दुर्ग: छत्तीसगढ़ के 1 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षक लंबे समय से हड़ताल में हैं। सोमवार को अतिथि शिक्षकों ने आंदोलन तेज कर दिया है। वह करीब 28 घंटे से शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के दुर्ग स्थिति आवास के बाहर बैठे हैं। भारी बारिश में अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव करने से पहले अतिथि शिक्षकों ने 20 दिनों तक हिंदी भवन के सामने प्रदर्शन कर रहे थे।

शिक्षकों की मांग है कि संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय बढ़ाया जाए। इन्हीं मांगों को लेकर वह शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने की कोशिश करने पहुंचे थे। इसके बाद वह मंत्री के घर के बाहर धरने पर बैठ गए। बारिश के बीच प्रदर्शकारी शिक्षकों ने सोमवार की रात सड़कों पर बिताई।
फ्लैशलाइट जलाकर विरोध
दुर्ग जिले में सोमवार शाम से बारिश हो रही है। बारिश के बीच अतिथि शिक्षकों ने रैली निकाली और शाम को फ्लैश लाइट जलाकर विरोध जताया। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 11 साल से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित इलाकों के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज भी केवल मानदेय के भरोसे काम कर रहे हैं। अतिथि शिक्षक मंत्री के बंगले के बाहर बैठे हुए हैं।
मंत्री से मुलाकात की मांग
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि मंत्री से मुलाकात नहीं नहीं हुई है। जिस कारण से वह बीते 28 घंटे से मंत्री बंगले के बाहर डटे हुए हैं। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वह मंत्री से मुलाकात करके अपनी मांगों को रखेंगे। वहीं, पुलिस प्रशासन ने मंत्री के बंगले के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। बंगले के आसपास बैरिकेडिंग लगा दी गई है।
क्या है अतिथि शिक्षकों की मांग
- संविलियन की प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए।
- समायोजन पर सरकार ठोस और स्पष्ट फैसला ले।
- समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए।
- सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- लंबे समय से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए स्थायी नीति लागू हो।
- मानदेय में वृद्धि की जाए, वतर्मान मानदेय करीब 20 हजार रुपये है।
- आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों की तर्ज पर बेहतर वेतन और सुविधाएं दी जाएं।
खून से लिखा था लेटर
इससे पहले अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग भी की थी। उनका कहना था कि अगर सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती तो उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है।