Bhupesh Baghel On BJP: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान महंगाई, आयुष्मान योजना, नगर निगम विवाद, महानदी जल विवाद, धर्मांतरण और RDA जमीन मामले समेत कई मुद्दों पर राज्य सरकार से सवाल किए। बघेल ने अलग-अलग मुद्दों पर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी बात रखी और कई मामलों में सरकार से जवाब मांगा।
महंगाई को लेकर भूपेश बघेल का सरकार पर हमला

LPG और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के सवाल पर भूपेश बघेल ने कहा कि आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और दूध की कीमतों का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
बघेल ने आरोप लगाया कि महंगाई को नियंत्रित करने के बजाय लोगों को सलाह दी जा रही है। हालांकि, महंगाई को लेकर बघेल की ओर से कही गई बातें उनके राजनीतिक बयान और आकलन हैं।
गौरतलब है कि 1 अक्टूबर 2026 से घरेलू LPG रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन से जुड़ा नियम लागू हुआ है। केंद्र सरकार के अनुसार, बड़ी संख्या में घरेलू LPG उपभोक्ता यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।
आयुष्मान योजना में अस्पतालों पर कार्रवाई पर सवाल
Bhupesh Baghel On BJP के दौरान आयुष्मान योजना का मुद्दा भी प्रमुख रहा। अस्पतालों पर हो रही कार्रवाई को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि यदि योजना के संचालन में लंबे समय से अनियमितताएं थीं तो सरकार ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की।
उन्होंने पूछा कि सरकार पिछले तीन वर्षों से इस मामले को लेकर क्या कर रही थी। बघेल ने आरोप लगाया कि संबंधित विभागों को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए और अनियमितता पाए जाने पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए थी।
नगर निगम विवाद पर भी प्रतिक्रिया
रायपुर नगर निगम में अधिकारियों और महापौर के बीच चल रहे विवाद को लेकर भी भूपेश बघेल ने टिप्पणी की। उन्होंने इस घटनाक्रम को सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
बघेल ने तंज करते हुए इसे सरकार के सुशासन से जोड़ा और पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी। उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासन के बीच जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए। ये टिप्पणियां बघेल की राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आईं।
महानदी जल विवाद पर मुख्यमंत्री से रखी मांग

महानदी जल विवाद को लेकर 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक भी हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इसी मुद्दे पर भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि महानदी से जुड़े कई प्रोजेक्ट प्रभावित हैं। उन्होंने गर्मियों में जगदलपुर समेत अन्य क्षेत्रों की पानी की जरूरतों का भी उल्लेख किया।
धर्मांतरण के मुद्दे पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग
धर्मांतरण को लेकर साहू समाज की ओर से जताई जा रही चिंताओं पर भी भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल गंभीरता जताने से समस्या का समाधान नहीं होगा और सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
बघेल ने दावा किया कि समाज अपने स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कदम उठा रहा है, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने इसी दौरान सरकार पर तंज भी किया।
RDA जमीन विवाद पर केदार कश्यप का जिक्र

रायपुर विकास प्राधिकरण यानी RDA से जुड़े जमीन विवाद पर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने मंत्री केदार कश्यप का नाम लेते हुए सवाल उठाए। बघेल ने इस मामले के साथ केदार कश्यप से जुड़े एक पुराने परीक्षा प्रकरण का भी जिक्र किया और उस मामले को लेकर आरोप लगाए।
बघेल ने सवाल किया कि केदार कश्यप से जुड़े विवाद बार-बार चर्चा में क्यों आते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन बयानों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया उस समय तक सामने नहीं आई थी। इसलिए बघेल द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
RDA जमीन विवाद को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं। इसलिए मामले में आरोपों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
कई मुद्दों पर एक साथ सरकार को घेरा
Bhupesh Baghel On BJP के तहत सामने आए इस बयान में पूर्व मुख्यमंत्री ने एक साथ कई राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे उठाए। उन्होंने महंगाई को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल किया, आयुष्मान योजना में अस्पतालों पर कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा और नगर निगम विवाद पर टिप्पणी की।
इसके अलावा महानदी जल विवाद में छत्तीसगढ़ का पक्ष मजबूती से रखने की मांग की गई। धर्मांतरण के मुद्दे पर सरकार से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई, जबकि RDA जमीन मामले में मंत्री केदार कश्यप को लेकर सवाल उठाए गए।
फिलहाल इन मुद्दों पर भूपेश बघेल के बयान राजनीतिक आरोप और मांगों के रूप में सामने आए हैं। सरकार या संबंधित नेताओं की ओर से आने वाली प्रतिक्रियाओं के बाद अलग-अलग मामलों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।