रायपुर: कभी माओवादियों के गढ़ माने जाने वाले छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके के 92 गांवों में आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त को तिरंगा फहराया जाएगा। इनमें बीजापुर जिले के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के नौ गांव शामिल हैं। पहले इन इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव था लेकिन नक्सलवाद खत्म होने के बाद यहां पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 92 गांवों में इस बार पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाएगा। नक्सलवाद के खौफ के कारण लंबे समय से इन इलाकों में लोग आजादी का पर्व नहीं मना पाते थे। अब हालात बदलने के साथ इन गांवों में 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाएगा।
डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इन इलाकों में अब भारत का संविधान और लोकतंत्र अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कभी नक्सलियों के डर से जहां स्वतंत्रता दिवस का उत्सव नहीं मनाया जाता था, वहीं अब ग्रामीण तिरंगा फहराकर आजादी का पर्व मनाएंगे।
इस बात की जानकारी राज्य के डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने की है। विजय शर्मा ने कहा कि 31 मार्च को राज्य में हथियारबंद माओवादियों के सफाए के बाद यह पहला राष्ट्रीय त्योहार होगा। उन्होंने कहा, ’15 अगस्त को बस्तर में ऐसा कोई गांव नहीं होगा जहां तिरंगा नहीं फहराया जाएगा और जहां भारत का संविधान लागू न हो।’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय त्योहार नागरिकों में देशभक्ति की भावना जगाते हैं और सरकार राष्ट्रवाद की इस भावना को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए पूरे बस्तर में एक अभूतपूर्व अभियान चला रही है।
जिले के कितने गांव
विजय शर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद बस्तर के कई दूर-दराज़ के गांवों में 2024 से 2026 के बीच पांच बार स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों के दौरान तिरंगा फहराया गया है जबकि इन इलाकों में आज़ादी के बाद कभी राष्ट्रध्वज नहीं फहराया गया था। उन्होंने कहा, ‘इस स्वतंत्रता दिवस पर बीजापुर के 33 गांवों, सुकमा के 50 गांवों और नारायणपुर के नौ गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा।’
बस्तर को विख्यात बनाना है
विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि बस्तर के जो क्षेत्र पूर्व में नक्सली हिंसा और बड़ी घटनाओं के कारण ‘कुख्यात’ हो गए थे, अब उन्हें विकास और राष्ट्रीय धारा से जोड़कर ‘विख्यात’ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुवर्ती, सिलगेर, टेकालगुडम, रानीबोदली और दरभा जैसे दूर-दराज़ के इलाकों को तिरंगा यात्रा के जरिए जोड़ा जाएगा।
तिरंगा यात्रा में शामिल हो रहे हैं युवा
उन्होंने कहा कि इस कैंपेन के तहत भाजपा और भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता, स्थानीय लोग और युवा बस्तर में मोटरसाइकिल रैलियों में हिस्सा लेंगे। युवा मोर्चा और पार्टी के कार्यकर्ता उन बहादुर सैनिकों के घर जा रहे हैं जिन्होंने बस्तर में नक्सल विरोधी और शांति बहाली के अभियानों के दौरान अपनी जान दी थी।
उन्होंने बताया कि 15 अगस्त के मौके पर बस्तर क्षेत्र में स्कूलों, प्रमुख चौराहों और सामुदायिक भवनों समेत पांच सौ अधिक जगहों का नाम देश और छत्तीसगढ़ के शहीदों के नाम पर रखा जाएगा।
पहले फहराए जाते थे लाल और काले झंडे
इस साल गणतंत्र दिवस पर, माओवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र के 41 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया था। इन गांवों में बीजापुर के 13, नारायणपुर के 18 और सुकमा के 10 गांव शामिल थे। कुछ साल पहले तक, प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन बस्तर के अंदरूनी इलाकों में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों के बहिष्कार का आह्वान करता था और इन दो दिनों में विरोध जताने के लिए लाल और काले झंडे फहराता था।