नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सावरकर से जुड़ी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ लंबित निजी आपराधिक शिकायत और उससे जुड़ी पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पाया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A के तहत अपराध का संज्ञान लेने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार की आवश्यक पूर्व मंजूरी नहीं ली गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जरूरी मंजूरी के बिना इस मामले में आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकती।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए संबंधित आदेशों को भी रद्द कर दिया।
मंजूरी नहीं थी तो सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया मामला
सुनवाई के दौरान पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पूछा कि क्या अभियोजन के लिए राज्य सरकार से आवश्यक मंजूरी ली गई थी।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई थी। इसके बाद अदालत ने कहा कि IPC की धारा 153A से संबंधित अपराध में संज्ञान लेने से पहले आवश्यक मंजूरी अनिवार्य है।
पीठ ने इसी कानूनी आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया।
किस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ हुई थी कार्रवाई?
यह मामला दिसंबर 2024 में राहुल गांधी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान से जुड़ा था। शिकायतकर्ता अधिवक्ता नृपेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
शिकायत के मुताबिक, राहुल गांधी ने सावरकर को अंग्रेजों का सेवक बताया था और उनके बारे में अंग्रेजों से पेंशन मिलने का दावा किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस तरह की टिप्पणियों से समाज में वैमनस्य पैदा हो सकता है।
इसी आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ IPC की धारा 153A और धारा 505 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
लखनऊ कोर्ट ने जारी किया था समन
दिसंबर 2024 में लखनऊ के अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/ACJM आलोक वर्मा की अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में समन जारी किया था।
शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर अदालत ने माना था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर सामग्री बांटे जाने से समाज में नफरत या वैमनस्य फैलाने की मंशा का सवाल उठता है।
इसके बाद राहुल गांधी ने समन और निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती दी थी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट से नहीं मिली थी राहत
राहुल गांधी ने मामले में राहत के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का भी रुख किया था। हालांकि, 4 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष मामले की कार्यवाही पर रोक भी लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी टिप्पणी पर जताई थी नाराजगी
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की सावरकर को लेकर की गई टिप्पणी पर मौखिक रूप से नाराजगी जताई थी। पीठ ने स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतने की जरूरत पर सवाल उठाए थे।
हालांकि, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले का फैसला टिप्पणी के गुण-दोष के बजाय आवश्यक कानूनी मंजूरी के अभाव के आधार पर किया।
राहुल गांधी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने की पैरवी
सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज पेश हुए।
इस फैसले के साथ सावरकर टिप्पणी से जुड़े इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में चल रही शिकायत, समन और संबंधित मजिस्ट्रेट कार्यवाही समाप्त हो गई है।