Hockey World Cup 2026: भारतीय पुरुष हॉकी टीम का वर्ल्ड कप अभियान निराशाजनक अंदाज में खत्म हुआ। सातवें और आठवें स्थान के मुकाबले में भारत को बेल्जियम के हाथों पेनल्टी शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा। निर्धारित समय तक दोनों टीमें 3-3 की बराबरी पर थीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन किया।

यह मुकाबला 28 अगस्त को बेल्जियम के वावरे स्थित बेलफियस हॉकी एरिना में खेला गया। भारत ने आखिरी मिनट में गोल करके मैच को शूटआउट तक पहुंचाया था, लेकिन वहां मेजबान टीम ने बाजी मार ली।
भारत ने की थी शानदार शुरुआत
मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए अच्छी रही। टीम ने पहले क्वार्टर में बेल्जियम पर दबाव बनाया और छठे मिनट में अभिषेक ने गोल कर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई।
हालांकि बढ़त मिलने के बाद भारत के सामने कुछ मुश्किलें भी आईं। 11वें मिनट में मैदान पर निर्धारित संख्या से एक अतिरिक्त भारतीय खिलाड़ी होने के कारण टीम पर पेनल्टी लगी और कप्तान हरमनप्रीत सिंह को येलो कार्ड दिखाया गया। उन्हें कुछ समय के लिए मैदान से बाहर रहना पड़ा।

इस दौरान बेल्जियम ने लगातार भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाया और कई पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए। भारतीय गोलकीपर और डिफेंस ने हालांकि शुरुआती दबाव को अच्छी तरह संभाला।
दूसरे क्वार्टर में बेल्जियम ने पलटा मैच
दूसरे क्वार्टर में बेल्जियम ने जोरदार वापसी की। 22वें मिनट में रोमन डुवेकोट ने गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया। इसके तुरंत बाद ह्यूगो लाबूशेरे ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर बेल्जियम को 2-1 से आगे कर दिया।
भारत के लिए पहला हाफ काफी चुनौतीपूर्ण रहा। बेल्जियम ने लगातार सर्कल में प्रवेश किया और भारतीय गोल पर कई हमले किए। इसके बावजूद भारत ने मुकाबले को पूरी तरह हाथ से निकलने नहीं दिया।
हरमनप्रीत सिंह ने कराई भारत की वापसी
दूसरे हाफ की शुरुआत भारत ने आक्रामक अंदाज में की। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार ड्रैग-फ्लिक लगाकर भारत को 2-2 की बराबरी दिला दी।
इसके बाद दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। बेल्जियम ने दोबारा बढ़त लेने की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने कई अहम मौकों पर खतरा टाला।

तीसरे क्वार्टर के अंत तक स्कोर 2-2 रहा। इसके बाद मुकाबले का आखिरी क्वार्टर दोनों टीमों के लिए बेहद अहम साबित हुआ।
आखिरी मिनट में भारत ने बचाई उम्मीद
चौथे क्वार्टर में बेल्जियम ने एक बार फिर बढ़त बना ली। निकोलस डी केर्पेल ने गोल कर मेजबान टीम को 3-2 से आगे कर दिया।
समय तेजी से खत्म हो रहा था और भारत पर हार का खतरा मंडरा रहा था। लेकिन टीम ने आखिरी क्षण तक हार नहीं मानी।
मैच खत्म होने से महज 26 सेकंड पहले भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस मौके को गोल में बदलने में कोई गलती नहीं की। उनके गोल से स्कोर 3-3 हो गया और मुकाबला पेनल्टी शूटआउट में पहुंच गया।
शूटआउट में बेल्जियम ने मारी बाजी
पेनल्टी शूटआउट में भारत की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। हरमनप्रीत सिंह और सुखजीत सिंह अपने प्रयासों को गोल में नहीं बदल सके।
भारत की ओर से शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह और अभिषेक ने अपने प्रयासों में गोल किए। लेकिन बेल्जियम के गोलकीपर विन्सेंट वानाश ने दो अहम बचाव करके भारत की मुश्किल बढ़ा दी।
बेल्जियम की ओर से टॉम बून, आर्थर डी स्लूवर, अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स और रोमन डुवेकोट ने गोल किए। इस तरह बेल्जियम ने शूटआउट में 4-3 से जीत दर्ज कर सातवां स्थान हासिल किया, जबकि भारत को आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा।
हरमनप्रीत सिंह के नाम खास उपलब्धि
हार के बावजूद कप्तान हरमनप्रीत सिंह के लिए यह टूर्नामेंट व्यक्तिगत तौर पर अच्छा रहा। उन्होंने वर्ल्ड कप में कुल 8 गोल किए और टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोररों में संयुक्त रूप से जगह बनाई।
बेल्जियम के खिलाफ भी उन्होंने दो गोल किए। खास तौर पर आखिरी मिनट में लगाया गया उनका पेनल्टी कॉर्नर भारत को मुकाबले में वापस लेकर आया।
आठवें स्थान पर खत्म हुआ भारत का अभियान
Hockey World Cup 2026 में भारतीय पुरुष टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन टीम सेमीफाइनल की दौड़ तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद सातवें स्थान के मुकाबले में भी भारत को बेल्जियम से शूटआउट में हार मिली।
इस हार के साथ भारत ने टूर्नामेंट में आठवें स्थान पर अपना अभियान समाप्त किया। बेल्जियम सातवें स्थान पर रहा। आधिकारिक हॉकी रिपोर्ट के मुताबिक निर्धारित समय में 3-3 की बराबरी के बाद शूटआउट में बेल्जियम ने 4-3 से जीत दर्ज की।
अब एशियन गेम्स पर नजर
वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम का अगला बड़ा लक्ष्य आने वाले एशियन गेम्स होंगे। टीम के लिए यह टूर्नामेंट अपनी कमियों को सुधारने और दोबारा मजबूत वापसी करने का मौका होगा।
भारत के लिए इस वर्ल्ड कप का अंत भले ही निराशाजनक रहा हो, लेकिन आखिरी मुकाबले में टीम ने आखिरी सेकंड तक लड़ने का जज्बा जरूर दिखाया। अब नजर इस बात पर होगी कि भारतीय टीम अपनी डिफेंस और फिनिशिंग की कमियों को कितनी जल्दी दूर करती है।