बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सोमवार से नया रोस्टर 2026 प्रभावी हो गया है। चीफ जस्टिस की ओर से जारी नए रोस्टर में डिविजन बेंच और सिंगल बेंच के लिए अलग-अलग मामलों का आवंटन किया गया है।
नए रोस्टर के तहत हाईकोर्ट में 4 डिविजन बेंच मामलों की सुनवाई करेंगी। इसके अलावा सिंगल बेंच में भी मामलों को विषय और वर्ष के आधार पर अलग-अलग बांटा गया है।
किस डिविजन बेंच में कौन-से केस होंगे?
जारी रोस्टर के अनुसार डिविजन बेंच-1 में चीफ जस्टिस और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ सुनवाई करेगी। इस बेंच के सामने जनहित याचिका, रिट अपील, हेबियस कॉर्पस, आपराधिक अपील सहित अन्य निर्धारित मामलों की सुनवाई होगी।
डिविजन बेंच-2 में जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की पीठ होगी। यह बेंच आपराधिक मामलों के साथ वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामलों की सुनवाई करेगी।
वहीं, डिविजन बेंच-3 को वर्ष 2016 से आगे की एक्विटल अपील से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
डिविजन बेंच-4 में सिविल, कंपनी, टैक्स और वैवाहिक मामलों से जुड़े अपीलों की सुनवाई होगी।
सिंगल बेंच में भी मामलों का बंटवारा
नए रोस्टर में सिंगल बेंच के मामलों को भी अलग-अलग विषयों और संबंधित वर्षों के आधार पर विभाजित किया गया है। अलग-अलग पीठों को सर्विस रिट, सिविल रिवीजन, मोटर व्हीकल एक्ट से जुड़े मामले, आपराधिक अपील, दूसरी अपील और अन्य न्यायिक मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
इससे अलग-अलग श्रेणी के मामलों की सुनवाई संबंधित निर्धारित बेंच के सामने होगी।
चीफ जस्टिस की स्पेशल बेंच में इन मामलों की सुनवाई
चीफ जस्टिस की स्पेशल बेंच में कुछ महत्वपूर्ण और विशेष प्रकृति के मामलों की सुनवाई की जाएगी। इनमें जमानत आवेदन, आपराधिक पुनरीक्षण, ट्रांसफर याचिकाएं और अन्य विशेष मामलों को शामिल किया गया है।
नए रोस्टर में सुनवाई के समय को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है। कुछ सिंगल बेंच में निर्धारित मामलों की सुनवाई दोपहर 2:15 बजे के बाद या संबंधित डिविजन बेंच की कॉज लिस्ट पूरी होने के बाद की जाएगी।
नए रोस्टर से मामलों की सुनवाई का बंटवारा स्पष्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए रोस्टर में मामलों को विषय और प्रकृति के अनुसार अलग-अलग बेंच में बांटा गया है। इसके तहत चार डिविजन बेंच के साथ सिंगल बेंच को भी अलग-अलग श्रेणियों के मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
नया रोस्टर सोमवार से प्रभावी होने के बाद अब संबंधित मामलों की सुनवाई निर्धारित बेंच के सामने इसी व्यवस्था के अनुसार होगी।