भूपेश बघेल से मिले नक्सल मामलों में जेल में बंद आदिवासियों के परिजन, कानूनी सहायता का मिला भरोसा
रायपुर। में सोमवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बीजापुर जिले के कई आदिवासी परिवारों ने मुलाकात की। ये परिवार नक्सल मामलों में जेल में बंद अपने परिजनों की रिहाई और न्याय की मांग को लेकर उनके निवास पहुंचे थे। इस दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी भी मौजूद रहे। मुलाकात के दौरान परिवारों ने अपनी आर्थिक परेशानियों, लंबित मामलों और न्यायिक प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों को विस्तार से साझा किया।
परिजनों ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य अलग-अलग जेलों में बंद हैं और अधिकांश मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया काफी धीमी है। उनका कहना है कि वे आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि अच्छे वकील कर सकें या नियमित रूप से अदालतों में पैरवी करा सकें। कई परिवारों ने यह भी कहा कि अलग-अलग जेलों में बंद होने के कारण अपने परिजनों से मुलाकात करना भी बेहद कठिन हो गया है। लंबी दूरी तय करने और यात्रा का खर्च उठाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
मुलाकात के दौरान कई परिजन भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके पास अपने परिजनों का केस लड़ने तक के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। उनका आरोप है कि कई ऐसे लोग, जिन पर गंभीर नक्सली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे, उन्हें रिहा कर दिया गया, जबकि छोटे मामलों में नाम आने वाले गरीब आदिवासी और ग्रामीण अब भी जेलों में बंद हैं। परिवारों का कहना है कि इस स्थिति ने उनके बीच असमानता और अन्याय की भावना पैदा की है।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बड़े नक्सली नेताओं को रिहा किए जाने के साथ उन्हें आर्थिक सहायता मिलने जैसी बातें सामने आईं, जबकि गरीब और कमजोर वर्ग के लोग अपने कानूनी अधिकारों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों के परिवार के सदस्य वर्षों से जेल में हैं, उनके लिए आजीविका चलाना भी मुश्किल हो गया है। कई परिवार खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं, लेकिन परिवार के कमाने वाले सदस्य के जेल में होने से आर्थिक संकट और गहरा गया है।
भूपेश बघेल ने परिवारों की बात ध्यान से सुनी और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जरूरतमंद परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी। इसके लिए योग्य वकीलों की व्यवस्था की जाएगी ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी अपने मामलों की प्रभावी पैरवी कर सकें। उन्होंने कहा कि न्याय सभी का अधिकार है और किसी भी व्यक्ति को केवल आर्थिक कमजोरी के कारण न्याय से वंचित नहीं होना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन मामलों में जांच और चार्जशीट दाखिल होने में देरी हो रही है, वहां प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि प्रत्येक मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और अलग-अलग जांच होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से जेल में न रहना पड़े। उन्होंने कहा कि हर मामले का मूल्यांकन उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए, न कि एक सामान्य दृष्टिकोण से।
भूपेश बघेल ने कहा कि परिवारों की मुख्य शिकायत यह है कि बड़े नक्सली नेताओं के साथ अलग व्यवहार किया गया, जबकि गरीब आदिवासी और सीधे-सादे ग्रामीण आज भी जेलों में बंद हैं। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस इन परिवारों की कानूनी लड़ाई में सहयोग करेगी और जरूरत पड़ने पर वकीलों की व्यवस्था भी करेगी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई और न्याय पाने का पूरा अधिकार है।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। आदिवासी परिवारों की ओर से उठाए गए मुद्दों ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि लंबित मामलों की समयबद्ध सुनवाई, कानूनी सहायता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। अब देखना होगा कि इन परिवारों की मांगों और कानूनी सहायता के आश्वासन पर आगे क्या कार्रवाई होती है।