रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। प्रदेश में लंबे समय से शिक्षकों की भर्ती का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों, शिक्षकविहीन स्कूलों और आगामी भर्ती की योजना को लेकर विस्तृत जानकारी सदन में प्रस्तुत की। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सदस्यों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए बताया कि राज्य में हजारों पद अभी भी खाली हैं और भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार की जाएगी।
प्रदेश में 50,000 से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त
विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों को मिलाकर कुल 50,472 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। सरकार ने पहले ही 5,000 संविदा शिक्षकों और 5,000 नियमित शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
| क्रम | विवरण | संख्या |
|---|---|---|
| 1 | संचालित प्राथमिक शालाएं | 22,447 |
| 2 | स्वीकृत पद | 89,375 |
| 3 | कार्यरत शिक्षक | 58,840 |
| 4 | रिक्त पद | 30,535 |
| 5 | शिक्षक विहीन विद्यालय | 82 |
| 6 | एकल शिक्षकीय विद्यालय | 2,265 |
| 7 | द्वि शिक्षकीय विद्यालय | 14,052 |
| 8 | त्रि शिक्षकीय विद्यालय | 4,186 |
| 9 | चार शिक्षकीय विद्यालय | 1,070 |
| 10 | पांच शिक्षकीय विद्यालय | 437 |
| 11 | पांच से अधिक शिक्षक वाले विद्यालय | 355 |
| 12 | समायोजित/युक्तियुक्तकरण विद्यालय | 8,007 |
प्राथमिक स्कूलों में 30,535 पद खाली
अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह के प्रश्न के उत्तर में स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 22,447 शासकीय प्राथमिक शालाएं संचालित हैं। इन स्कूलों में 89,375 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जबकि 58,840 शिक्षक कार्यरत हैं। इसका मतलब है कि केवल प्राथमिक स्कूलों में ही 30,535 पद रिक्त हैं।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि शिक्षकों की कमी का असर सीधे स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
82 सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं
सदन में पेश जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 82 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय भी हैं जहां केवल एक या दो शिक्षक ही पूरे स्कूल का संचालन कर रहे हैं।
विधानसभा में शिक्षक उपलब्धता के आधार पर स्कूलों की संख्या का भी विवरण दिया गया। इसमें शिक्षकविहीन, एकल शिक्षक, द्वि-शिक्षक, त्रि-शिक्षक तथा पांच या उससे अधिक शिक्षकों वाले विद्यालयों का अलग-अलग ब्यौरा सरकार ने प्रस्तुत किया।
57 हजार शिक्षकों की भर्ती को लेकर पूछा गया सवाल
कांग्रेस विधायक इंद्र साव ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में कुल कितने शिक्षकों के पद रिक्त हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राज्य सरकार द्वारा 57 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की गई थी, उस पर अब तक क्या प्रगति हुई है।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि 1 जनवरी 2024 से 15 जून 2026 तक कितने शिक्षकों की नियुक्ति की गई है और शेष रिक्त पदों को भरने की क्या कार्ययोजना है।
शिक्षा मंत्री ने भर्ती को लेकर क्या कहा?
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की ओर से सदन में दिए गए लिखित जवाब में कहा गया कि शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया नियमानुसार और चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सरकार ने बताया कि भर्ती की प्रक्रिया विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय औपचारिकताओं के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 57 हजार रिक्त पदों पर भर्ती कब तक पूरी होगी। जवाब में किसी निश्चित समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों युवा
प्रदेश में पिछले कई वर्षों से नियमित शिक्षक भर्ती नहीं होने के कारण लाखों अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सरकार द्वारा 10 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा के बाद उम्मीदवारों को उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन रिक्त पदों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने के कारण अभ्यर्थी व्यापक भर्ती अभियान की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि बड़ी संख्या में रिक्त पदों का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी अधिक गंभीर बनी हुई है।
भर्ती प्रक्रिया पर बनी रहेगी नजर
विधानसभा में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। प्राथमिक स्कूलों में ही 30 हजार से अधिक पद रिक्त हैं, जबकि सभी स्तरों को मिलाकर 50 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। ऐसे में अब शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों की नजर सरकार की आगामी भर्ती प्रक्रिया और उसके आधिकारिक कार्यक्रम पर टिकी हुई है।