MP Fake IAS IPS: मध्य प्रदेश में फर्जी अधिकारियों के एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी अफसर होने का झूठा रुतबा दिखाकर लोगों को प्रभावित किया और कथित तौर पर लाखों-करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। पुलिस ने ऐसे पांच हाई-प्रोफाइल फर्जी IAS-IPS अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।
इन आरोपियों ने कहीं नकली पहचान का सहारा लिया तो कहीं फर्जी नियुक्ति पत्र और सरकारी पहचान से अपना रसूख कायम करने की कोशिश की। इनके तौर-तरीके इतने शातिर बताए जा रहे हैं कि आम लोगों के साथ-साथ पुलिस, प्रशासन और बड़े होटल तक इनके झांसे में आ गए।
फर्जी अफसर बनने के लिए अपनाए अलग-अलग तरीके
फर्जी अधिकारियों ने खुद को प्रभावशाली सरकारी अफसर साबित करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए। किसी ने गाड़ी पर ‘भारत सरकार’ की नेमप्लेट लगाकर अपना रुतबा दिखाया तो किसी ने फर्जी आईडी और नियुक्ति पत्र का इस्तेमाल किया।

कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेजों में इतनी बड़ी गलतियां थीं कि उनके आधार पर ही आरोपियों की पोल खुल गई। वहीं, कुछ आरोपी अपने VIP अंदाज और सरकारी अधिकारी होने के दावे के जरिए लोगों को प्रभावित करते रहे।
स्पेलिंग मिस्टेक ने खोली पोल
फर्जीवाड़े के इन मामलों में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि कुछ जालसाजों के फर्जी दस्तावेजों में स्पेलिंग की गलतियां थीं। बाद में दस्तावेजों के क्रॉस-वेरिफिकेशन के दौरान इन गलतियों ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों का शक बढ़ाया।
यानी जिस फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान के जरिए आरोपी खुद को बड़ा अधिकारी साबित करना चाहते थे, वही दस्तावेज उनके लिए मुसीबत बन गए।
चाय की टपरी से लेकर फाइव-स्टार होटल तक रुतबा
इन कथित फर्जी अधिकारियों की कहानी सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं थी। बताया जा रहा है कि इनके VIP रुतबे का असर चाय की दुकानों से लेकर बड़े होटलों के सुइट तक दिखाई देता था।
आरोप है कि नकली सरकारी पहचान और ऊंचे पद का दावा कर ये लोग लोगों पर प्रभाव जमाते थे। कई बार सरकारी अधिकारी होने का रुतबा दिखाकर सुविधाएं हासिल करने और लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की गई।
इनके फर्जीवाड़े का दायरा दिल्ली के मुखर्जी नगर से लेकर मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के प्रोटोकॉल सेल तक पहुंचने की बात सामने आई है।
सरकारी नौकरी और VIP कल्चर का लालच
फर्जी अधिकारियों के इस खेल में लोगों को सरकारी नौकरी, ऊंचे पद और VIP सुविधाओं का लालच दिए जाने की बात भी सामने आई है।

नकली IAS-IPS अधिकारी बनकर आरोपी खुद को ऐसा प्रभावशाली व्यक्ति पेश करते थे, जिसके जरिए किसी की नौकरी लग सकती है या सरकारी काम आसानी से कराया जा सकता है। इसी तरह के दावों के जरिए लोगों को प्रभावित कर ठगी किए जाने का आरोप है।
पुलिस और प्रशासन के लिए भी चुनौती
MP Fake IAS IPS मामलों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर नकली पहचान के सहारे कोई व्यक्ति इतने लंबे समय तक सरकारी अधिकारी होने का दावा कैसे करता रहा।
फर्जी दस्तावेज, सरकारी पद का नाम, VIP प्रोटोकॉल और प्रभावशाली व्यवहार के कारण ऐसे जालसाज कई बार सामान्य जांच से बच निकलते हैं। ऐसे मामलों में पहचान और दस्तावेजों का समय पर क्रॉस-वेरिफिकेशन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
पांच फर्जी अधिकारियों की गिरफ्तारी से खुला बड़ा खेल
मध्य प्रदेश में गिरफ्तार किए गए इन पांच आरोपियों के मामले ने फर्जी सरकारी अधिकारियों के जरिए चलाए जा रहे ठगी के खेल को सामने ला दिया है। नकली IAS-IPS की पहचान, फर्जी दस्तावेज और VIP रुतबे का इस्तेमाल इस पूरे नेटवर्क के प्रमुख तौर-तरीकों के रूप में सामने आए हैं।
पुलिस की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।

- मध्य प्रदेश में 5 कथित फर्जी IAS-IPS अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया।
- आरोपियों ने नकली पहचान और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी अफसर होने का दावा किया।
- किसी ने ‘भारत सरकार’ की नेमप्लेट का इस्तेमाल किया तो कुछ फर्जी दस्तावेजों में स्पेलिंग की गलतियां सामने आईं।
- सरकारी नौकरी और VIP रुतबे का लालच देकर लोगों को कथित तौर पर ठगने का आरोप है।
- मामले की कड़ियां दिल्ली के मुखर्जी नगर से उज्जैन के महाकाल प्रोटोकॉल सेल तक जुड़ने की बात सामने आई है।