Awarapan 2 Review: इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। करीब 19 साल बाद शिवम पंडित के किरदार में इमरान हाशमी की वापसी हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फिल्म पुरानी आवारापन की भावनात्मक कहानी और इमरान के उस खास अंदाज को दोबारा पर्दे पर उतार पाती है?
फिल्म की कहानी पहली फिल्म से जुड़ी हुई है, लेकिन इसका दायरा पहले के मुकाबले बड़ा नजर आता है। एक्शन, इमोशन और इंसानियत के संदेश के साथ फिल्म दर्शकों को आगे की कहानी से जोड़ने की कोशिश करती है।
कैसे आगे बढ़ती है Awarapan 2 की कहानी?
फिल्म की कहानी पहली आवारापन के घटनाक्रम के बाद शुरू होती है। शिवम पंडित कई गोलियां लगने के बावजूद जिंदा बच जाता है और भारत लौटता है। अपनी पुरानी प्रेमिका आलिया की कब्र के पास उसे एक नवजात बच्ची मिलती है।
शिवम बच्ची को उसी अनाथालय में छोड़ता है, जहां उसने खुद अपना बचपन बिताया था। वह उसका नाम भी आलिया रखता है और दूर रहकर उसकी देखभाल करता रहता है।
कुछ समय बाद आलिया को एक दंपति गोद ले लेता है। लेकिन जल्द ही शिवम को पता चलता है कि मामला सामान्य गोद लेने का नहीं, बल्कि मानव तस्करी से जुड़ा है। आलिया को बेच दिया गया है।
अपनी जिंदगी में एक बार आलिया को खो चुके शिवम के लिए इस बच्ची को दोबारा खोना आसान नहीं है। वह इंटरपोल के एक अधिकारी के साथ मिलकर आलिया की तलाश में बैंकॉक पहुंचता है। यहां उसकी भिड़ंत ड्रग्स और मानव तस्करी के नेटवर्क से जुड़े लोगों से होती है।
शिवम को सिर्फ आलिया ही नहीं, बल्कि करीब 40 बच्चों को भी इस गिरोह के चंगुल से बचाना है। इसी दौरान उसकी मुलाकात जारा के किरदार में दिशा पाटनी और सिकंदर के किरदार में अनिरुद्ध रावल से होती है। दूसरी ओर शबाना आजमी का किरदार नफीसा भी कहानी में अहम भूमिका निभाता है।
अब शिवम आलिया को बचा पाता है या नहीं, इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
पुराने शिवम पंडित के अंदाज में लौटे इमरान हाशमी
Awarapan 2 Review की सबसे बड़ी खासियत इमरान हाशमी की वापसी है। शिवम पंडित के किरदार में वह एक बार फिर उसी गैंगस्टर और एक्शन अवतार में दिखाई देते हैं, जिसे दर्शकों ने उनके पुराने दौर में पसंद किया था।
इमरान ने एक्शन के साथ भावनात्मक दृश्यों में भी अच्छा काम किया है। खासकर किरदार की भावनात्मक यात्रा फिल्म को मजबूती देती है।
खलनायक के रूप में पूरब गब्बी प्रभाव छोड़ते हैं, हालांकि उनके किरदार को और ज्यादा खतरनाक तरीके से पेश किया जा सकता था।
दिशा पाटनी के किरदार के पास बहुत ज्यादा करने के लिए नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी भूमिका को ठीक तरीके से निभाया है। वहीं शबाना आजमी की मौजूदगी अपेक्षाकृत सीमित है। फिल्म के अंत में आगे की कहानी के संकेत भी मिलते हैं।
बाल कलाकार मायरा शिवन ने आलिया के किरदार में अच्छा काम किया है। सुविंदर विक्की और वैजयंती कोहली भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में प्रभावी नजर आते हैं।
लेखन ने पहली और दूसरी फिल्म को जोड़ा
फिल्म की कहानी लिखने वाले विशेष भट्ट ने पहली फिल्म की घटनाओं को सीक्वल के साथ जोड़ने की कोशिश अच्छी तरह की है। कहानी कुछ हद तक अनुमानित जरूर लगती है, लेकिन भावनात्मक हिस्से और एक्शन दर्शकों को बांधे रखते हैं।
इंटरवल से पहले फिल्म की पकड़ मजबूत नजर आती है। इंटरवल के बाद कुछ हिस्सों में कहानी थोड़ी धीमी पड़ती है, लेकिन बाद में फिर रफ्तार पकड़ लेती है।
पहली आवारापन का निर्देशन मोहित सूरी ने किया था, जबकि सीक्वल का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है। उन्होंने फिल्म के मूल माहौल और भावनात्मक टोन को काफी हद तक बरकरार रखा है।
पुराने गानों की याद दिलाता है म्यूजिक
फिल्म में ‘तेरा मेरा रिश्ता’ के पुराने सिग्नेचर ट्यून का इस्तेमाल कहानी के साथ किया गया है। इससे पहली फिल्म की याद ताजा होती है।
हालांकि, फिल्म के ज्यादातर नए गाने पहली फिल्म के गानों जैसी छाप छोड़ने में कामयाब नहीं होते। जुबिन नौटियाल की आवाज में ‘लाडो’ जरूर भावनात्मक असर छोड़ता है।
राजू सिंह का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के एक्शन और कहानी के माहौल के साथ अच्छी तरह फिट बैठता है।