Bhupesh Baghel on Nishikant Dubey: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के जवाहरलाल नेहरू को लेकर दिए गए बयान पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में बघेल ने दुबे के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘कितना बड़ा पागल आदमी है।’ उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू के समय बांग्लादेश बना ही नहीं था, बल्कि उसका गठन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते 1971 में हुआ था।
भूपेश बघेल ने भाजपा सांसद संतोष पांडेय के कांग्रेस नेतृत्व पर दिए गए बयान को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तैयारियों को लेकर भी सवाल उठाए। इस तरह नेहरू, नोआखाली और बांग्लादेश से शुरू हुई राजनीतिक बहस में प्रदेश के स्थानीय मुद्दे भी शामिल हो गए।
निशिकांत दुबे के बयान पर भूपेश बघेल का तीखा पलटवार

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने हाल ही में जवाहरलाल नेहरू और देश के विभाजन से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू प्रधानमंत्री बनने के लिए जल्दबाजी में थे और उनके फैसलों के कारण भारत के कुछ क्षेत्र देश से अलग हो गए।
दुबे के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने उनके ऐतिहासिक दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का गठन नेहरू के कार्यकाल में नहीं हुआ था। बांग्लादेश 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व के दौरान अस्तित्व में आया था।
बघेल ने इसी तथ्य का उल्लेख करते हुए दुबे की टिप्पणी को लेकर नाराजगी जताई। उनका यह बयान भाजपा और कांग्रेस के बीच इतिहास तथा देश के विभाजन से जुड़े मुद्दों पर जारी राजनीतिक टकराव को और तेज करता दिखाई दिया।
नोआखाली हिंसा और नेहरू को लेकर क्या बोले थे निशिकांत दुबे?

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने बयान में 1946 की नोआखाली हिंसा का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया कि 15 अक्टूबर 1946 को हिंदू बहुल इलाके नोआखाली में बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार हुआ था और एक ही दिन में करीब 10 हजार लोग मारे गए थे।
दुबे ने आरोप लगाया कि उस समय जवाहरलाल नेहरू ने नोआखाली जाने के बजाय मुस्लिम लीग को अंतरिम सरकार में शामिल करने पर ध्यान दिया। उन्होंने यह भी कहा कि नेहरू प्रधानमंत्री बनने के लिए बेहद आतुर थे और उनके फैसलों के कारण देश को नुकसान उठाना पड़ा।
भाजपा सांसद ने नोआखाली, सिलहट और चटगांव जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों को भारत में वापस शामिल करने का समय आ गया है। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का उदाहरण देते हुए इस मुद्दे को देश के विभाजन और तत्कालीन राजनीतिक फैसलों से जोड़ा।
हालांकि, नोआखाली हिंसा में मृतकों की संख्या और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर दुबे ने जो आंकड़े और आरोप रखे हैं, उन्हें उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन ऐतिहासिक दावों पर राजनीतिक बहस के बीच तथ्यात्मक संदर्भ और प्रमाणों का महत्व भी बना हुआ है।
संतोष पांडेय के बयान पर भी भाजपा को घेरा
मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने भाजपा सांसद संतोष पांडेय की टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई। संतोष पांडेय ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी को ‘गांधारी’ और कांग्रेस नेताओं की तुलना ‘दुर्योधन-दुशासन’ से की थी।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘हम उनको पागल कर देंगे।’ बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि अब यह बात सच साबित होती दिखाई दे रही है।
कांग्रेस नेता की इस टिप्पणी से साफ है कि पार्टी भाजपा सांसदों की ओर से लगातार किए जा रहे व्यक्तिगत और राजनीतिक हमलों का जवाब देने के मूड में है। वहीं, भाजपा नेताओं की ओर से कांग्रेस नेतृत्व पर हमले जारी हैं।
ट्रंप के फोन और सीजफायर पर भी उठाए सवाल

भूपेश बघेल ने बातचीत के दौरान अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि पहले बदला नहीं लेने की बात कही गई और फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आने के बाद सीजफायर हो गया।
बघेल ने तंज भरे अंदाज में सवाल किया कि क्या ‘फादरलैंड’ से फोन आने के कारण ऑपरेशन रोकना पड़ा? उनके इस बयान के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश और सुरक्षा नीति पर निशाना साधा।
यह टिप्पणी बघेल की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा रही। उन्होंने केंद्र सरकार से जुड़े फैसलों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए भाजपा को घेरने की कोशिश की।
धान खरीदी को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार पर निशाना
राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दों के साथ भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तैयारियों को लेकर भी राज्य सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक नवंबर से धान खरीदी शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार की ओर से पर्याप्त और मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई है।
बघेल ने पटवारियों की हड़ताल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे किसानों को परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक, धान खरीदी से जुड़ी तैयारियों में देरी और प्रशासनिक अव्यवस्था का असर सीधे किसानों पर पड़ सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत साफ नहीं है और किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। हालांकि, धान खरीदी की व्यवस्थाओं और तैयारियों को लेकर बघेल ने जो सवाल उठाए, वे उनके राजनीतिक आरोप हैं।
कौन हैं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे?
निशिकांत दुबे झारखंड की गोड्डा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। उनका जन्म 28 जनवरी 1969 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। उन्होंने भागलपुर के मारवाड़ी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने MBA और राजस्थान की प्रताप यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट में पीएचडी की।
राजनीति में आने से पहले दुबे कॉरपोरेट क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने एस्सार ग्रुप में निदेशक के रूप में काम किया। साल 2009 में उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र छोड़कर भाजपा के टिकट पर गोड्डा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
इसके बाद 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। इस तरह वे लगातार चार बार गोड्डा से लोकसभा सदस्य चुने गए हैं।
महुआ मोइत्रा मामले से भी चर्चा में आए थे दुबे
निशिकांत दुबे का नाम कई राजनीतिक विवादों में भी सामने आ चुका है। साल 2023 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर संसद में सवाल पूछने के बदले कारोबारी से पैसे और अन्य लाभ लेने के आरोप लगाए थे। इस मामले को ‘कैश फॉर क्वेरी’ विवाद के नाम से जाना गया।
दुबे की शिकायत के बाद लोकसभा की आचार समिति ने मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। मोइत्रा ने आरोपों और कार्रवाई का विरोध किया था।
निशिकांत दुबे संसद में अपने आक्रामक भाषणों और विपक्षी नेताओं पर तीखी टिप्पणियों के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं। नेहरू और देश के विभाजन को लेकर दिए गए उनके हालिया बयान ने एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
इतिहास के मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस में बढ़ी जुबानी जंग
निशिकांत दुबे के बयान और भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर भाजपा सांसद ने नेहरू के फैसलों और विभाजन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर बघेल ने उनके ऐतिहासिक दावों पर पलटवार किया है।
इस राजनीतिक विवाद में सोनिया गांधी पर संतोष पांडेय की टिप्पणी, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और छत्तीसगढ़ में धान खरीदी जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं। फिलहाल भूपेश बघेल के तीखे बयान के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।