वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक दबाव की रणनीति और सख्त होती नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को ईरान की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने वाले एक बड़े अभियान का ऐलान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने या उसके साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश को भी भारी आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इसे अब तक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई बताते हुए ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की बात कही।
ईरान की मदद करने वाले देशों को भी चेतावनी
ट्रंप के मुताबिक, जो भी देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबार, एयरपोर्ट या सरकारी संस्थाओं के जरिए ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद या सहयोग उपलब्ध कराएगा, उसे भी अमेरिका की ओर से कड़े आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि ऐसे देशों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अपने बयान में किसी दूसरे देश का नाम भी नहीं लिया।
अमेरिका बढ़ा रहा ईरान पर आर्थिक दबाव
ट्रंप का यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के करीब एक सप्ताह बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ईरान को ऐसी आर्थिक अलगाव की स्थिति में पहुंचाएगा, जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा।
ईरान के खिलाफ अमेरिका का आर्थिक दबाव ऐसे समय बढ़ रहा है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष को कई महीने हो चुके हैं और तत्काल कूटनीतिक समाधान की संभावना स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी तनाव
मिसाइल हमलों में हालिया कमी के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बना हुआ है। ईरान पर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होने वाली शिपिंग को प्रभावी रूप से बाधित करने का आरोप है।
यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे दोबारा खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की कोशिश भी आगे नहीं बढ़ सकी।
हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान की बात सामने आई थी। हालांकि, ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि बातचीत बंद हो चुकी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी भी की।
अमेरिकी राजनीति पर भी बढ़ रहा दबाव
ईरान के साथ जारी संघर्ष का असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले चुनावों के करीब आने के साथ ट्रंप प्रशासन की युद्ध नीति पर घरेलू स्तर पर राजनीतिक सवाल और दबाव बढ़ सकते हैं।
फिलहाल ट्रंप के नए ऐलान से ईरान के साथ-साथ उन देशों और कंपनियों के लिए भी आर्थिक जोखिम बढ़ने की आशंका है, जो ईरान के साथ वित्तीय या कारोबारी संबंध बनाए रखते हैं।