सुधाकर कोंडापुरकर: रायपुर समाजसेवा के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे वरिष्ठ समाजसेवी सुधाकर माधव कोंडापुरकर का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। समाजसेवी एवं राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त कार्यकर्ता डॉ. प्रियंका बिस्सा ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
डॉ. प्रियंका बिस्सा ने कहा कि सुधाकर कोंडापुरकर समाजसेवा के क्षेत्र में ऐसे कर्मठ व्यक्तित्व थे, जो परिस्थितियां कैसी भी हों, सामाजिक कार्यों के प्रति हमेशा सक्रिय रहते थे। उन्होंने कहा कि कोंडापुरकर जी का जीवन समाजसेवा और मानवीय संवेदनाओं के लिए समर्पित रहा।
‘मातृ छाया’ से जुड़कर बच्चों के लिए किया काम
सुधाकर कोंडापुरकर अनाथ बच्चों के लिए कार्य करने वाली संस्था ‘मातृ छाया’ के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। डॉ. प्रियंका बिस्सा ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि कोंडापुरकर जी उन्हें अपने साथ मातृ छाया लेकर जाते थे।
उन्होंने कहा कि वहीं से उनका मानवीय संवेदनाओं और समाजसेवा से पहला परिचय हुआ। कोंडापुरकर जी ने जिस तरह समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्ग के लिए काम किया, वह उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
डॉ. बिस्सा के मुताबिक, समाजसेवा के प्रति कोंडापुरकर जी की सोच केवल स्वयं सेवा करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे नई पीढ़ी में भी सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर देते थे।
अंतिम कार्य दिवस तक निभाते रहे जिम्मेदारी
सुधाकर कोंडापुरकर ने अपने अंतिम कार्य दिवस तक सक्रियता बनाए रखी। बताया गया कि उन्होंने होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के संचालक के रूप में अपने अंतिम कार्य दिवस पर भी महत्वपूर्ण निर्णयों से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।
उनकी कार्यशैली और सक्रियता को देखते हुए सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें लंबे समय तक एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में याद करते रहेंगे।
सेंट्रल बैंक से सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रही समाजसेवा

सुधाकर कोंडापुरकर सेंट्रल बैंक में उच्च पद पर कार्य करने के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद भी उन्होंने सामाजिक गतिविधियों से अपना जुड़ाव बनाए रखा।
वे महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा बैंक पेंशनर्स एसोसिएशन से भी वे संरक्षक सदस्य के रूप में जुड़े रहे। विभिन्न सामाजिक और संस्थागत गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी लगातार बनी रही।
समाजसेवा और सामाजिक संस्थाओं में उनके योगदान के लिए उन्हें विभिन्न सम्मानों से भी सम्मानित किया गया था। उनके सम्मान और उपलब्धियों की लंबी सूची उनके सामाजिक योगदान को दर्शाती है।
महाराष्ट्र मंडल भवन में हुआ अंतिम दर्शन

25 सितंबर 2026 को सुबह सुधाकर कोंडापुरकर का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए महाराष्ट्र मंडल भवन में रखा गया। इसके बाद उनके परिवार और शुभचिंतकों की सहमति से उनका देहदान रिम्स मेडिकल कॉलेज, रायपुर को किया गया।
देहदान का यह निर्णय भी उनके जीवन के सामाजिक सरोकारों की भावना से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। अंतिम दर्शन के दौरान सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और उनके परिचितों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘वे समाजसेवी पैदा करते थे’
डॉ. प्रियंका बिस्सा ने कहा कि सुधाकर कोंडापुरकर का निधन समाजसेवा के क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि कोंडापुरकर जी केवल स्वयं समाजसेवा नहीं करते थे, बल्कि नए समाजसेवी और सामाजिक कार्यकर्ता तैयार करने में भी विश्वास रखते थे।
उनका मानना था कि लोग अलग-अलग कारणों का हवाला देकर समाजसेवा से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में केवल सामाजिक सेवा के कार्य करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए नए कार्यकर्ताओं को तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है।
डॉ. प्रियंका बिस्सा ने कहा कि वे स्वयं भी सुधाकर कोंडापुरकर से प्रेरणा लेकर समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हुईं और आगे चलकर उन्हें राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि कोंडापुरकर जी का मार्गदर्शन और उनकी प्रेरणा हमेशा उनके साथ रहेगी। उनके शब्दों में, “वे हमेशा ध्रुव तारे की तरह हमें रोशनी देते रहेंगे।”
समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान, मानवीय संवेदनाओं और नई पीढ़ी को सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित करने की उनकी सोच के लिए सुधाकर कोंडापुरकर को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।