रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। रविवार को कांग्रेस विधायक दल की एक अहम बैठक हुई, जिसमें पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हुए। बैठक में विधानसभा सत्र की रणनीति पर चर्चा की गई और सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया गया।
कांग्रेस विधायक दल की यह बैठक नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के आवास पर हुई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे। बैठक में आने वाले विधानसभा सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि प्रदेश की जनता का भरोसा मौजूदा सरकार से उठ चुका है। इसी को देखते हुए कांग्रेस विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही है। उन्होंने कहा कि भले ही विधानसभा का मानसून सत्र सिर्फ पांच दिनों का है, लेकिन कांग्रेस हर जरूरी मुद्दे को सदन में मजबूती के साथ उठाएगी।
चरणदास महंत ने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रखे। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर भी संघर्ष जारी रखेगी।
बैठक में कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की और तय किया कि किन विषयों को सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके बाद विधायक दल की बैठक में अंतिम रणनीति को मंजूरी दी गई।
नकटी गांव का मामला भी विधानसभा में उठाने की तैयारी
कांग्रेस ने नकटी गांव में हुई अतिक्रमण की कार्रवाई के मुद्दे को भी विधानसभा में उठाने का फैसला किया है। पार्टी इस मामले को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि नकटी गांव के मामले में कांग्रेस हर संभव लड़ाई लड़ेगी और इस मुद्दे को सदन में पूरी मजबूती के साथ रखा जाएगा।
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला जनता से जुड़ा हुआ है और सरकार को इस पर जवाब देना होगा। पार्टी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।
विधानसभा में पूछे जाएंगे 1033 सवाल
इस बार छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में विधायकों ने बड़ी संख्या में सवाल लगाए हैं। जानकारी के मुताबिक, कुल 1033 सवाल विधानसभा में लगाए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियम के अनुसार अधिकतम 20-20 सवाल पूछे हैं।
खास बात यह है कि सवाल पूछने वालों में सिर्फ विपक्षी विधायक ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं। इससे साफ है कि विधानसभा सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
कुल मिलाकर मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस ने जहां सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है, वहीं सरकार भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है। अब देखना होगा कि पांच दिन के इस छोटे सत्र में किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा हंगामा होता है और सरकार-विपक्ष के बीच सियासी मुकाबला कितना तेज होता है।