Korba Gangrape Case Verdict में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने लेमरू थाना क्षेत्र के सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला उस मामले में आया, जिसमें सुनवाई के दौरान पीड़िता ने शुरुआती बयान में घटना से इनकार कर दिया था। बाद में FSL और DNA रिपोर्ट समेत वैज्ञानिक साक्ष्यों ने जांच को महत्वपूर्ण आधार दिया।
रात में घर में घुसने का आरोप
अभियोजन के अनुसार, घटना 19 जुलाई 2025 की रात की है। लेमरू थाना क्षेत्र में रहने वाली महिला अपने घर में अकेली थी। आरोप है कि उसी गांव के रहने वाले हसरुहन मंझवार और अजय सिंह उरांव रात के समय उसके घर में जबरन दाखिल हुए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
अभियोजन के मुताबिक, घटना के बाद आरोपियों ने महिला को धमकी दी और मौके से फरार हो गए। अगले दिन महिला ने अपने देवर-देवरानी और अन्य लोगों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को किया गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद लेमरू पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके मेडिकल परीक्षण के साथ जरूरी नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए।
मामले की जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े DNA सैंपल समेत अन्य साक्ष्यों को राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL), रायपुर भेजा गया। बाद में सामने आई फोरेंसिक रिपोर्ट ने केस की जांच में अहम भूमिका निभाई।
कोर्ट में बयान से मुकर गई थी पीड़िता

Korba Gangrape Case Verdict का सबसे अहम पहलू सुनवाई के दौरान सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, पीड़िता ने अदालत में शुरुआती बयान के दौरान घटना से इनकार कर दिया था। इससे अभियोजन के सामने मामले को साबित करने की चुनौती बढ़ गई।
इसके बाद DNA और FSL रिपोर्ट को अदालत के सामने रखा गया। वैज्ञानिक साक्ष्य सामने आने के बाद अदालत ने पीड़िता को दोबारा बयान के लिए बुलाया। सुरक्षा के बीच दर्ज किए गए दोबारा बयान में महिला ने बताया कि आरोपियों की धमकी और डर के कारण उसने पहले अदालत में घटना से इनकार किया था।
DNA रिपोर्ट बनी अहम कड़ी
मामले में DNA रिपोर्ट को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने DNA और FSL रिपोर्ट के साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान, पुलिस जांच और मेडिकल साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा।
अतिरिक्त लोक अभियोजक मोहन सोनी ने अभियोजन की ओर से पैरवी की। उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल की सजा

मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा की अदालत में हुई। अदालत ने हसरुहन मंझवार और अजय सिंह उरांव को दोषी करार देते हुए दोनों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

इस तरह Korba Gangrape Case Verdict में अदालत ने अभियोजन द्वारा पेश किए गए वैज्ञानिक और अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों की रही अहम भूमिका
इस मामले की सुनवाई में DNA और FSL रिपोर्ट की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि ट्रायल के दौरान पीड़िता के शुरुआती बयान में बदलाव सामने आया था। ऐसे में अभियोजन ने वैज्ञानिक जांच से मिले साक्ष्यों के साथ अन्य परिस्थितिजन्य और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रखे।
अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को अब 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। कोरबा के लेमरू क्षेत्र से जुड़े इस मामले में फैसला एक बार फिर दिखाता है कि आपराधिक मामलों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।