नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ वाले बयान को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वह खुदा से उम्मीद करते हैं कि सरकार जागेगी और उसे यह एहसास होगा कि संविधान सर्वोपरि है। फारूक अब्दुल्ला ने भारत की मजबूती के लिए राज्यों की समस्याओं को सुनने और उन्हें मजबूत करने की जरूरत भी बताई।
उन्होंने कहा कि देश की विविधता में एकता ही भारत की ताकत है। उनके मुताबिक, अगर देश को मजबूत बनाना है तो राज्यों को भी मजबूत करना होगा और उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुनना होगा।
संसद को कमजोर करने का लगाया आरोप
संसद में जारी हंगामे और कामकाज को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद जनता की समस्याओं और सवालों को सामने रखने का मंच है। सांसद वहां सवाल उठाते हैं, लेकिन अगर उनके सवालों पर सरकार ध्यान नहीं देगी तो इसका असर संसद की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने खुद संसद के सदस्य के तौर पर इसके कामकाज को करीब से देखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संसद को कमजोर कर दिया जाएगा तो वहां से जनता की आवाज किस तरह सामने आएगी।
कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भी बोले फारूक अब्दुल्ला
कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर फारूक अब्दुल्ला ने सरकार से किए गए वादों को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि इतने वर्षों में कश्मीरी पंडितों के लिए किए गए वादों का क्या हुआ।
उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कश्मीरी पंडितों को वापस लाने और बसाने की पहल की गई थी। उनके मुताबिक, लोगों को रोजगार भी दिए गए थे, ताकि उनके परिवार वापस आकर जम्मू-कश्मीर में बस सकें।
फारूक अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि कश्मीरी मुसलमान कभी कश्मीरी पंडितों के खिलाफ नहीं थे।
सुखबीर सिंह बादल पर हमले को लेकर जताई चिंता
महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को लेकर भी फारूक अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को बेहद अफसोसजनक बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल पर पहले भी हमला हो चुका है और ऐसे में सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरतने की जरूरत है। फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से मामले को गंभीरता से लेने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की।