रायपुर। बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े फ्यूज कॉल ऑपरेटरों और मेंटेनेंस श्रमिकों के भुगतान में कथित गड़बड़ी के मामले में जांच पूरी होने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। जांच में लगभग 93 लाख रुपये के भुगतान में अनियमितता सामने आने के बाद रिपोर्ट संबंधित कार्यालय में पिछले आठ महीनों से लंबित बताई जा रही है।
फर्जी उपस्थिति के आधार पर हुआ भुगतान
जानकारी के अनुसार, शहर के दोनों विद्युत संभागों में पिछले कई वर्षों से फ्यूज कॉल और सुधार कार्य निजी ठेकेदारों के माध्यम से कराए जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि श्रमिकों की कथित फर्जी उपस्थिति दर्ज कराकर भुगतान लिया गया। शिकायत मिलने के बाद गठित जांच समिति ने मामले की जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें लगभग 93 लाख रुपये की अनियमितता का उल्लेख किया गया है।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच रिपोर्ट में संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना भुगतान संबंधी कागजात पर अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए। ऐसे में ठेकेदारों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद भी अब तक किसी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई है।
एक ही कर्मचारी की कई स्थानों पर ड्यूटी दर्ज
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में एक ही श्रमिक की ड्यूटी एक ही दिन में अलग-अलग जोन में दर्ज दिखाई गई। वहीं कुछ रिकॉर्ड में कर्मचारियों से एक दिन में निर्धारित समय से कहीं अधिक घंटे कार्य कराए जाने का उल्लेख भी मिला। इसके अलावा कई स्थानों पर आवश्यक संख्या से कम कर्मचारियों के माध्यम से कार्य कराने के बावजूद पूर्ण भुगतान किए जाने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज बताई गई है।
रिपोर्ट पर कार्रवाई को लेकर विभाग का बयान
विद्युत कंपनी के कार्यपालक निदेशक ए.के. अम्बस्ट ने बताया कि जांच रिपोर्ट मानव संसाधन विभाग के पास है। उनके अनुसार, अनुबंध से जुड़े मामलों में संबंधित अधिकारी कार्रवाई के लिए अधिकृत होते हैं। यदि रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाती है तो आवश्यक कार्रवाई, जिसमें ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है, नियमानुसार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले से संबंधित फाइल मंगाकर उसकी समीक्षा की जाएगी।