Bhupesh Baghel Supreme Court: भूपेश बघेल की याचिका पर SC ने हस्तक्षेप से किया इनकार, पूछा- आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई? जानें पूरा मामला

Spread the love

Bhupesh Baghel Supreme Court मामले में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका की कार्यवाही में फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। यह चुनाव याचिका भाजपा नेता विजय बघेल ने दाखिल की है।

भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने दलील दी कि विजय बघेल की चुनाव याचिका जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिन की समय-सीमा के भीतर वैध तरीके से दाखिल नहीं हुई थी। इस आधार पर उन्होंने याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस दौरान यह सवाल भी उठाया कि समय-सीमा से जुड़ी आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई थी।

45 दिन की समय-सीमा पर क्या है विवाद?

मामला 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 17 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार, पाटन सीट का चुनाव परिणाम 3 दिसंबर 2023 को घोषित हुआ था। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 81(1) के तहत चुनाव याचिका दायर करने की 45 दिन की अवधि 17 जनवरी 2024 को समाप्त हुई थी।

Bhupesh Baghel Supreme Court: भूपेश बघेल की याचिका पर SC ने हस्तक्षेप से किया इनकार, पूछा- आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई? जानें पूरा मामला

भूपेश बघेल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि विजय बघेल के हलफनामे पर 22 जनवरी 2024 की तारीख दर्ज है। कपिल सिब्बल का तर्क था कि यदि जरूरी हलफनामा निर्धारित अवधि के बाद का है तो चुनाव याचिका की वैध प्रस्तुति पर सवाल उठता है।

सिब्बल ने अदालत में यह भी कहा कि समय-सीमा से जुड़ा मुद्दा मामले की maintainability से संबंधित है और इसे किसी भी चरण में उठाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई?

सुनवाई के दौरान पीठ ने समय-सीमा की आपत्ति को लेकर सवाल किया कि इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। इस पर कपिल सिब्बल ने अपनी ओर से हुई देरी को स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित हलफनामा पहले से रिकॉर्ड पर मौजूद है।

सिब्बल ने हलफनामे की तारीख का हवाला देते हुए कहा कि जब चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद 45 दिन की अवधि 17 जनवरी को समाप्त हो गई थी, तो 22 जनवरी की तारीख वाला हलफनामा सवाल खड़ा करता है।

हालांकि, अदालत ने यह संकेत दिया कि केवल तारीख के आधार पर मामले का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। संबंधित तारीखों और उनके कानूनी प्रभाव को रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर देखा जाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अभी क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि समय-सीमा से जुड़े मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट कानून के अनुसार विचार कर सकता है। यानी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से चुनाव याचिका के मूल आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 28 सितंबर 2026 की सूची में Bhupesh Baghel vs Vijay Baghel, SLP(C) No. 33790/2026 भी दर्ज है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में क्या चल रहा है?

इसी मामले से जुड़े 17 सितंबर 2026 के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, विजय बघेल की चुनाव याचिका को लेकर भूपेश बघेल की ओर से limitation और याचिका की वैध प्रस्तुति से संबंधित आपत्ति उठाई गई थी। हाईकोर्ट ने उस स्तर पर आवेदन खारिज कर दिया और कहा कि चुनाव याचिका के ट्रायल को आगे बढ़ाया जाए।

हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, विवाद में यह सवाल शामिल है कि चुनाव याचिका वास्तव में कब प्रस्तुत की गई थी, उस समय उसमें क्या कमियां थीं और बाद में उन कमियों को दूर किए जाने का कानूनी प्रभाव क्या है। अदालत ने इन पहलुओं को रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर तय किए जाने की बात कही है।

क्या है पूरा चुनाव विवाद?

यह पूरा मामला 2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की पाटन सीट से जुड़ा है। भूपेश बघेल ने इस चुनाव में जीत दर्ज की थी, जबकि उनके खिलाफ भाजपा के विजय बघेल चुनाव मैदान में थे।

विजय बघेल की चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदान से पहले लागू 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि के दौरान भूपेश बघेल ने पाटन विधानसभा क्षेत्र में रैली निकाली थी। इसी आधार सहित अन्य दावों के जरिए उनके निर्वाचन को चुनौती दी गई है।

दूसरी ओर, भूपेश बघेल की ओर से मुख्य आपत्ति चुनाव याचिका की वैधता और समय-सीमा को लेकर है। उनके वकीलों का तर्क है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा का पालन जरूरी है।

आगे क्या होगा?

Bhupesh Baghel Supreme Court मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब चुनाव याचिका की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। समय-सीमा से जुड़ा विवाद अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और संबंधित कानूनी सवालों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कार्यवाही जारी है।

इसलिए सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा आदेश को भूपेश बघेल के निर्वाचन को लेकर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। चुनाव याचिका के मूल आरोपों और उससे जुड़े कानूनी सवालों पर आगे की सुनवाई में अदालत के रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय होना है।

जरुर पढ़ें

InkLink News Agency is a fast-growing digital news agency and aggregator delivering accurate, timely, and reliable updates across India. We provide dedicated coverage for India, Chhattisgarh, and Madhya Pradesh, along with in-depth reporting across key categories including Business, Technology, Politics, Crime, Literature, and more.

Stay informed. Stay connected. Stay ahead with InkLink News Agency.