पिता नहीं रहे तो लोग बोले लड़की को घर में रखो, वो मोमबत्ती की लौ में पढ़ी, IPS बन लिखी तकदीर

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Ilma Afroz IPS : कहते हैं कि सपने उन्हीं के पूरे होते हैं, जो मुश्किलों के सामने हार नहीं मानते। कुछ ऐसी कहानी है इल्मा अफरोज की, जिन्होंने अंधरों में भी अपने भविष्य की रोशनी तलाश ली। कम उम्र में पिता को खोने के बाद लोगों ने घर तक सीमित रहने की सलाह दी लेकिन उन्होंने अपने हौंसला मजबूत रखा। संघर्ष के दिनों में मोमबत्ती की लौ में पढ़ाई करके सपनों को जिंदा रखा। UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की और IPS अधिकारी बनकर अपनी तकदीर लिखी। इस सक्सेस स्टोरी में जानते हैं उनका संघर्ष से सफलता का सफर, जो यह बताता है कि मेहनत और जुनून से कुछ भी पाया जा सकता है।

पिता के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, संघर्ष में बीता बचपन

इल्मा अफरोज उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के एक कस्बे की रहने वाली हैं। एक वीडियो में वह बताती हैं कि उनका जीवन बचपन से ही संघर्षभरा रहा। जब वह केवल 14 साल की थीं तो कैंसर के कारण उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और घर चलाने की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई थी।

मोमबत्ती की लौ में की पढ़ाई, स्काॅलरशिप से मिला सहारा

इल्मा भी ने गरीबी और मुश्किलों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी। जहां दूसरे बच्चे कोचिंग और अच्छी सुविधाओं में पढ़ते थे, वहीं इल्मा मोमबत्ती की रोशनी में घंटों मेहनत करती थीं। कई बार घर में खाने तक की परेशानी होती थी, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज में दाखिला लिया। पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें स्कॉलरशिप मिली और आगे की शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जाने का मौका मिला।

लोगों ने कहा- ‘लड़की है, क्या कर लेगी, घर में रखों’, मां का साथ

वह बताती हैं कि पिता के जाने के बाद पढ़ाई और घर के हालातों को लेकर संघर्ष था और लोग कहते थे कि लड़की है क्या कर लेगी, घर में रखो लेकिन उनकी मां ने हार नहीं मानी। यह सब सुनते-सुनते उन्होंने आगे बढ़ने की ठान ली। जरूरत पड़ने पर खेतों में भी काम किया और कठिन हालातों में भी पढ़ाई जारी रखी। इस दौरान उनकी मां ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया और पढ़ाई पूरी कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया।

विदेश में नौकरी छोड़ी, 2017 में पास की UPSC परीक्षा

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद इल्मा अफरोज को विदेश में नौकरी के अच्छे अवसर मिले। इसके बावजूद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। उनका सपना सिर्फ अच्छी नौकरी पाना नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए काम करना था। भारत लौटकर उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की। कठिन मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने साल 2017 में सिविल सेवा परीक्षा पास कर अपने सपने को सच कर दिखाया।

IPS बनकर बदली अपनी और परिवार की तकदीर

UPSC परीक्षा में इल्मा अफरोज ने ऑल इंडिया 217वीं रैंक हासिल की और IPS अधिकारी बनीं। साल 2018 में उन्हें हिमाचल कैडर मिला। एक छोटे गांव से निकलकर IPS बनने तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। आज इल्मा अफरोज देश की उन बेटियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने संघर्ष से सफलता तक अपनी अलग पहचान बनाई।

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