Bastar Gold Recovery: बस्तर के जंगल में जमीन के नीचे छिपा था ‘नक्सली खजाना’! AK-47 के साथ मिला सोना

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Bastar Gold Recovery ने एंटी-नक्सल ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के गुप्त ठिकानों और अंडरग्राउंड डंप की एक अलग तस्वीर सामने ला दी है। पुलिस के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले दो वर्षों के दौरान नक्सलियों के छिपाए गए ठिकानों से कम से कम 8 किलो सोना बरामद किया गया है। इनमें बड़ी मात्रा में सोने के बिस्किट शामिल हैं।

बताया गया है कि यह सोना बीजापुर जिले के बासागुड़ा और कुटरू तथा दंतेवाड़ा के बारसूर जैसे दुर्गम इलाकों में बनाए गए गुप्त डंप से मिला। इन ठिकानों में सोने के साथ हथियार और दूसरी सामग्री भी जमीन के नीचे छिपाकर रखी जाती थी।

जमीन के नीचे बनाए जाते थे गुप्त डंप

पुलिस के अनुसार, माओवादी जंगलों के अंदर ऐसे स्थानों को चुनते थे जहां सामान्य लोगों की आवाजाही बेहद कम होती है। प्लास्टिक के ड्रम या दूसरे कंटेनरों में सामान रखकर उसे जमीन के नीचे दबा दिया जाता था। इसके बाद मिट्टी, लकड़ी और जंगल में मौजूद प्राकृतिक सामग्री से डंप को इस तरह ढक दिया जाता था कि ऊपर से वहां किसी गुप्त ठिकाने का अंदाजा लगाना मुश्किल हो।

इन डंप से सुरक्षा बलों को हथियारों के साथ सोना भी मिला है। हालिया बरामदगियों ने जांच एजेंसियों का ध्यान नक्सलियों के आर्थिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के इस तरीके की ओर खींचा है।

नोटबंदी के बाद नकदी की जगह सोने पर भरोसा?

एंटी-नक्सल ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभाल रहे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद के मुताबिक, 2016 की नोटबंदी के अनुभव के बाद नक्सलियों को बड़ी मात्रा में नकदी रखने के जोखिम का अंदाजा हुआ। पुलिस अधिकारी के अनुसार, इसी वजह से उन्होंने अपनी नकदी का एक हिस्सा सोने में बदलकर रखना शुरू किया।

पुलिस का कहना है कि सोने को जरूरत पड़ने पर नकदी में बदला जा सकता है। इसी वजह से नक्सली इसे अपने वित्तीय संसाधनों को सुरक्षित रखने के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे।

सुरक्षा एजेंसियों को कुछ स्थानों से पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोटों के बंडल भी मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि नक्सली नोटबंदी के बाद अपने पास मौजूद पूरी पुरानी नकदी को बदल नहीं पाए थे।

कैडरों को नकदी की जगह दिए जाते थे सोने के बिस्किट

Bastar Gold Recovery से जुड़ी जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कुछ मौकों पर नक्सली अपने खास नेताओं या कैडरों को खर्च के लिए नकदी के बजाय सोने के बिस्किट या सिक्के भी देते थे।

इसका मकसद जंगलों में बड़ी मात्रा में नकदी रखने से बचना और जरूरत के समय इस्तेमाल किए जा सकने वाले मूल्यवान सामान को सुरक्षित रखना बताया गया है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बरामद किए गए पूरे सोने का स्रोत क्या था। पुलिस अब इन बरामदगियों के जरिए नक्सली संगठन के आर्थिक नेटवर्क और धन के स्रोतों को समझने की कोशिश कर रही है।

बासागुड़ा, कुटरू और बारसूर में मिली बरामदगी

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में हुई सोने की बरामदगी बस्तर के अलग-अलग नक्सल प्रभावित इलाकों में बने सप्लाई डंप से हुई है।

  • बीजापुर के बासागुड़ा क्षेत्र से नक्सली डंप की बरामदगी।
  • कुटरू के दुर्गम जंगलों में भी गुप्त ठिकाने सामने आए।
  • दंतेवाड़ा के बारसूर इलाके में भी सोने और हथियारों से जुड़ी बरामदगी हुई।
  • पिछले दो वर्षों में कुल मिलाकर कम से कम 8 किलो सोना बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
  • हालिया महीनों में बरामद सोने का बड़ा हिस्सा बिस्किट के रूप में मिला है।

दंतेवाड़ा के बारसूर इलाके में जुलाई 2026 की एक कार्रवाई में पुलिस ने 116 ग्राम का सोने का बिस्किट, नकदी और बड़ी संख्या में हथियार व विस्फोटक बरामद किए थे।

आत्मसमर्पण कर चुके कैडरों से मिल रही डंप की जानकारी

Bastar Gold Recovery: बस्तर के जंगल में जमीन के नीचे छिपा था ‘नक्सली खजाना’! AK-47 के साथ मिला सोना

जंगलों में छिपाए गए सभी गुप्त डंप तक पहुंचना सुरक्षा बलों के लिए आसान नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, कई ठिकानों की जानकारी संगठन के चुनिंदा शीर्ष नेताओं तक ही सीमित रहती थी।

अब सुरक्षा एजेंसियां आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से मिली जानकारी का इस्तेमाल ऐसे पुराने डंप तलाशने में कर रही हैं। इसी तरह की सूचनाओं के आधार पर बस्तर के अलग-अलग इलाकों में हथियारों और अन्य सामग्री की बरामदगी हुई है।

सोने के साथ हथियारों का जखीरा भी बरामद

बस्तर में Bastar Gold Recovery की इन कार्रवाइयों में केवल सोना ही नहीं, बल्कि हथियार और अन्य सैन्य सामग्री भी बरामद हुई है। अलग-अलग अभियानों में सुरक्षा बलों को AK-47 और अन्य राइफलें, मैगजीन, विस्फोटक, नकदी और दूसरे सामान मिले हैं।

इससे सुरक्षा एजेंसियों को नक्सलियों के पुराने लॉजिस्टिक नेटवर्क और जंगलों में बनाए गए सप्लाई डंप के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही है।

फिलहाल सुरक्षा बल बस्तर के अंदरूनी इलाकों में एंटी-नक्सल अभियान जारी रखे हुए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि जंगलों में छिपे पुराने डंप की तलाश के दौरान हथियारों और आर्थिक संसाधनों से जुड़ी और बरामदगियां सामने आ सकती हैं।

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