमेरिका और पाकिस्तान से फंडिंग लेने का आरोप

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सीजेपी से जुड़े लोगों पर विदेशी स्रोतों से आर्थिक मदद लेने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को अमेरिका स्थित दानदाताओं से फंडिंग मिली है, जबकि सह-संस्थापक आशुतोष रांका को कथित तौर पर पाकिस्तान के नेताओं और अन्य लोगों से आर्थिक मदद मिली।
जितेंद्र सिंह ने यह भी दावा किया कि विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले कुछ एनजीओ और भारत विरोधी संगठनों के जरिए सरकार के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर विदेशी फंडिंग, डीप स्टेट और अन्य नेटवर्क के बीच संबंध होने की बात भी कही।
मंत्री ने विदेशी चंदे पर नियंत्रण के लिए विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) का उल्लेख करते हुए फंडिंग के स्रोतों को सार्वजनिक करने की जरूरत बताई। हालांकि, ये आरोप फिलहाल राजनीतिक दावों के रूप में सामने आए हैं। इनके आधार पर सीजेपी या उसके नेताओं के खिलाफ आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता।
सीजेपी ने आरोपों पर किया पलटवार

जितेंद्र सिंह के आरोपों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने कहा कि संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों के बयान भी जवाबदेही से परे नहीं होने चाहिए।
सीजेपी ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि कोई केंद्रीय मंत्री बिना सार्वजनिक रूप से सबूत पेश किए इस तरह के गंभीर आरोप कैसे लगा सकता है। पार्टी ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
आपके दिए स्रोत के मुताबिक, सीजेपी ने नीट मामले के दौरान सरकार के साथ हुई बातचीत का भी हवाला देते हुए सवाल किया कि यदि पार्टी को विदेशी फंडिंग मिल रही थी, तो उस समय उससे बातचीत क्यों की गई थी। इस सवाल के जरिए पार्टी ने सरकार के आरोपों पर जवाब मांगा है।
प्रियांक खरगे ने बीजेपी से मांगे सबूत

इस विवाद में कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सीजेपी को विदेशी फंडिंग मिलने की जानकारी है, तो उसके समर्थन में ठोस सबूत सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
खरगे ने सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के पास ऐसी जानकारी मौजूद है, तो अब तक उसके आधार पर क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और खुफिया एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल किए।
प्रियांक खरगे ने कहा कि केवल आरोप लगाने के बजाय उनके समर्थन में दस्तावेज और प्रमाण सामने रखे जाने चाहिए। इस तरह सीजेपी पर विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका से पूछताछ
विदेशी फंडिंग विवाद के बीच सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए। यह पूछताछ 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से संबंधित मामलों में की गई।
पुलिस के अनुसार, उस समय जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखा गया था। इसके बावजूद सीजेपी नेताओं और उनके समर्थकों का एक समूह वहां पहुंचा था। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और राष्ट्रीय ध्वज फहराया। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को दोनों नेताओं से क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ की गई। आपके दिए स्रोत में पूछताछ करीब चार घंटे चलने की जानकारी है। इससे पहले दोनों नेता इस मामले में न्यायिक हिरासत में भी रह चुके हैं और 21 अक्टूबर को निजी मुचलके तथा जमानतदारों से जुड़े बांड भरने के बाद रिहा हुए थे।
‘तिरंगा फहराना अपराध नहीं’, जांच में सहयोग की बात
पूछताछ के बाद सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने जांच में सहयोग करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी जांच एजेंसी के साथ सहयोग करेगी।
रांका ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर तिरंगा फहराने को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। उनका कहना था कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार और प्रदर्शन से जुड़े सवालों पर बहस होनी चाहिए।
हालांकि, पुलिस का मामला केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां जंतर-मंतर में प्रवेश और कथित प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने में मांगी पहली जांच रिपोर्ट
सीजेपी से जुड़े इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती की जांच कर रही उच्चस्तरीय समिति को अहम निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि समिति उपलब्ध सामग्री के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ाए और एक महीने के भीतर पहली तथ्य-जांच रिपोर्ट सौंपे।
5 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान तीन सदस्यीय पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन शामिल थे। पीठ ने ध्यान दिलाया कि समिति की ओर से शिकायतें और साक्ष्य जुटाने के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल पर अब तक सीमित शिकायतें ही प्राप्त हुई हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतों का अनिश्चितकाल तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। समिति को अब तक उपलब्ध सामग्री की जांच करनी चाहिए, संबंधित पक्षों से जवाब मांगना चाहिए और एक महीने के भीतर अपनी पहली रिपोर्ट पेश करनी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती और उससे जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच को आगे बढ़ाना है। समिति को उपलब्ध दस्तावेजों, शिकायतों और संबंधित पक्षों के जवाबों के आधार पर तथ्य जुटाने हैं।
यह निर्देश सीजेपी नेताओं को विदेशी फंडिंग मिलने के आरोपों की जांच से अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी फंडिंग के आरोपों पर इस आदेश में कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत का निर्देश जंतर-मंतर सहित प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई की जांच कर रही समिति की रिपोर्ट से संबंधित है।
फिलहाल सीजेपी पर विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। वहीं, सौरव दास और आशुतोष रांका से पूछताछ तथा सुप्रीम कोर्ट की ओर से जांच समिति को दी गई समय-सीमा के बाद यह मामला आगे भी चर्चा में रहने की संभावना है।