नई दिल्ली: दो दशक पुरानी मनरेगा योजना की जगह लागू की गई ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G को लेकर पहले महीने के रोजगार आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में इस योजना के तहत पैदा हुए रोजगार में पिछले साल जुलाई की तुलना में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
VB-G RAM G योजना 1 जुलाई 2026 से लागू हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के पहले महीने में 7.67 करोड़ पर्सन-डेज रोजगार दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल जुलाई में मनरेगा के तहत यह आंकड़ा 15.33 करोड़ पर्सन-डेज था।
जुलाई में रोजगार 49.94 फीसदी कम
9 अगस्त तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में VB-G RAM G के तहत 7.67 करोड़ पर्सन-डेज रोजगार पैदा हुआ। इसकी तुलना जुलाई 2025 में मनरेगा के तहत दर्ज 15.33 करोड़ पर्सन-डेज से की गई है।
इस हिसाब से जुलाई में रोजगार सृजन में 49.94 फीसदी की कमी दर्ज हुई।
हालांकि, VB-G RAM G डैशबोर्ड पर जुलाई के लिए 7.67 करोड़ पर्सन-डेज दर्ज हैं, लेकिन ग्रामीण विकास मंत्रालय ने योजना के पहले महीने में लगभग 9 करोड़ पर्सन-डेज रोजगार पैदा होने की जानकारी दी है।
योजना का लाभ लेने वाले परिवार भी घटे
जुलाई 2026 में VB-G RAM G के तहत रोजगार हासिल करने वाले परिवारों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 68.94 लाख परिवारों ने योजना का लाभ लिया।
पिछले साल जुलाई में मनरेगा के तहत यह संख्या करीब 1.42 करोड़ परिवार थी। इस तरह योजना का लाभ लेने वाले परिवारों की संख्या में 51.45 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
पर्सन-डे का क्या मतलब है?
पर्सन-डे किसी योजना के तहत उपलब्ध कराए गए रोजगार को मापने की एक इकाई है। सामान्य तौर पर एक पर्सन-डे का अर्थ है कि एक व्यक्ति को एक दिन का रोजगार मिला।
उदाहरण के तौर पर, अगर 10 मजदूर किसी काम पर 5 दिन तक काम करते हैं, तो कुल रोजगार 50 पर्सन-डे माना जाएगा।
यानी पर्सन-डे की संख्या यह बताती है कि किसी अवधि में कुल कितने श्रम-दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया।
VB-G RAM G के लिए ₹95,692 करोड़ का बजट
ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए VB-G RAM G के तहत 95,692 करोड़ रुपये का बजट अनुमान रखा गया है। अधिकारी ने इसे किसी ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान बताया।
मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि रोजगार की मांग करने वाले 98 फीसदी से अधिक ग्रामीण परिवारों को काम दिया गया है। इसके अलावा 1.33 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिलने और 9 लाख से अधिक एक्टिव वर्कसाइट संचालित होने की जानकारी दी गई है।
मंत्रालय के अनुसार, अब तक पैदा हुए कुल पर्सन-डेज में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 63 फीसदी रही है। यह योजना में निर्धारित एक-तिहाई महिला भागीदारी की आवश्यकता से अधिक है।
अब 100 नहीं, 125 दिन रोजगार की गारंटी
VB-G RAM G योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी दी जाती है। मनरेगा में यह सीमा 100 दिनों की थी।
योजना में एक वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 60 दिनों तक रोजगार की गारंटी रोकने का प्रावधान भी रखा गया है। इसमें मुख्य बुवाई और कटाई के कृषि मौसम को शामिल किया गया है, ताकि ग्रामीण मजदूर इस दौरान कृषि कार्यों में भी उपलब्ध रह सकें।
इस व्यवस्था के तहत रोजगार के 125 दिनों के अधिकार में कटौती नहीं होती। रोके गए अवधि के दिनों को छोड़कर शेष 305 दिनों में पात्र परिवारों को निर्धारित रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
सरकार का तर्क है कि इससे किसानों को खेती के महत्वपूर्ण मौसम में श्रमिक उपलब्ध हो सकेंगे और ग्रामीण मजदूरों को कृषि कार्यों के साथ सरकारी रोजगार योजना से भी आय का अवसर मिलेगा।