रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा आगामी शीतकालीन सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राज्य में फिलहाल UCC से ज्यादा जरूरी मुद्दे महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और कानून-व्यवस्था हैं, जिन पर सरकार को प्राथमिकता से काम करना चाहिए।
दीपक बैज ने कहा कि सरकार जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार, किसानों को राहत और आम लोगों को महंगाई से निजात दिलाने के बजाय सरकार ऐसे मुद्दे उठा रही है, जिनकी फिलहाल कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है।
बैज ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार UCC के जरिए आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करने का रास्ता खोल सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी और यदि उनके अधिकारों पर असर पड़ता है तो पार्टी इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी। उन्होंने सरकार से जनकल्याण और अपराध नियंत्रण पर ध्यान देने की भी मांग की।
UCC को लेकर समिति की पहली बैठक आज
प्रदेश में UCC लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में आज गठित समिति की पहली बैठक आयोजित होगी, जिसमें कानून का प्रारूप तैयार करने पर चर्चा की जाएगी। राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र में UCC विधेयक पेश करना है।
सरकार UCC क्यों लाना चाहती है?
वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण जैसे पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लॉ) लागू हैं। संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे कानून सरल, एकरूप और सभी नागरिकों के लिए समान होगा।
UCC लागू होने पर क्या बदल सकता है?
- विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति के मामलों में एक समान कानून लागू होगा।
- सभी धर्मों के लिए समान वैधानिक नियम होंगे।
- बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी करना अपराध माना जाएगा।
- उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।
- अलग-अलग धार्मिक पर्सनल लॉ की जगह एक समान नागरिक कानून प्रभावी होगा।