Temple Electricity Connection को लेकर रायपुर नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। निगम अब शहर के मंदिर परिसरों, सामाजिक भवनों और सामुदायिक परिसरों में लगे उन मोटर पंपों का जोनवार सर्वे करा रहा है, जिनके बिजली खर्च का भार फिलहाल निगम उठा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद ऐसे पंपों के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है।
नगर निगम का कहना है कि जिन सामाजिक या सामुदायिक परिसरों का संचालन संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जाता है, वहां पानी और बिजली के खर्च की जिम्मेदारी भी उन्हीं संस्थाओं को उठानी होगी। इस फैसले का उद्देश्य निगम पर पड़ने वाले अतिरिक्त बिजली खर्च को कम करना बताया जा रहा है।
जोन स्तर पर शुरू किया गया मोटर पंपों का सर्वे

नगर निगम के जल कार्य विभाग ने सभी जोन के जल विभाग के इंजीनियरों को ऐसे परिसरों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। सर्वे में यह पता लगाया जा रहा है कि शहर के किन-किन इलाकों में सामाजिक भवनों, सामुदायिक परिसरों, मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निगम के मोटर पंपों से पानी की आपूर्ति हो रही है।
इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इन मोटर पंपों का बिजली बिल किसके द्वारा चुकाया जा रहा है। निगम के अनुसार, कई स्थानों पर पंपों के संचालन का खर्च नगर निगम को उठाना पड़ रहा है। अब ऐसे सभी पंपों को सूचीबद्ध किया जा रहा है।
संबंधित संस्थाओं को उठाना होगा बिजली-पानी का खर्च

नगर निगम की योजना के अनुसार, सर्वे पूरा होने के बाद उन परिसरों की पहचान की जाएगी जहां पानी की व्यवस्था के लिए निगम के मोटर पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यदि संबंधित संस्था या परिसर का संचालन करने वाला संगठन पानी और बिजली के खर्च की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार होता है, तो व्यवस्था उसी आधार पर आगे बढ़ाई जा सकती है। वहीं, खर्च की जिम्मेदारी नहीं लेने वाले परिसरों के मोटर पंपों के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है।
इस तरह Temple Electricity Connection से जुड़ा यह फैसला केवल मंदिर परिसरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सामुदायिक भवनों को भी इसके दायरे में रखा गया है।
निजी कॉलोनियों का भी होगा सर्वे

नगर निगम निजी आवासीय कॉलोनियों में पानी की व्यवस्था को लेकर भी जानकारी जुटा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कई कॉलोनियों में बिल्डरों ने लेआउट तैयार करते समय पेयजल की व्यवस्था खुद करने का प्रावधान रखा था।
इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों से ऐसी कॉलोनियों के रहवासी नगर निगम से पानी की सप्लाई की मांग कर रहे हैं। निगम अब ऐसी कॉलोनियों की सूची तैयार कर रहा है और यह देखा जा रहा है कि वहां पानी की मौजूदा व्यवस्था क्या है तथा किन क्षेत्रों से निगम की जलापूर्ति की मांग की जा रही है।
मुक्तिधामों के पंपों पर अभी फैसला नहीं
हालांकि, नगर निगम ने मुक्तिधामों को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। शहर के कई मुक्तिधामों में बोरवेल या पाइपलाइन के माध्यम से पानी की व्यवस्था की जाती है।
इन स्थानों पर लगे मोटर पंपों का बिजली कनेक्शन काटा जाएगा या वहां पानी और बिजली की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी, इस पर अभी फैसला होना बाकी है। जल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मुक्तिधामों को लेकर अलग से निर्णय लिया जा सकता है।
तालाबों में पानी भरने वाले बोरवेल भी जांच के दायरे में
मंदिरों और सामाजिक भवनों के अलावा तालाबों में पानी भरने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मोटर पंपों का भी सर्वे कराया जा रहा है।
नगर निगम के अनुसार, डगनिया तालाब और रामनगर तालाब के किनारे बोरवेल लगाए गए हैं। इन बोरवेल के माध्यम से तालाबों में पानी भरा जाता है और मोटर पंप लगातार संचालित किए जाते हैं।
अब इन पंपों के बिजली कनेक्शन को लेकर भी कार्रवाई की तैयारी है। इस संबंध में जल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी गई है।
शहर में 2200 से ज्यादा मोटर पंप
रायपुर नगर निगम शहर में 2200 से अधिक मोटर पंपों के माध्यम से जलापूर्ति करता है। इनमें विभिन्न इलाकों में पानी की सप्लाई करने वाले पंपों के साथ सामाजिक और सामुदायिक भवनों तथा मंदिर परिसरों में लगे बोरवेल के पंप भी शामिल हैं।
इन पंपों के संचालन में होने वाला बिजली खर्च निगम के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय भार बनता है। इसी वजह से अब पंपों का सर्वे कर यह तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है कि किन स्थानों पर निगम का खर्च जारी रहेगा और किन जगहों पर संबंधित संस्था को खर्च उठाना होगा।
जल विभाग के अधिकारी ने क्या कहा?
नगर निगम के जल विभाग के कार्यपालन अभियंता नरसिंह फरेन्द्र के अनुसार, सभी जोन में परिसरों का सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर मोटर पंपों का बिजली बिल नगर निगम को भरना पड़ता है और अब ऐसे खर्च को कम करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारी के अनुसार, मुक्तिधामों को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सर्वे पूरा होने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल रायपुर नगर निगम की ओर से Temple Electricity Connection से जुड़े परिसरों की पहचान और सर्वे का काम चल रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने मोटर पंप निगम के खर्च पर चल रहे हैं और किन परिसरों को आगे अपनी बिजली-पानी की व्यवस्था खुद करनी होगी।
निगम का यह कदम शहर में जलापूर्ति से जुड़े खर्च की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। वहीं, मंदिरों, सामाजिक भवनों, सामुदायिक परिसरों और अन्य स्थानों पर लगे पंपों को लेकर अंतिम कार्रवाई सर्वे और संबंधित विभाग की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।