Amit Shah in Hyderabad: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में बीजेपी की पदयात्रा के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल और हैदराबाद रियासत के भारत में विलय को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर सरदार पटेल ने उस समय हैदराबाद के निजाम को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर नहीं किया होता, तो आज हैदराबाद भारत का हिस्सा नहीं होता। शाह ने इस दौरान सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कांग्रेस और विपक्ष पर भी निशाना साधा।
अमित शाह हैदराबाद में बीजेपी की राष्ट्रव्यापी पदयात्रा ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ यात्रा’ में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने हैदराबाद के भारत में विलय के ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख किया। इसके साथ ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित वोट चोरी के आरोपों पर भी विपक्ष को जवाब दिया।
Amit Shah in Hyderabad: सरदार पटेल को लेकर क्या बोले गृह मंत्री?

हैदराबाद में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने निजाम को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया और हैदराबाद को भारत का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय पटेल ने यह कदम नहीं उठाया होता, तो हैदराबाद की स्थिति आज अलग हो सकती थी।
शाह ने हैदराबाद की धरती पर मौजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं और पदयात्रा में शामिल लोगों का अभिवादन भी किया। अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने भाग्यलक्ष्मी देवी को नमन किया और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की।
क्या है हैदराबाद के भारत में विलय का इतिहास?

हैदराबाद रियासत का भारत में विलय आजादी के बाद देश के एकीकरण की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। वर्ष 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन उस समय कई रियासतों के भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा अलग रहने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
हैदराबाद के निजाम ने शुरुआत में भारतीय संघ में शामिल होने से दूरी बनाए रखी थी। इसके बाद सितंबर 1948 में भारतीय सेना ने हैदराबाद रियासत में सैन्य कार्रवाई की। इस अभियान को ‘ऑपरेशन पोलो’ के नाम से जाना जाता है।
इस कार्रवाई के बाद निजाम ने आत्मसमर्पण किया और हैदराबाद रियासत का भारत में विलय हुआ। इस पूरे घटनाक्रम में तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
SIR और वोट चोरी के आरोपों पर विपक्ष को जवाब देने निकली बीजेपी

हैदराबाद में आयोजित पदयात्रा का नाम ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ यात्रा’ रखा गया था। बीजेपी ने इसे कांग्रेस और INDIA गठबंधन की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा कथित वोट चोरी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के जवाब में आयोजित किया।
यह पदयात्रा निजाम कॉलेज के सामने से शुरू होकर मोजामजाही मार्केट तक पहुंची। कार्यक्रम में अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए और चुनावों में बीजेपी की जीत को जनता के समर्थन से जोड़कर पेश किया।
यात्रा से पहले शाह ने चारमीनार के पास स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने पदयात्रा में हिस्सा लिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर अमित शाह का निशाना
अपने भाषण में अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी के उन आरोपों का जवाब दिया, जिनमें चुनावी नतीजों को SIR और वोट चोरी से जोड़ने की बात कही जा रही है।
शाह ने सवाल उठाया कि यदि बीजेपी की जीत SIR की वजह से हुई है, तो वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी की जीत को किस आधार पर देखा जाएगा? उन्होंने कहा कि क्या उन चुनावों के दौरान भी SIR हुआ था?
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में दावा किया कि नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने वोट देकर प्रधानमंत्री बनाया। उनके मुताबिक, बीजेपी की चुनावी जीत का आधार जनता का समर्थन है, न कि SIR।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर बीजेपी तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस जारी है।
हैदराबाद में बीजेपी की पदयात्रा का क्या था उद्देश्य?
बीजेपी की इस पदयात्रा के जरिए पार्टी ने SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने की कोशिश की। कार्यक्रम में सरदार पटेल के योगदान और हैदराबाद के भारत में विलय का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
अमित शाह के संबोधन में एक ओर देश के ऐतिहासिक एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका का जिक्र रहा, तो दूसरी ओर मौजूदा राजनीतिक विवादों पर कांग्रेस को जवाब दिया गया।
हैदराबाद में दिए गए इस बयान के बाद सरदार पटेल, निजाम और ऑपरेशन पोलो का ऐतिहासिक प्रसंग एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। वहीं, SIR और वोट चोरी को लेकर बीजेपी तथा विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप भी इस कार्यक्रम के जरिए सामने आए।