नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अपने फैसले की वजह बताते हुए उन्होंने आर्थिक और निजी परिस्थितियों का हवाला दिया। पूनावाला के मुताबिक, राजनीतिक दलों में प्रवक्ताओं को नियमित वेतन नहीं मिलता और ऐसे में व्यक्तिगत खर्च चलाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था।
पूनावाला ने एक इंटरव्यू में अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि उन्हें घर का किराया और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी छोड़ने का फैसला पार्टी की विचारधारा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी सोच में बदलाव की वजह से नहीं लिया गया है।
‘मकान मालिक बीजेपी से होने की वजह से मुफ्त में घर नहीं देगा’
बीजेपी से अलग होने की वजह पर बात करते हुए पूनावाला ने कहा कि राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं को वेतन नहीं देते। उन्होंने अपने किराये का उदाहरण देते हुए कहा कि मकान मालिक हर महीने की पहली तारीख को किराया मांगता है और सिर्फ इसलिए मुफ्त में घर नहीं देगा क्योंकि वह बीजेपी से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने साफ किया कि बीजेपी को कार्यकर्ताओं का आर्थिक रूप से भरण-पोषण करना पार्टी की जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन उनके सामने व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक जरूरतें थीं।
पीएम मोदी के विजन से अब भी जुड़े होने का दावा
इस्तीफे के बावजूद शहजाद पूनावाला ने बीजेपी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कायम रहने की बात कही।
उनका कहना है कि राजनीतिक संगठन से जुड़ना किसी सामान्य नौकरी की तरह नहीं होता। कार्यकर्ता विचारधारा, व्यक्ति या संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण राजनीति में आते हैं। उनके मुताबिक, बीजेपी छोड़ने के बाद भी इन विचारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं आया है।
‘मैं न किसी का बेटा हूं, न किसी से फायदा लेने वाला’
पूनावाला ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर कहा कि वह ऐसे नेताओं में शामिल नहीं हैं जिन्हें राजनीतिक विरासत या पारिवारिक प्रभाव का फायदा मिलता है। उन्होंने खुद को पहली पीढ़ी का नेता बताते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन और भविष्य के लिए अलग रास्ते तलाशने की जरूरत है।
उन्होंने राजनीतिक परिवारों से आने वाले नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को अक्सर लगता है कि सभी राजनेताओं की आर्थिक स्थिति एक जैसी होती है, जबकि ऐसा नहीं है।
2024 से इस्तीफे पर विचार कर रहे थे
शहजाद पूनावाला ने यह भी दावा किया कि उनका इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं है। उनके मुताबिक, वह 2024 से ही पार्टी छोड़ने के बारे में सोच रहे थे।
उन्होंने बताया कि कुछ सप्ताह पहले जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी परेशानी और इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की, तब पार्टी के वरिष्ठ लोगों ने उनसे संपर्क किया और उनकी मदद करने की कोशिश भी की।
हालांकि, पूनावाला ने कहा कि उनका जमीर उन्हें पार्टी से व्यक्तिगत आर्थिक मदद लेने की अनुमति नहीं देता।
इस्तीफे के पीछे किसी ‘स्टिंग’ की थ्योरी को किया खारिज
अपने इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अलग-अलग चर्चाओं पर भी पूनावाला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े किसी वीडियो की जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि ऐसी बातें उन्होंने पहली बार सुनी हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके इस्तीफे के पीछे किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में लोगों के बीच मतभेद और विरोध होना सामान्य बात है।
कांग्रेस में वापसी पर शहजाद पूनावाला ने रखी शर्त
बीजेपी छोड़ने के बाद कांग्रेस में वापसी की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल का पूनावाला ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में लौटने के लिए उनकी एक शर्त होगी।
उनके मुताबिक, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को हटाया जाए और नेहरू के कामों के लिए माफी मांगी जाए, तभी वह कांग्रेस में शामिल होने पर विचार करेंगे।
इस बयान से साफ है कि फिलहाल वह कांग्रेस में वापसी के संकेत नहीं दे रहे हैं।
‘भारत में बीजेपी ही सबसे अच्छी पार्टी’
पूनावाला ने अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के विजन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में बीजेपी ही देश की सबसे अच्छी पार्टी है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करने के बाद उनके किसी दूसरी पार्टी में जाने की संभावना को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता में ही है।